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Gorakhpur News: पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन से संभावित टीबी मरीजों की जांच हो सकेगी आसान
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- डिजिटल एक्स-रे और एआई तकनीक से मिलेगी टीबी के संभावित लक्षणों की तुरंत जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। देश से क्षय रोग (टीबी) को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। अब इस दिशा में हाईटेक तकनीक की मदद ली जा रही है। टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए शासन की ओर से जिला अस्पताल के क्षय रोग विभाग को पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन मशीनों से किए गए डिजिटल एक्स-रे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर अपलोड करते ही टीबी के संभावित लक्षणों की पहचान हो सकेगी। इससे समय रहते रोग का पता लगाना आसान होगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि विभाग में पोर्टेबल एक्सरे मशीन शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है।टीबी रोगियों की खोज के लिए जिले में लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। क्षय रोग केंद्रों के साथ-साथ सभी सरकारी अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों का एक्स-रे किया जा रहा है।
पोर्टेबल मशीन होने के कारण इन्हें गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से ले जाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि एआई आधारित जांच में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो संबंधित मरीज का बलगम सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच कराई जाती है। टीबी की पुष्टि होने पर तुरंत इलाज शुरू किया जाता है। टीबी रोगियों को खोजने में गांवों तक टीमें जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। देश से क्षय रोग (टीबी) को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। अब इस दिशा में हाईटेक तकनीक की मदद ली जा रही है। टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए शासन की ओर से जिला अस्पताल के क्षय रोग विभाग को पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन मशीनों से किए गए डिजिटल एक्स-रे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर अपलोड करते ही टीबी के संभावित लक्षणों की पहचान हो सकेगी। इससे समय रहते रोग का पता लगाना आसान होगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि विभाग में पोर्टेबल एक्सरे मशीन शासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है।टीबी रोगियों की खोज के लिए जिले में लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। क्षय रोग केंद्रों के साथ-साथ सभी सरकारी अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों का एक्स-रे किया जा रहा है।
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पोर्टेबल मशीन होने के कारण इन्हें गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से ले जाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि एआई आधारित जांच में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो संबंधित मरीज का बलगम सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच कराई जाती है। टीबी की पुष्टि होने पर तुरंत इलाज शुरू किया जाता है। टीबी रोगियों को खोजने में गांवों तक टीमें जा रही है।
