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कोरियन क्रेज या पागलपन: ड्रामा देख बदली इंजीनियरिंग छात्रा, भाषा से लेकर मेकअप और कपड़े भी वैसे ही पहनने लगी

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: विकास कुमार Updated Sat, 07 Feb 2026 05:51 PM IST
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सार

काउंसिलिंग के लिए अभिभावक छात्रा को मनोविज्ञानी के पास लेकर गए तो पता चला कि वह दिन में छह से आठ घंटे तक कोरियन लव ड्रामा और मूवीज देखती थी। वह उसी तरह रहने लगी थी और उसकी बोलचाल में कुछ कोरियन शब्द भी आने लगे थे। उसका पात्रों की तरह रोजाना अलग-अलग तरह का मेकअप (स्किन रूटीन) और पहनावा भी वैसा ही हो गया था। 

engineering student changed her language makeup and clothes after watching korean drama in Gorakhpur
कोरियन ड्रामा देख बदली गई इंजीनियरिंग की छात्रा, पढ़ाई हुई चौपट - फोटो : adobe stock
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विस्तार

यूपी के गोरखपुर में ऑनलाइन गेम और कोरियन लव ड्रामा का क्रेज काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर लड़कियों को यह कोरियन वेब सीरिज और मूवीज काफी पसंद आ रही हैं। हाल ही में गोरखपुर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा कोरियन लव ड्रामा देखकर इतनी बुरी तरह से प्रभावित हो गई कि पहले कोरियन शब्द बोलने लगी और फिर उसी तरह मेकअप और कपड़े भी पहनने शुरू कर दिए। यही नहीं, साथियों से उसी तरह का व्यवहार चाहने लगी। इसका दुष्प्रभाव यह रहा कि उसकी पढ़ाई पर असर पड़ने लगा और परीक्षा में उसके नंबर भी काफी कम हो गए।

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छह से आठ घंटे तक देखती थी कोरियन लव ड्रामा 
काउंसिलिंग के लिए अभिभावक उसे मनोविज्ञानी के पास लेकर गए तो पता चला कि वह दिन में छह से आठ घंटे तक कोरियन लव ड्रामा और मूवीज देखती थी। वह उसी तरह रहने लगी थी और उसकी बोलचाल में कुछ कोरियन शब्द भी आने लगे थे। उसका पात्रों की तरह रोजाना अलग-अलग तरह का मेकअप (स्किन रूटीन) और पहनावा भी वैसा ही हो गया था। यहां तक कि वह चाहने लगी कि उसके इर्द-गिर्द भी साथी वैसा ही करें। सेमेस्टर में उसके अंक कम हुए तब परिवार वालों का ध्यान गया और काउंसिलिंग शुरू कराई गई।

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तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता
दरअसल, शहर के बच्चों और किशोरों के बीच ऑनलाइन गेम और कोरियन ड्रामा दोनों ही काफी लोकप्रिय हो गए हैं। ऑनलाइन गेम्स में फ्रीफायर, बीजीएमआई, माइनक्राफ्ट, अमंगग अस और कॉल ऑफ ड्यूटी मोबाइल खास तौर पर पसंद किए जाते हैं। ये गेम्स बच्चों को मल्टीप्लेयर अनुभव, टीमवर्क और क्रिएटिविटी का मौका देते हैं, इसलिए इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

काफी देखे जा रहे ये ड्रामा
वहीं कोरियन ड्रामा (के-ड्रामा) भी बच्चों और टीनएजर्स के बीच चर्चा के विषय बन गए हैं। खास तौर पर 'एक्स्ट्राऑर्डिनरी यू', 'ट्रू ब्यूटी', 'माई आई इन गनगम ब्यूटी', 'सिक्वड गेम' और 'ऑल ऑफ अस आर डेड' जैसे ड्रामा काफी देखे गए हैं। इन ड्रामा में दोस्ती, स्कूल लाइफ, फैंटेसी और इमोशन्स को आकर्षक तरीके से दिखाया जाता है, जिससे बच्चे आसानी से जुड़ाव महसूस करते हैं। इंटरनेट और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने इन दोनों ट्रेंड्स को भारत में तेजी से फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

फ्रीफायर के चक्कर में छोड़ दी परीक्षा
शहर के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र को फ्रीफायर गेम की इतनी लत थी कि वह दिनभर उसे खेलता रहता था। इस लत के चक्कर में उसने अपनी सेमेस्टर परीक्षा तक छोड़ दी। बाद में जब गेम से दूर होने के लिए लोगों ने कहा और परीक्षा छोड़ने पर डांट मिली तो उसके मन में खुदकुशी के ख्याल आने लगे। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की गई तो स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ।

गेम के चक्कर में उड़ा दिए पेंशन के रुपये
13 साल के एक बच्चे को गेम की इतनी लत लग गई थी कि वह मां का फोन लेकर दिनभर खेलता रहता था। वह ज्यादातर फ्रीफायर गेम खेलता था। पिता के पेंशन के रुपये आते थे। उसने मां के खाते से उसे निकालकर गेम में लगा दिया। बाद में मां ने जब खाता चेक किया तो रुपये गायब मिले। इसके बाद वे मनोविज्ञानी के पास लेकर गईं। बताया जा रहा है कि गेम खेलने से रोकने पर वह अक्सर झल्ला जाता था। कई बार तो वह घर के लोगों से बात तक नहीं करता था।

शुरुआत में मुफ्त होता है गेम
साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह ने बताया कि ऑनलाइन गेम के चक्कर में बच्चे कई तरीकों से रुपये गंवा देते हैं। ज्यादातर गेम इन-ऐप परचेज, स्किन, डायमंड, यूसी, लेवल-अप या पावर बढ़ाने के नाम पर रुपये खर्च करवाते हैं। शुरुआत में गेम मुफ्त लगता है लेकिन जीतने या आगे बढ़ने के लिए बच्चे बार-बार पैसे डालते हैं। कई बार बच्चे माता-पिता के फोन से बिना जानकारी के पेमेंट कर देते हैं। कुछ गेम लत लगाने वाले डिजाइन होते हैं, जिससे बच्चा बार-बार खेलने और खर्च करने को मजबूर हो जाता है। इससे गेमिंग एप को फायदा होता है क्योंकि लाखों यूजर्स छोटे-छोटे अमाउंट खर्च करते हैं, जो मिलकर बड़ी कमाई बन जाते हैं। इसके अलावा विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन और स्पेशल ऑफर्स से भी एप कंपनियां भारी मुनाफा कमाती हैं।

बच्चों से संवाद और संतुलन सबसे जरूरी
मनोविज्ञानी डॉ. आकृति पांडेय के अनुसार, ऑनलाइन गेम और के-ड्रामा की लत से बच्चों को बचाने के लिए उनके साथ संवाद और संतुलन सबसे जरूरी है। बच्चों को डांटने या पूरी तरह रोकने के बजाय उनसे शांत तरीके से बात करनी चाहिए। स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा तय करना, सोने और पढ़ाई का रूटीन बनाना मददगार होता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खेल, संगीत, किताबें और परिवार के साथ समय जैसे विकल्प देना चाहिए ताकि उनका ध्यान दूसरी गतिविधियों में लगे। माता-पिता को बच्चों के कंटेंट पर नजर रखनी चाहिए और उम्र के अनुसार एप्स चुननी चाहिए। अगर बच्चा चिड़चिड़ा, अकेला रहने लगे या पढ़ाई में गिरावट आए, तो काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की मदद लेना जरूरी होता है।

बोले अभिभावक
बच्चों में आजकल मोबाइल फोन की ऐसी लत लग रही है कि कि वह पढ़ाई और खेलकूद से दूर हो जा रहे हैं। डांटने पर भी कोई असर नहीं होता। मोबाइल फोन की समय सीमा तय करना और उनके साथ समय बिताना जरूरी है। - करुणा मिश्रा

मोबाइल फोन की लत की वजह से बच्चे चिड़चिड़े हो जा रहे हैं। दिनभर वह फोन में ही लगे रहते हैं। परिवार के साथ समय और हॉबीज से गेम की लत कम करने में काफी मदद मिल रही है। - मनीषा सिंह

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