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रेलवे फर्जी भर्ती : मास्टरमाइंड के घर आठ घंटे तक ED ने खंगाले दस्तावेज, सात बजे दो गाड़ियों से पहुंची टीम

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 10 Jan 2026 12:18 PM IST
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सार

30 दिसंबर 2023 को बिहार के सोनपुर में सीनियर डीसीएम रौशन कुमार ने चार फर्जी टीटीई को स्टेशन पर टिकट जांच करते फर्जी आइकार्ड से साथ पकड़ा था। मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। खुफिया जांच शुरू हुई तो पता चला कि रेलवे में इस तरह की फर्जी भर्ती का रैकेट पूरे देश में फैला हुआ है। इसी मामले में अनिल पांडेय का नाम सामने आया। इसके बाद अनिल की तलाश में टीमें लगी हुई हैं।

Fake railway recruitment scam, ED scrutinises documents at mastermind's house for eight hours
इसी मकान पर जांच करने पहुंची थी ईडी की टीम।बांसगांव की फुलहर गांव में राघवेंद्र शुक्ला उर्फ अनि
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विस्तार
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रेलवे में फर्जी भर्ती के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बृहस्पतिवार को मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ला उर्फ अनिल पांडेय के बांसगांव के फुलहर गांव स्थित मकान पर छापा मारा। अनिल मौके पर नहीं मिला। पटना से आई टीम ने करीब आठ घंटे तक बड़े भाई धीरज पांडेय से छताछ की और कमरों की तलाशी ली।

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हालांकि, तलाशी के दौरान टीम को कुछ खास हाथ नहीं लगा। इसके बाद टीम के सदस्यों ने दस्तावेज खंगाले। टीम धीरज पांडेय व उनकी पत्नी के बैंक खातों की फोटो काॅफी, मोबाइल, पैन, आधार कार्ड और बैंक लोन का स्टेटमेंट साथ लेकर गई।

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30 दिसंबर 2023 को बिहार के सोनपुर में सीनियर डीसीएम रौशन कुमार ने चार फर्जी टीटीई को स्टेशन पर टिकट जांच करते फर्जी आइकार्ड से साथ पकड़ा था। मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। खुफिया जांच शुरू हुई तो पता चला कि रेलवे में इस तरह की फर्जी भर्ती का रैकेट पूरे देश में फैला हुआ है। इसी मामले में अनिल पांडेय का नाम सामने आया। इसके बाद अनिल की तलाश में टीमें लगी हुई हैं।

ईडी के करीब 10 अधिकारी बृहस्पतिपार को दो गड़ियाें से सुबह सात बजे बांसगांव स्थित फुलहर गांव पहुंच गए। उन्होंने पहले घर के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया। टीम ने अनिल के बड़े भाई धीरज पांडेय से तीन चरणों में पूछताछ की। इसके बाद उनकी पत्नी का भी बयान दर्ज किया।

धीरज के मुताबिक, टीम ने उनसे कहा-तुम्हारे भाई ने रेलवे भर्ती में घोटाला किया है। इतना बड़ा घर कहां से बनवाए हो। इस पर उन्होंने बताया कि लोन लेकर बनाया गया है। भाई के बारे में कुछ नहीं जानते हैं कि वह कहां है। धीरज पांडेय ने बताया कि उन्होंने जांच के दौरान ईडी टीम का पूरा सहयोग किया गया।

उन्होंने बताया कि अनिल करीब एक साल से घर नहीं आया है और कोई संपर्क भी नहीं है। मकान और अन्य संपत्तियों के बारे में टीम ने जानकारी ली। अनिल ने बताया था कि वह जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम गोरखपुर और लखनऊ में करता था। इससे ज्यादा उन्हें कुछ नहीं पता है। टीम के लोगों ने कहा कि जब भी बुलाया जाएगा, सारे दस्तावेज लेकर आ जाना। इसके बाद वे लोग चले गए।

अनिल के पिता राधेकृष्ण पांडेय पहले गैस एजेंसी पर सिलिंडर पहुंचाने वाली गाड़ी चलाते थे। बड़ा भाई धीरज गांव पर ही रहकर खेती करता है।

भाई का नाम राघवेंद्र शुक्ला सुनकर चौंक गए धीरज
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने जब अनिल पांडेय का एक और नाम राघवेंद्र शुक्ला बताया तो बड़े भाई धीरज चौंक गए। उन्होंने टीम से कहा कि कोई गलतफहमी हुई है, हम लोग पांडेय है शुक्ला नहीं। फिर टीम ने बताया कि अनिल पांडेय ही राघवेंद्र शुक्ला नाम लिखता था। टीम ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

इसके बाद भाई धीरज ने उन्हें बैठाया और जांच में सहयोग दिया। धीरज ने संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि पहली बार हमने भी अपने भाई का एक और नाम सुना है।

टीम ने दोपहर का भोजन खुद मंगवाया
धीरज पांडेय ने बताया कि टीम के लोगों से कहा कि भोजन बनवा दे रहे हैं लेकिन उन्होंने मना कर दिया। एक गाड़ी से टीम के लोग गए और भोजन लेकर आए। फिर उन्होंने घर पर ही बैठकर खाना खाया। गांव के लोगाें का कहना है कि गाड़ी आता तो देखा था लेकिन हम लोगों ने समझा कि कोई रिश्तेदार आया होगा।
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