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अवैध सोना : 'बड़े साहब' से 'सौदा' सीख गलाई वाला भी बन गया बड़ा धंधेबाज, सोने में पाउडर मिलाकर खूब किया खेल

रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Sat, 10 Jan 2026 12:35 PM IST
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सार

हिंदी बाजार के यह धंधेबाज वर्ष 1992-93 में किराए पर एक दुकान खोल कर गलाई का काम करता था। अवैध सोने का काम करने वाले धंधेबाजों ने लोकल कारीगर होने की वजह से उसपर भरोसा जताया। वे अवैध सोने की गलाई उसी से करवाने लगे। धंधेबाजों ने बाहर से अवैध सोना लेकर आने वाले कैरियर को उसके सेंटर पर भेजना शुरू कर दिया।

Gold traders have spread their network in Gorakhpur.DRI arrests three with 1600 grams
अवैध सोना( सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीते दिनों अवैध सोने के साथ पकड़े गए तीन तस्करों के पकड़े जाने के बाद हिंदी बाजार में हड़कंप मचा है। वजह है कि इन तस्करों का हिंदी बाजार कनेक्शन। सूत्रों ने बताया कि डीआरआई अब इस कनेक्शन की भी जांच कर रही है। पता चला है कि बाजार में गलाई का काम करने वाला एक धंधेबाज इस कनेक्शन की अहम कड़ी है। वह ''बड़े साहब'' से सौदा (व्यापार की सराफा बोली) सीख इस कनेक्शन का अहम किरदार बन गया है।

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डीआरआई ने बीते दिनों सवा दो करोड़ के साेने के साथ गोरखपुर रेलवे स्टेशन से तीन तस्करों को पकड़ा था। उनकी पहचान गोरखपुर निवासी गंगासागर, आशीष कुमार और जयप्रकाश के रूप में हुई। एजेंसी को पता चला कि सराफा के एक धंधेबाज की दुकान पर कड़जहां निवासी व्यक्ति गलाई का काम करता है। 

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पकड़ा गया गंगासागर उसी के जरिये हिंदी बाजार के धंधेबाजों के संपर्क में आया था। यह भी पता चला कि गलाई का काम करने वाले इस धंधेबाज ने पकाई में पाउडर मिलाकर सोना तैयार किया और मोटा मुनाफा बनाया। इन दिनों उसका नेटवर्क बैंकॉक से गोरखपुर तक संचालित होता है।

एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक, हिंदी बाजार के यह धंधेबाज वर्ष 1992-93 में किराए पर एक दुकान खोल कर गलाई का काम करता था। अवैध सोने का काम करने वाले धंधेबाजों ने लोकल कारीगर होने की वजह से उसपर भरोसा जताया। वे अवैध सोने की गलाई उसी से करवाने लगे।

धंधेबाजों ने बाहर से अवैध सोना लेकर आने वाले कैरियर को उसके सेंटर पर भेजना शुरू कर दिया। इससे वह सीधे कैरियर और उनके नेटवर्क के संपर्क में आ गया। कुछ दिनों के भीतर ही उसने गलाई के अलावा पकाई केंद्र भी खोल दिया।

यहीं से उसका खेल शुरू हुआ। सूत्र बताते हैं कि बुलियन सोने को गलाने के बाद अपने पकाई केंद्र पर भेज देता था। वहां से गले सोने को रखकर पहले से तैयार दूसरा गलाई वाला सोना दे देता था। इस गलाई वाले सोने में वह ऊपर से पाउडर से मिला देता था।

100 ग्राम पके सोने में वह 10 ग्राम पाउडर मिलाता था। इस तरह एक दिन में अगर 500 ग्राम सोने की पकाई कर बदली किया तो 50 ग्राम सोने का उसे मुनाफा हो जाता था। इसी बीच उसने बाजार में ही आभूषणों की छोटी सी दुकान भी खोल ली।

गजपुर के धंधेबाज कर रहे कैरियर का काम
पिछले दिनों टूथपेस्ट में सोने को गलाकर खपाने का मामला सामने आया था। पता चला कि इसका कनेक्शन हिंदी बाजार से लेकर गजपुर तक फैला था। गिरफ्तार तस्करों से पता चला कि इस सिंडिकेट में कैरियर का काम करने वाले तस्कर शामिल हैं। ये बैंकॉक से आने वाले सोने को कोलकाता के रास्ते गोरखपुर लेकर आते हैं।

डीआरआई की कार्रवाई से हिंदी बाजार के धंधेबाज सहमे
डीआरआई ने तीन तस्करों को पकड़ा तो हिंदी बाजार के धंधेबाज खुद के फंसने की चिंता में हलकान हैं। बाजार में यह अफवाह फैली कि एक व्यापारी के लड़के का नाम भी गिरफ्तार आरोपियों में था। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।

धंधेबाजों ने बदला तस्करी का तरीका
हिंदी बाजार के धंधेबाजों ने सोने की तस्करी का नया तरीका इजाद किया है। ब्लेजर, सदरी, हाॅफ कट जैकेट, जोधपुरी कुर्ते के बटन में अवैध सोने को छिपाकर तस्करी की जा रही है। इस पूरे रैकेट में अब धंधेबाज किनारे रहते हैं। जबकि कैरियर और बंबइया इसे तस्करी कर गलाने के बाद टंच लगाकर पक्का सोना बना दे रहे हैं। इसके बदले इन्हें ठीक-ठाक कमीशन मिल जा रहा है।

 
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