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भारत की परंपरा में प्रतिष्ठित है मातृशक्ति : सीएम योगी
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के इतिहास और परंपरा में मातृशक्ति सदैव सर्वोच्च स्थान पर रही है। हमारे यहां भगवान और महापुरुषों के नाम भी माताओं से जोड़कर लिए जाते हैं। भगवान राम को कौशल्यानंदन, श्रीकृष्ण को यशोदानंदन, भीष्म पितामह को गांगेय और अर्जुन को कौंतेय कहा जाता है। विपक्षी पार्टियां महिलाओं को नेतृत्व का अधिकार नहीं देना चाहती हैं।
श्रीराम के नाम में ‘श्री’ शब्द माता सीता के सम्मान का प्रतीक है, जबकि “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष में भी पहले माता सीता का नाम लिया जाता है। इसी तरह मथुरा-वृंदावन में हर अभिवादन “राधे-राधे” से और काशी में “नमः पार्वती पतये” के उद्घोष से होता है। उन्होंने कहा कि गंगा को ‘मां गंगे’ और गाय को ‘गोमाता’ कहकर संबोधित करना भी हमारी परंपरा में मातृशक्ति के सम्मान को दर्शाता है।
सीएम योगी बुधवार शाम योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भीषण गर्मी और कम समय की सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह सहभागिता इस बात का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं को उनके अधिकार से अब अधिक समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। यह कोई भीख नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब नारी सशक्त होती है तो परिवार मजबूत होता है, परिवार मजबूत होने से समाज की नींव सुदृढ़ होती है और इससे राष्ट्र समृद्ध व शक्तिशाली बनता है।
पुलिस में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए व्यापक कार्य हुए हैं। बताया कि 2017 से पहले प्रदेश के कई हिस्सों में बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया गया था, जबकि आज वे बिना किसी भय के शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि 1947 से 2017 तक यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाओं की भर्ती हुई थी, जबकि 2017 के बाद यह संख्या बढ़कर 44-45 हजार हो गई है। अब पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसके अलावा, 2017 के बाद प्रदेश में नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जिनमें लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
आत्मनिर्भर व विकसित भारत को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी आवश्यक
उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के पुनरुद्धार से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में 21 हजार से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिनमें लगभग आधी भागीदारी महिलाओं की है। मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में 54 प्रतिशत ब्लॉक प्रमुख महिलाएं हैं और ग्राम पंचायतों व जिला पंचायतों में भी उनकी भागीदारी 50 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह ने कहा कि जहां बेटियां सुरक्षित होती हैं, वहीं वास्तविक विकास संभव होता है। मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। वहीं, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
मंच पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व
कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, पूर्व महापौर अंजू चौधरी, डॉ. सत्या पांडेय, गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. विनीता पाठक, प्रो. उमा श्रीवास्तव, डॉ. रंजना, वरिष्ठ अधिवक्ता अमिता शर्मा, समाजसेवी सुधा मोदी, महिला उद्यमी संगीता पांडेय, भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष अमिता गुप्ता, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अस्मिता चंद, जिलाध्यक्ष चंचला शुक्ला, रंजुला रावत, अनुपमा पांडेय, गीतांजलि श्रीवास्तव सहित महिला नगर पंचायत अध्यक्ष, महिला ब्लॉक प्रमुख, महिला पार्षद मंचासीन रहीं। इस अवसर पर व्यवस्थागत सहयोग में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, विधायक राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता आदि की सक्रिय सहभागिता रही।
सीएम ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करने से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के सामने महिला कल्याण और विकास पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में गोरखपुर के विकास के साथ ही राज्य में मिशन शक्ति, लखपति दीदी, निराश्रित महिला पेंशन, कन्या सुमंगला, सामूहिक विवाह सहित अनेक योजनाओं की उपलब्धियों को दर्शाया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की योजनाओं के संबल से आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली महिलाओं का उत्साहवर्धन भी किया। उन्होंने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वावलंबी बनीं महिलाओं की तरफ से लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। इन स्टालों पर प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों का अवलोकन कर जानकारी ली और महिलाओं को खूब तरक्की करने के लिए प्रेरित किया।
नौनिहालों का कराया अन्नप्राशन
सीएम योगी ने महिला कल्याण और बाल विकास विभाग के स्टाल का भी अवलोकन किया। बाल विकास के स्टाल पर उन्होंने नौनिहालों का अन्नप्राशन भी कराया। उन्होंने बच्चों को खीर खिलाने के बाद उन्हें आशीर्वाद और उपहार दिया। साथ ही उन्होंने माताओं से कहा, ‘बच्चों को आराम से खीर खिलाइए और जो बच जाए उसे स्वयं खा लीजिएगा।
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श्रीराम के नाम में ‘श्री’ शब्द माता सीता के सम्मान का प्रतीक है, जबकि “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष में भी पहले माता सीता का नाम लिया जाता है। इसी तरह मथुरा-वृंदावन में हर अभिवादन “राधे-राधे” से और काशी में “नमः पार्वती पतये” के उद्घोष से होता है। उन्होंने कहा कि गंगा को ‘मां गंगे’ और गाय को ‘गोमाता’ कहकर संबोधित करना भी हमारी परंपरा में मातृशक्ति के सम्मान को दर्शाता है।
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सीएम योगी बुधवार शाम योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भीषण गर्मी और कम समय की सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह सहभागिता इस बात का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं को उनके अधिकार से अब अधिक समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। यह कोई भीख नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब नारी सशक्त होती है तो परिवार मजबूत होता है, परिवार मजबूत होने से समाज की नींव सुदृढ़ होती है और इससे राष्ट्र समृद्ध व शक्तिशाली बनता है।
पुलिस में 20 प्रतिशत महिलाओं की भर्ती अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए व्यापक कार्य हुए हैं। बताया कि 2017 से पहले प्रदेश के कई हिस्सों में बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया गया था, जबकि आज वे बिना किसी भय के शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि 1947 से 2017 तक यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाओं की भर्ती हुई थी, जबकि 2017 के बाद यह संख्या बढ़कर 44-45 हजार हो गई है। अब पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसके अलावा, 2017 के बाद प्रदेश में नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जिनमें लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
आत्मनिर्भर व विकसित भारत को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी आवश्यक
उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के पुनरुद्धार से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में 21 हजार से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिनमें लगभग आधी भागीदारी महिलाओं की है। मुख्यमंत्री ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में 54 प्रतिशत ब्लॉक प्रमुख महिलाएं हैं और ग्राम पंचायतों व जिला पंचायतों में भी उनकी भागीदारी 50 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह ने कहा कि जहां बेटियां सुरक्षित होती हैं, वहीं वास्तविक विकास संभव होता है। मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। वहीं, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
मंच पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व
कार्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, पूर्व महापौर अंजू चौधरी, डॉ. सत्या पांडेय, गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. विनीता पाठक, प्रो. उमा श्रीवास्तव, डॉ. रंजना, वरिष्ठ अधिवक्ता अमिता शर्मा, समाजसेवी सुधा मोदी, महिला उद्यमी संगीता पांडेय, भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष अमिता गुप्ता, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष अस्मिता चंद, जिलाध्यक्ष चंचला शुक्ला, रंजुला रावत, अनुपमा पांडेय, गीतांजलि श्रीवास्तव सहित महिला नगर पंचायत अध्यक्ष, महिला ब्लॉक प्रमुख, महिला पार्षद मंचासीन रहीं। इस अवसर पर व्यवस्थागत सहयोग में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, विधायक राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता आदि की सक्रिय सहभागिता रही।
सीएम ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करने से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के सामने महिला कल्याण और विकास पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में गोरखपुर के विकास के साथ ही राज्य में मिशन शक्ति, लखपति दीदी, निराश्रित महिला पेंशन, कन्या सुमंगला, सामूहिक विवाह सहित अनेक योजनाओं की उपलब्धियों को दर्शाया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की योजनाओं के संबल से आत्मनिर्भरता की राह पकड़ने वाली महिलाओं का उत्साहवर्धन भी किया। उन्होंने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वावलंबी बनीं महिलाओं की तरफ से लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। इन स्टालों पर प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों का अवलोकन कर जानकारी ली और महिलाओं को खूब तरक्की करने के लिए प्रेरित किया।
नौनिहालों का कराया अन्नप्राशन
सीएम योगी ने महिला कल्याण और बाल विकास विभाग के स्टाल का भी अवलोकन किया। बाल विकास के स्टाल पर उन्होंने नौनिहालों का अन्नप्राशन भी कराया। उन्होंने बच्चों को खीर खिलाने के बाद उन्हें आशीर्वाद और उपहार दिया। साथ ही उन्होंने माताओं से कहा, ‘बच्चों को आराम से खीर खिलाइए और जो बच जाए उसे स्वयं खा लीजिएगा।

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