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बीआरडी : एमबीबीएस छात्रों में आक्रोश, बंद कराया ओपीडी काउंटर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 07 Mar 2026 02:43 AM IST
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गुलरिहा (गोरखपुर)। होली के दिन सड़क दुर्घटना में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र आकाश पांडेय की मौत के बाद शुक्रवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों के आक्रोश के चलते ओपीडी काउंटर बंद करा दिया। इससे कुछ समय के लिए व्यवस्था बाधित हो गई। इस दौरान दूर-दराज से आए मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पूर्वांचल के कई जिलों के साथ-साथ बिहार और नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। शुक्रवार सुबह आठ बजे से 9:30 बजे तक ओपीडी की पर्चियां सामान्य रूप से कटीं। इसी बीच आकाश पांडेय की सड़क दुर्घटना में मौत से आक्रोशित उनके सहपाठी ओपीडी पर्ची काउंटर पर पहुंच गए और सभी काउंटर बंद करा दिए। काउंटर बंद होने के कारण मरीज घंटों तक लाइन में खड़े रहे। दोपहर 12 बजे तक नई पर्ची नहीं कटने पर कई मरीज निराश होकर घर लौटने लगे। हालांकि, जिन मरीजों की पर्ची पहले ही कट चुकी थी, उन्हें डॉक्टरों ने ओपीडी में देखकर इलाज किया। कुछ मरीजों को पुरानी पर्ची के आधार पर भी परामर्श दिया गया। महराजगंज के शिवनाथ मद्देशिया पत्नी को दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे। हालांकि, ओपीडी काउंटर पर पर्ची नहीं बनने के कारण वे डॉक्टर को नहीं दिखा सके और उन्हें लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज आने-जाने में उनका करीब तीन से चार सौ रुपये खर्च हो जाता है। गुलरिहा के मंजीत जायसवाल अपने रिश्तेदार को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बुलाया था। हालांकि, ओपीडी काउंटर बंद होने के कारण वे डॉक्टर को नहीं दिखा सके।
श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन
इसी दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में बाबा राघवदास की मूर्ति के पास छात्र-छात्राओं ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। सभा में प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल, डॉ. पवन प्रधान, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. नरेंद्र देव, डॉ. सुरेश सिंह सहित अन्य चिकित्सक और छात्र मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा के बाद दोपहर करीब 1:20 बजे ओपीडी पर्ची काउंटर फिर से शुरू किए गए लेकिन तब तक अधिकांश मरीज इंतजार कर लौट चुके थे।
सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग
मामले की सूचना मिलने पर एसएसपी डॉ. कौस्तुभ भी अपराह्न 3:10 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने ऑडिटोरियम में छात्रों संग वार्ता की। छात्रों ने उनसे मांग किया कि आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। आकाश परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। साथ ही मौके पर गाड़ी के चालक का फोटो और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई जाए। वहीं, घटना के वक्त गाड़ी में और कौन बैठा था, इसकी भी जानकारी उपलब्ध हो। एसएसपी ने मांगें सुनीं और छात्रों को समझाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल, सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह, शाहपुर थानाध्यक्ष चंद्रभान सिंह, गुलरिहा थानाध्यक्ष इत्यानंद पांडेय मौजूद रहे। करीब 40 मिनट तक चली बैठक के बाद स्थिति शांत हुई।
सीएम को भेजा ज्ञापन
छात्रों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का कहना है कि आकाश पांडेय एक प्रतिभाशाली और समर्पित छात्र थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और मानवता की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया था। आरोपी गोल्डन साहनी की गाड़ी पर ओवर स्पीडिंग के अनेक चालान पहले से हैं और फॉरेंसिक जांच में पाया गया है कि घटना के वक्त उसके खून में शराब की मात्रा काफी अधिक थी। गोल्डन साहनी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जांच प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखा जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए यातायात नियमों और नशे में वाहन चलाने के नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। आकाश अपने परिवार के एकलौते बेटे थे। उनके चले जाने के बाद माता-पिता पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पूर्वांचल के कई जिलों के साथ-साथ बिहार और नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। शुक्रवार सुबह आठ बजे से 9:30 बजे तक ओपीडी की पर्चियां सामान्य रूप से कटीं। इसी बीच आकाश पांडेय की सड़क दुर्घटना में मौत से आक्रोशित उनके सहपाठी ओपीडी पर्ची काउंटर पर पहुंच गए और सभी काउंटर बंद करा दिए। काउंटर बंद होने के कारण मरीज घंटों तक लाइन में खड़े रहे। दोपहर 12 बजे तक नई पर्ची नहीं कटने पर कई मरीज निराश होकर घर लौटने लगे। हालांकि, जिन मरीजों की पर्ची पहले ही कट चुकी थी, उन्हें डॉक्टरों ने ओपीडी में देखकर इलाज किया। कुछ मरीजों को पुरानी पर्ची के आधार पर भी परामर्श दिया गया। महराजगंज के शिवनाथ मद्देशिया पत्नी को दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे। हालांकि, ओपीडी काउंटर पर पर्ची नहीं बनने के कारण वे डॉक्टर को नहीं दिखा सके और उन्हें लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज आने-जाने में उनका करीब तीन से चार सौ रुपये खर्च हो जाता है। गुलरिहा के मंजीत जायसवाल अपने रिश्तेदार को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बुलाया था। हालांकि, ओपीडी काउंटर बंद होने के कारण वे डॉक्टर को नहीं दिखा सके।
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श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन
इसी दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में बाबा राघवदास की मूर्ति के पास छात्र-छात्राओं ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। सभा में प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल, डॉ. पवन प्रधान, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. नरेंद्र देव, डॉ. सुरेश सिंह सहित अन्य चिकित्सक और छात्र मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा के बाद दोपहर करीब 1:20 बजे ओपीडी पर्ची काउंटर फिर से शुरू किए गए लेकिन तब तक अधिकांश मरीज इंतजार कर लौट चुके थे।
सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग
मामले की सूचना मिलने पर एसएसपी डॉ. कौस्तुभ भी अपराह्न 3:10 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने ऑडिटोरियम में छात्रों संग वार्ता की। छात्रों ने उनसे मांग किया कि आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो। आकाश परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। साथ ही मौके पर गाड़ी के चालक का फोटो और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराई जाए। वहीं, घटना के वक्त गाड़ी में और कौन बैठा था, इसकी भी जानकारी उपलब्ध हो। एसएसपी ने मांगें सुनीं और छात्रों को समझाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल, सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह, शाहपुर थानाध्यक्ष चंद्रभान सिंह, गुलरिहा थानाध्यक्ष इत्यानंद पांडेय मौजूद रहे। करीब 40 मिनट तक चली बैठक के बाद स्थिति शांत हुई।
सीएम को भेजा ज्ञापन
छात्रों ने सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का कहना है कि आकाश पांडेय एक प्रतिभाशाली और समर्पित छात्र थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और मानवता की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया था। आरोपी गोल्डन साहनी की गाड़ी पर ओवर स्पीडिंग के अनेक चालान पहले से हैं और फॉरेंसिक जांच में पाया गया है कि घटना के वक्त उसके खून में शराब की मात्रा काफी अधिक थी। गोल्डन साहनी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जांच प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखा जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए यातायात नियमों और नशे में वाहन चलाने के नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। आकाश अपने परिवार के एकलौते बेटे थे। उनके चले जाने के बाद माता-पिता पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है।
