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'जस्टिस फॉर अभय सर': नवोदय के विद्यार्थियों ने किया परीक्षा का बहिष्कार, लिखा- 'हमें न्याय चाहिए'

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Thu, 12 Feb 2026 01:02 PM IST
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सार

बीते शनिवार को कंप्यूटर साइंस के अध्यापक अभय सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद से ही छात्र-छात्राओं में आक्रोश है। विद्यार्थियों का आरोप है कि शिक्षक अभय सिंह को प्रिंसिपल मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। छुट्टी के बावजूद बुलाने पर वह तनाव में थे। इसी वजह से वह हादसे के शिकार हो गए। मंगलवार को विद्यार्थियों ने करीब आठ घंटे तक विद्यालय परिसर में धरना दिया था।

Students of Gorakhpur's Navodaya School skipped meals and exams, writing, "We want justice."
नवोदय के छात्र धरने पर बैठे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पीपीगंज के शिक्षक की सड़क हादसे में मौत के बाद छात्र-छात्राओं का विरोध दूसरे दिन भी जारी रहा। विरोध में छात्राओं ने मंगलवार से ही भोजन करना छोड़ दिया है। बुधवार को कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार करते हुए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं पर 'जस्टिस फॉर अभय सर' और 'हमें न्याय चाहिए' लिखकर विरोध दर्ज कराया।
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परिसर में दिनभर प्रिंसिपल के खिलाफ नारेबाजी होती रही। छात्राओं का आरोप है कि प्रिंसिपल ने उनके साथ अभद्रता की थी। वह मानसिक प्रताड़ना देते थे। विद्यार्थियों ने मांग की है कि प्रिंसिपल को तत्काल पद से हटाकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
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बीते शनिवार को कंप्यूटर साइंस के अध्यापक अभय सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद से ही छात्र-छात्राओं में आक्रोश है। विद्यार्थियों का आरोप है कि शिक्षक अभय सिंह को प्रिंसिपल मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। छुट्टी के बावजूद बुलाने पर वह तनाव में थे। इसी वजह से वह हादसे के शिकार हो गए।

मंगलवार को विद्यार्थियों ने करीब आठ घंटे तक विद्यालय परिसर में धरना दिया था। छात्रों का कहना है कि लंबे समय तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे कई विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने लगी।

बाद में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और क्षेत्राधिकारी (सीओ) पहुंचे और वार्ता की। प्रशासन की ओर से जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

डीएम से सीधे संवाद की मांग
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं ने जिलाधिकारी (डीएम) से सीधे संवाद की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि वे अपनी समस्याएं उच्च प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष रखना चाहते हैं। छात्रों के अनुसार, पूर्व में अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन से वे संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें आशंका है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा सकता है।

दूसरे दिन भी छात्राओं ने नहीं खाया मेस का खाना
आंदोलन के दूसरे दिन बुधवार को भी छात्राओं ने मेस का भोजन नहीं किया। उनका कहना है कि यह उनका शांतिपूर्ण विरोध है। अधिकारियों की ओर से समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन छात्राओं ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रिंसिपल के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, वे अपना विरोध जारी रखेंगी।

विद्यार्थियों का आरोप है कि आंदोलन समाप्त करने के लिए उन्हें निलंबित करने की धमकी दी जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे विद्यालय परिसर में स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रिंसिपल का व्यवहार अपमानजनक है और आवाज उठाने पर दबाव बनाया जाता है। उधर, घटना के बाद से ही प्रिंसिपल स्कूल नहीं आ रहे हैं। इस संबंध में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की कई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

विद्यार्थियों का आरोप-भोजन में गड़बड़ी की शिकायत पर हॉस्टल में घुसकर हमें पीटा
नवोदय विद्यालय में एक हफ्ते पहले विद्यार्थियों ने मेस के भोजन में गड़बड़ी की शिकायत की थी। विवाद बढ़ने के बाद छात्रों ने हंगामा किया था। छात्रों का आरोप है कि शिकायत के बाद कुछ विद्यार्थियों की पिटाई की गई थी। हॉस्टल में घुसकर उन्हें पीटा गया था। हादसे में शिक्षक की मौत के बाद विद्यार्थियों में आक्रोश और बढ़ गया।

विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रिंसिपल उनसे ठीक बर्ताव नहीं करते थे। किसी समस्या को लेकर शिकायत करने पर उन्हें धमकी देते थे। कई बार पिटाई भी कर देते थे। छात्रों ने बताया कि कंप्यूटर साइंस के अध्यापक अभय सिंह उनका साथ देते थे। वह भी प्रिंसिपल से परेशान थे। वह अक्सर कहते थे कि चुपचाप समय काटो और पढ़ाई पर ध्यान दो। 11वीं के छात्रों ने बताया कि उनकी वजह से ही कंप्यूटर साइंस विषय लिया था, अब कोई दूसरा शिक्षक भी नहीं है। उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

छात्रों ने आरोप लगाया कि भोजन में गड़बड़ी की शिकायत के बाद उनके साथ बहुत खराब बर्ताव किया गया। इसी के बाद से उनके अंदर प्रिंसिपल को लेकर नाराजगी है। शिक्षक की मौत के बाद गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने प्रिंसिपल को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
 
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