{"_id":"6a063ae3255914fda50060d8","slug":"the-tender-was-awarded-for-approximately-rupees-138-crore-including-1013-teak-trees-gorakhpur-news-c-7-gkp1006-1321474-2026-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर विश्वविद्यालय : कैंपस से कॉलोनी तक काटे जा रहे 1192 पेड़, दिख रहा उजाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर विश्वविद्यालय : कैंपस से कॉलोनी तक काटे जा रहे 1192 पेड़, दिख रहा उजाड़
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कैंपस से लेकर आवासीय कॉलोनियों और छात्रावासों में तक में पेड़ों की कटाई चल रही है। कुल 1192 पेड़ काटे जाने हैं। इसके लिए 1.38 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) का टेंडर हुआ है। पेड़ों की कटाई के कारण कैंपस में उजाड़ दिख रहा है। डीडीयू प्रशासन पेड़ों की कटाई को जरूरी बता रहा है। इसे लेकर छात्र संगठनों में उबाल है।
डीडीयू प्रशासन ने पेड़ों की नीलामी के लिए टेंडर निकाला था। इसका टेंडर पीलीभीत के विकास अग्रवाल को मिला है। इसके तहत 1192 पेड़ों में सर्वाधिक 1013 सागौन के हैं। इसके अलावा सीरसा के 34, औकठ के 31, यूकेलिप्टस के 28, बेर व सेमर के 15-15, अशोक के 11 समेत 20 प्रकार के पेड़ कटने हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग की मंजूरी मिलने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह से लेकर देर रात तक पेड़ों की कटाई चल रही है।
पेड़ों की कटाई पर अभाविप ने जताया विरोध
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हरे-भरे पेड़ों की कटाई का विरोध किया है। गोरक्ष प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता ने कहा कि जिस शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता व प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, वहीं पर्यावरण विनाश का ऐसा दृश्य प्रस्तुत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक एवं निंदनीय है। ऐसे संवेदनहीन निर्णय भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न कर सकते हैं। अभाविप कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर से मिलकर कटाई पर रोक लगाने की मांग उठाई। चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस पर रोक नहीं लगाई गई तो अभाविप विद्यार्थियों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
विश्वविद्यालय को वृक्षविहीन करने की साजिश
गोरखपुर। एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव आदित्य शुक्ल ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि परिसर में लगातार सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। एक तरफ सरकार ''''''''एक पेड़ मां के नाम'''''''' अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ डीडीयू प्रशासन कैंपस को वृक्ष विहीन बनाने पर तुला है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतने पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि तीन दिन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थित स्पष्ट नहीं की तो एनएसयूआई की ओर से उग्र आंदोलन किया जाएगा। ब्यूरो
विकसित हो रहा 3000 से अधिक फलदार पौधों का शोध एवं अनुसंधान उद्यान
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा- परिसर में विकसित किया गया लगभग 7000 पौधों का मियावाकी उद्यान
गोरखपुर। पेड़ों की कटाई को लेकर छात्र संगठनों के विरोध को देखते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपना पक्ष रखा है। विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने बताया कि परिपक्व आयु पूर्ण कर चुके सागौन के वृक्षों को नियमानुसार हटाने के बाद कृषि संस्थान की ओर से लगभग 3000 से अधिक फलदार पौधों का एक शोध एवं शिक्षण आधारित उद्यान विकसित किया जाएगा। यह उद्यान गृह विज्ञान विभाग भवन से कला संकाय भवन के पीछे स्थित क्षेत्र में स्थापित होगा।
उन्होंने बताया कि परिसर में लगभग 7000 पौधों का मियावाकी उद्यान विकसित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त चंदन वाटिका एवं योग वाटिका जैसी पहलें भी की गई हैं। नगर निगम की ओर से परिसर की लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर पाम, फाइकस एवं झाड़ीदार हेज पौधे लगाए जा रहे हैं। विभिन्न उद्यानों में हरी घास, पाम, बोगनवेलिया एवं मोरपंखी पौधे लगाए जा रहे हैं। सुविधा के लिए लगभग 100 बेंच भी स्थापित किए जा रहे हैं।
कुलपति ने बताया कि विशेषज्ञों ने गृह विज्ञान, ललित कला एवं मनोविज्ञान विभागों के आसपास पूर्व में अव्यवस्थित ढंग से लगाए गए सागौन के वृक्षों के संबंध में सुझाव दिया था कि उनके पत्तों से निकलने वाले टैनिक एसिड के कारण नीचे घास का विकास नहीं हो पाता है। इन वृक्षों के कारण दीमक की समस्या, भवनों एवं सोलर पैनलों को नुकसान जैसी कठिनाइयां भी सामने आ रही थीं। विकसित किए जा रहे उद्यान, वाटिकाएं एवं हरित परियोजनाएं विश्वविद्यालय को आने वाले समय में जैव विविधता, शोध एवं ग्रीन कैंपस के क्षेत्र में नई पहचान प्रदान करेंगे।
Trending Videos
डीडीयू प्रशासन ने पेड़ों की नीलामी के लिए टेंडर निकाला था। इसका टेंडर पीलीभीत के विकास अग्रवाल को मिला है। इसके तहत 1192 पेड़ों में सर्वाधिक 1013 सागौन के हैं। इसके अलावा सीरसा के 34, औकठ के 31, यूकेलिप्टस के 28, बेर व सेमर के 15-15, अशोक के 11 समेत 20 प्रकार के पेड़ कटने हैं। बताया जा रहा है कि वन विभाग की मंजूरी मिलने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह से लेकर देर रात तक पेड़ों की कटाई चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पेड़ों की कटाई पर अभाविप ने जताया विरोध
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हरे-भरे पेड़ों की कटाई का विरोध किया है। गोरक्ष प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता ने कहा कि जिस शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता व प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, वहीं पर्यावरण विनाश का ऐसा दृश्य प्रस्तुत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक एवं निंदनीय है। ऐसे संवेदनहीन निर्णय भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न कर सकते हैं। अभाविप कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर से मिलकर कटाई पर रोक लगाने की मांग उठाई। चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस पर रोक नहीं लगाई गई तो अभाविप विद्यार्थियों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
विश्वविद्यालय को वृक्षविहीन करने की साजिश
गोरखपुर। एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव आदित्य शुक्ल ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि परिसर में लगातार सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। एक तरफ सरकार ''''''''एक पेड़ मां के नाम'''''''' अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ डीडीयू प्रशासन कैंपस को वृक्ष विहीन बनाने पर तुला है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतने पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि तीन दिन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थित स्पष्ट नहीं की तो एनएसयूआई की ओर से उग्र आंदोलन किया जाएगा। ब्यूरो
विकसित हो रहा 3000 से अधिक फलदार पौधों का शोध एवं अनुसंधान उद्यान
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा- परिसर में विकसित किया गया लगभग 7000 पौधों का मियावाकी उद्यान
गोरखपुर। पेड़ों की कटाई को लेकर छात्र संगठनों के विरोध को देखते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपना पक्ष रखा है। विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने बताया कि परिपक्व आयु पूर्ण कर चुके सागौन के वृक्षों को नियमानुसार हटाने के बाद कृषि संस्थान की ओर से लगभग 3000 से अधिक फलदार पौधों का एक शोध एवं शिक्षण आधारित उद्यान विकसित किया जाएगा। यह उद्यान गृह विज्ञान विभाग भवन से कला संकाय भवन के पीछे स्थित क्षेत्र में स्थापित होगा।
उन्होंने बताया कि परिसर में लगभग 7000 पौधों का मियावाकी उद्यान विकसित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त चंदन वाटिका एवं योग वाटिका जैसी पहलें भी की गई हैं। नगर निगम की ओर से परिसर की लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर पाम, फाइकस एवं झाड़ीदार हेज पौधे लगाए जा रहे हैं। विभिन्न उद्यानों में हरी घास, पाम, बोगनवेलिया एवं मोरपंखी पौधे लगाए जा रहे हैं। सुविधा के लिए लगभग 100 बेंच भी स्थापित किए जा रहे हैं।
कुलपति ने बताया कि विशेषज्ञों ने गृह विज्ञान, ललित कला एवं मनोविज्ञान विभागों के आसपास पूर्व में अव्यवस्थित ढंग से लगाए गए सागौन के वृक्षों के संबंध में सुझाव दिया था कि उनके पत्तों से निकलने वाले टैनिक एसिड के कारण नीचे घास का विकास नहीं हो पाता है। इन वृक्षों के कारण दीमक की समस्या, भवनों एवं सोलर पैनलों को नुकसान जैसी कठिनाइयां भी सामने आ रही थीं। विकसित किए जा रहे उद्यान, वाटिकाएं एवं हरित परियोजनाएं विश्वविद्यालय को आने वाले समय में जैव विविधता, शोध एवं ग्रीन कैंपस के क्षेत्र में नई पहचान प्रदान करेंगे।