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जिगरी दोस्त बने दुश्मन: आर्थक और छात्र नेता उज्जवल यादव की लड़की को लेकर दुश्मनी; घर पर बरसाईं दनादन गोलियां

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 23 Feb 2026 03:18 PM IST
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सार

गोरखपुर में दोस्त की बहन से छात्रनेता के बात करने पर मनबढ़ भड़क गए। छात्र नेता के घर फायरिंग कर दी। रात करीब 11 बजे आरोपी घर पर चढ़ गए और चिल्लाते हुए उज्जवल को बाहर बुलाने लगे। परिजनों का आरोप है कि मनबढ़ कह रहे थे कि उज्जवल को बुलाओ, उसे आज जान से मार देंगे।

Up News Firing at Student Leader House in Gorakhpur
gorakhpur firing - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

गोरखपुर में सपा से जुड़े छात्रनेता उज्जवल यादव के घर पर फायरिंग के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अब तक की जांच में सामने आया है कि पूरी साजिश आरोपी आर्थक सिंह के जन्मदिन के जश्न के दौरान रची गई थी। 
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दोस्त की बहन से उज्जवल की बातचीत से खफा मनबढ़ों ने हमला करने की साजिश रची और अगले दिन उसे अंजाम दे दिया। छात्रनेता के घर पहुंचे मनबढ़ों ने छह मिनट हवाई फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी।
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सूत्रों के मुताबिक, बीते शुक्रवार को आर्थक सिंह का जन्मदिन था। इस दौरान आर्थक, अनीश शुक्ला और विपिन कुमार ने जमकर शराब पार्टी की। इसी दौरान अनीश ने उज्ज्वल से अपनी दुश्मनी का जिक्र किया। बताया जाता है कि अनीश के रिश्ते की बहन से उज्ज्वल की बातचीत होती थी, जिसे लेकर वह खुन्नस रखे हुए था।
 

नशे में ही सभी ने उज्ज्वल पर हमला करने का फैसला कर लिया। शनिवार रात भी आर्थक ने दोस्तों के साथ पार्टी की। इसके बाद सभी आरोपी आर्थक की लग्जरी कार से कोतवाली थाना क्षेत्र के अलीनगर उत्तरी स्थित उज्जवल के घर पहुंच गए।

 

रात करीब 11 बजे आरोपी घर पर चढ़ गए और चिल्लाते हुए उज्जवल को बाहर बुलाने लगे। परिजनों का आरोप है कि मनबढ़ कह रहे थे कि उज्जवल को बुलाओ, उसे आज जान से मार देंगे। इधर, खतरा भांपकर उज्ज्वल पीछे के दरवाजे से निकल गया और पुलिस को सूचना दी।
 

उज्जवल की मां संध्या यादव ने बताया कि आरोपियों ने घर में घुसने की कोशिश भी की। विरोध करने पर अभद्रता की, मुंह दबाकर थप्पड़ मारे और कई राउंड फायरिंग की। इस पर वह जान बचाने के लिए एक कमरे में छिप गईं। शोर सुनकर आसपास के लोग जुटे तो आरोपी फायरिंग करते हुए चले गए। हालांकि पुलिस ने देर रात तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
 

दो को हिरासत में लेकर पुलिस कर रही पूछताछ
संध्या यादव की तहरीर पर आर्थक सिंह, महेश चौधरी, अनीश शुक्ला, सैफ अली, सक्षम शुक्ला और दो-तीन अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मुख्य आरोपी आर्थक प्रताप सिंह, अनीश शुक्ला और विपिन कुमार उर्फ आलोक कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। उन्हें कोर्ट ने जेल भेज दिया है। दो अन्य आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। 

 

उधर, घटना के बाद से उज्जवल यादव का परिवार दहशत में है। संध्या यादव का आरोप है कि आर्थक सिंह अपराधी प्रवृत्ति का है और पहले भी गंभीर वारदातों में शामिल रहा है। परिवार को आशंका है कि आरोपी दोबारा किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं।
 

आर्थक और उसके साथियों की खुल सकती है हिस्ट्रीशीट
आर्थक सिंह का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। कुशीनगर में डांसरों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। उस समय तत्कालीन एसएसपी ने आरोपियों की हिस्ट्रीशीट खोलने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 

 

अब इस ताजा घटना के बाद पुलिस आर्थक और उसके साथियों की हिस्ट्रीशीट खोलने की तैयारी में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों पर पहले से कई गंभीर प्राथमिकी दर्ज हैं। ऐसे में उनके आपराधिक रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

 

इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की गई है। दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ के आधार पर अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है। इलाके में एहतियात के तौर पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

जिगरी दोस्त से दुश्मन बन गए आर्थक और उज्ज्वल
फायरिंग के मुख्य आरोपी आर्थक सिंह और पीड़ित छात्रनेता उज्ज्वल यादव पहले जिगरी दोस्त थे। पुलिस की जांच से पता चला है कि दोनों का साथ उठना-बैठना, कार्यक्रमों में शामिल होना और सोशल मीडिया पर सक्रियता चर्चा में रहती थी। 

 

बताया जा रहा है कि करीब तीन साल पहले आर्थक सिंह के घर आयोजित एक दावत के दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। यहीं से रिश्तों में दरार पड़ी और दोनों जिगरी दोस्त से दुश्मन बन गए।

 

दोनों के करीबी लोगों का कहना है कि कभी दोनों के परिवारों के बीच भी सामान्य संबंध थे। कार्यक्रमों में एक-दूसरे के यहां आना-जाना था। दावत में हुए विवाद के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ और सोशल मीडिया पर भी टिप्पणियां की जाने लगीं। बाद में दोनों अलग-अलग गुटों में सक्रिय हो गए। प्रतिस्पर्धा की भावना ने दुश्मनी का रूप ले लिया। 
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