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Rampur Bushahar News: रोहड़ू में बनाया आदर्श अस्पताल, व्यवस्था बेहाल
शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2024 11:34 PM IST
संवाद न्यूज एजेंसी रोहड़ू। सिविल अस्पताल रोहड़ू को सरकार ने आदर्श स्वास्थ्य संस्थान का दर्जा दिया है, लेकिन एक साल से यहां ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। वहीं, अस्पताल में लंबे समय से पचास प्रतिशत डॉक्टरों की कमी चल रही है। इस कारण आपातकाल में मरीजों को एक सौ दस किलोमीटर दूर आईजीएमसी शिमला के लिए रेफर करना पड़ता है। रोहड़ू अस्पताल को जुब्बल विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पतालों में गिना जाता है। सीमावर्ती उत्तराखंड से लेकर दूरदराज क्षेत्र के लोग उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। हर दिन अस्पताल में छह से आठ सौ के बीच ओपीडी रहती है। डेढ़ से दो सौ मरीजों को इंडोर में भर्ती करने की सुविधा है, लेकिन अस्पताल में एक साल से सर्जन का पद खाली चल रहा है। एनेस्थीसिया के चिकित्सक का पद भी लंबे समय से खाली है। इस कारण लोगों को छोटे से ऑपेरशन के लिए शिमला जाना पड़ रहा है। 31 पद मंजूर, 16 डाॅक्टर ही सेवाएं दे रहे यहां डाॅक्टरों के 31 पद मंजूर हैं। वर्तमान में अस्पताल के केवल 16 डाॅक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कोई अवकाश पर जाए, तो उसके स्थान पर दूसरा डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहता। करीब एक साल से महिला रोग विशेषज्ञ का एक, हड्डी रोग विशेषज्ञ का एक, बाल रोग विशेषज्ञ का एक, रेडियोलॉजिस्ट का एक पद खाली चल रहा है। स्टाफ नर्सों के पांच पद और फार्मासिस्ट के चार पद भी खाली हैं। ओपीडी में पूरा दिन लगी रहती लाइनें, बाद में निजी अस्पताल जा रहे लोग
रोहड़ू अस्पताल की ओपीडी में पूरा दिन लाइनें लगी रहती हैं। चिकित्सकों के 15 पद खाली होने के कारण डॉक्टर रात्रि सेवा के कारण दिन के समय आराम पर रहते हैं। कुछ कोर्ट के मामले में और अवकाश पर रहने के कारण बाहर रहते हैं। इस कारण कई बाद दूरदराज क्षेत्र से लोग पूरा दिन लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं और आखिर में कई बार इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है। आपातकाल ऑपेरशन के लिए शिमला ही विकल्प आपातकाल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने पर ऑपरेशन की जरूरत रहे, तो यहां जनरल सर्जन व एनेस्थीसिया का डॉक्टर न होने से ऑपरेशन नहीं हो पाते। गर्भवती महिलाओं को भी यदि ऑपरेशन की जरूरत पड़े, तो निजी अस्पताल जाना पड़ता है और पंद्रह से तीस हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उनके पास शिमला के अलावा दूरा कोई विकल्प नहीं है। न्यायालय के संज्ञान पर हुई नर्सों की नियुक्ति अस्पताल में दो साल पहले न्यायालय के संज्ञान के बाद नर्सों की नियुक्ति की गई। अस्पताल में अभी भी केवल 31 में से 12 नर्सें ही स्थायी तौर नियुक्त हैं। पांच नर्साें को आउटसोर्स पर रखा गया है। नौ नर्सें एक साल के लिए कांट्रैक्ट पर हैं। मार्च से इनकी सेवाएं भी समाप्त हो जाएंगी। सरकार ने पिछले साल इनकी नियुक्ति न्यायालय के आदेश पर की है।
जनरल सर्जन व एनेस्थीसिया का डॉक्टर न होने के कारण एक साल से ऑपरेशन नहीं हो रहे। 31 में से अस्पताल में केवल पंद्रह डाॅक्टर सेवाए दे रहे हैं। कुछ चिकित्सक रात्रि सेवा , न्यायालय से सबंधित मामले और अवकाश के कारण बाहर रहते है। मामला सरकार के ध्यान में है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों को बेहतर सेवाएं देने के प्रयास रहते हैं। -डाॅ. रविंद्र शर्मा, एमएस , सिविल अस्पताल रोहडू
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