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Lucknow News: अंसल मामले में एनसीएलएटी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
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अंसल मामले में एनसीएलएटी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर कोर्ट गई है फाइनेंस कंपनी
अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। एक साल पहले अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित किए जाने का राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का आदेश सही था या नहीं, इसको लेकर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने से शहीद पथ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी हाईटेक कालोनी के करीब पांच हजार आवंटी परेशान हैं।
एक साल पहले एनसीएलटी ने अंसल को दिवालिया घोषित कर दिया था क्योंकि उसने फाइनेंस कपंनी आईएलएंडएफएस के बकाया 83 करोड़ रुयये का भुगतान नहीं किया था। कंपनी को दिवालिया घोषित किए जाने से उन पांच हजारों लोगों को मुसीबत बढ़ गई थी जिन्होंने जमीन, मकान और फ्लैट के लिए अंसल कंपनी को पैसा दिया था। जिसके कारण आवंटियों ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में वाद दायर किया और यह आरोप लगाया कि कंपनी को दिवालिया घोषित करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। आवंटियों और निवेशकों के साथ ही एलडीए ने भी यही आरोप लगाकर यह कहा कि उसकी बंधक जमीन भी अंसल ने अवैध रूप से बेची है। जिसके बाद इस साल सात जनवरी को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश उस आदेश को खारिज तो नहीं किया जिसमें अंसल को दिवालिया घोषित किया गया था लेकिन एनसीएलटी को आवंटियों, एलडीए सहित अन्य का पक्ष सुनने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ आईएलएंडएफएस फाइनेंस कंपनी सुप्रीम कोर्ट गई थी जिस पर अब नौ अप्रैल को सुनवाई है। फाइनेंस कंपनी की मांग है कि अपीलीय कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए।
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कोर्ट के निर्णय से तय होगा आवंटियों का भविष्य
आवंटी और निवेशक गगन टंडन का कहना है कि एनसीएलटी ने दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही गलत की। उसे आवंटियों का भी पक्ष सुनना चाहिए था। जिस 83 करोड़ के लिए कंपनी को दिवालिया घोषित किया गया वह रकम बहुत छोटी है। उससे अधिक की जमीन को कंपनी ने दिवालिया घोषित होने के बाद बेच दी। जिसकी जांच होनी चाहिए। दिवालिया की कार्रवाई से पांच हजार आवंटी परेशान है। अंसल को एलडीए ने सुशांत गोल्फ सिटी कालोनी विकसित करने का लाइेंसस दिया था ऐसे में कंपनी दिवालिया हो गई है तो एलडीए को कालोनी विकसित करने के लिए हैंडओवर की जानी चाहिए। अपीलीय कोर्ट ने आवंटियों का भी पक्ष सुना जिसके बाद वापस एनसीएलटी भेजा। उसी समय आवंटियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी जिस कारण फाइनेंस कंपनी जब कोर्ट गई तो उसे निवेशकों को भी पार्टी बनाना पड़ा। अब सुप्रीम कोर्ट में नौ अप्रैल को सुनवाई है। जिस पर ही आवंटियों का भविष्य तय होगा।
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आदेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर कोर्ट गई है फाइनेंस कंपनी
अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। एक साल पहले अंसल कंपनी को दिवालिया घोषित किए जाने का राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का आदेश सही था या नहीं, इसको लेकर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। अंसल को दिवालिया घोषित किए जाने से शहीद पथ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी हाईटेक कालोनी के करीब पांच हजार आवंटी परेशान हैं।
एक साल पहले एनसीएलटी ने अंसल को दिवालिया घोषित कर दिया था क्योंकि उसने फाइनेंस कपंनी आईएलएंडएफएस के बकाया 83 करोड़ रुयये का भुगतान नहीं किया था। कंपनी को दिवालिया घोषित किए जाने से उन पांच हजारों लोगों को मुसीबत बढ़ गई थी जिन्होंने जमीन, मकान और फ्लैट के लिए अंसल कंपनी को पैसा दिया था। जिसके कारण आवंटियों ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में वाद दायर किया और यह आरोप लगाया कि कंपनी को दिवालिया घोषित करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। आवंटियों और निवेशकों के साथ ही एलडीए ने भी यही आरोप लगाकर यह कहा कि उसकी बंधक जमीन भी अंसल ने अवैध रूप से बेची है। जिसके बाद इस साल सात जनवरी को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश उस आदेश को खारिज तो नहीं किया जिसमें अंसल को दिवालिया घोषित किया गया था लेकिन एनसीएलटी को आवंटियों, एलडीए सहित अन्य का पक्ष सुनने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ आईएलएंडएफएस फाइनेंस कंपनी सुप्रीम कोर्ट गई थी जिस पर अब नौ अप्रैल को सुनवाई है। फाइनेंस कंपनी की मांग है कि अपीलीय कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए।
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कोर्ट के निर्णय से तय होगा आवंटियों का भविष्य
आवंटी और निवेशक गगन टंडन का कहना है कि एनसीएलटी ने दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही गलत की। उसे आवंटियों का भी पक्ष सुनना चाहिए था। जिस 83 करोड़ के लिए कंपनी को दिवालिया घोषित किया गया वह रकम बहुत छोटी है। उससे अधिक की जमीन को कंपनी ने दिवालिया घोषित होने के बाद बेच दी। जिसकी जांच होनी चाहिए। दिवालिया की कार्रवाई से पांच हजार आवंटी परेशान है। अंसल को एलडीए ने सुशांत गोल्फ सिटी कालोनी विकसित करने का लाइेंसस दिया था ऐसे में कंपनी दिवालिया हो गई है तो एलडीए को कालोनी विकसित करने के लिए हैंडओवर की जानी चाहिए। अपीलीय कोर्ट ने आवंटियों का भी पक्ष सुना जिसके बाद वापस एनसीएलटी भेजा। उसी समय आवंटियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी जिस कारण फाइनेंस कंपनी जब कोर्ट गई तो उसे निवेशकों को भी पार्टी बनाना पड़ा। अब सुप्रीम कोर्ट में नौ अप्रैल को सुनवाई है। जिस पर ही आवंटियों का भविष्य तय होगा।
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