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Lucknow News: रोडवेज के रंग में बस को कलर करवाकर कर रहे थे डग्गामारी, बस सीज
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रोडवेज के रंग में बस को कलर करवाकर कर रहे थे डग्गामारी, बस सीज
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परिवहन विभाग मामला
1.36 लाख रुपये का टीम ने लगाया जुर्माना
लखनऊ। परिवहन विभाग की टीम के हाथ बुधवार को एक ऐसी डग्गामार बस लगी, जो हूबहू रोडवेज की लग रही थी। बस को रोडवेज बसों के रंग में रंगवाकर यात्रियों में सेंधमारी की जा रही थी। टीम ने टेढ़ी पुलिया से बस को पकड़ा। 1.36 लाख रुपये जुर्माना लगाया और बस सीज कर दी।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों की शिकायत पर बुधवार को आलमबाग टेढ़ी पुलिया पर संयुक्त चेकिंग अभियान चला रहे थे। टेढ़ी पुलिया पर जांच के दाैरान दोपहर करीब बारह बजे बस संख्या यूपी 31एटी 4703 मिली। यह बस रोडवेज बस के रंग में रंगी थी। लेकिन जब दस्तावेजों को खंगाली गया तो बस प्राइवेट पाई गई। जो कमरूल हसन के नाम से प्रयागराज में पंजीकृत है। माैके पर बस ड्राइवर मनोज मिला। प्रवर्तन टीम ने बस को सीज कर दिया और उसे वृंदावन स्थित पी-4 पार्किंग में पहुंचाया। बस संचालक पर 136250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई के दाैरान रोडवेज के आलमबाग व हैदरगढ़ उपनगरीय डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक भी उपस्थित रहे।
आलमबाग में नहीं खड़ी करने की दी बस, टरकाया
खास बात यह है कि बस को सीज करने के बाद अधिकारी उसे आलमबाग बस टर्मिनल ले गए, जहां रोडवेज अधिकारियों ने बस खड़ी नहीं करने दी। प्रवर्तन टीम को टरका दिया। जगह नहीं होने की बात कहकर बस कहीं और ले जाने को कहा। इस पर बस को वृंदावन काॅलोनी स्थित पी-4 पार्किंग में ले जाकर खड़ा करना पड़ा।
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दस्तावेज में बस के रंग से छेड़छाड़
आरटीओ प्रवर्तन की टीम ने जब बस के दस्तावेजों को खंगाला तो उसमें बस की फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वगैरह सही पाए गए। लेकिन जब बस का रंग जांचा गया तो उसकी जगह पर कलरकोट अंडरस्कोर लिखा हुआ था। जोकि पूरी तरह से फर्जी था। बस के दस्तावेजों से भी छेड़छाड़ की गई।
...जब सीएनजी बस को रंगकर बना दिया था ई-बस
ऐसा नहीं है कि सिर्फ डग्गामार बस संचालक ही रोडवेज बस के कलर में अपनी बसें रंगवाकर चलवा रहे हैं। करीब तीन साल पहले चाैक से नैमिषारण्य के लिए मुख्यमंत्री ने दो ई सिटी बसों का संचालन शुरू किया था। लेकिन चार्जिंग स्टेशन नहीं होने के कारण एक बस बंद हो गई। सिटी ट्रांसपोर्ट अधिकारियों ने कारस्तानी दिखाते हुए सीएनजी बस को ई-बस के रंग में रंगवा दिया और रूट पर बस उतार दी। पोल खुलने पर अफसरों की घिग्गी बंध गई। सीएम कार्यालय से फटकार लगी, सो अलग।
1.36 लाख रुपये का टीम ने लगाया जुर्माना
लखनऊ। परिवहन विभाग की टीम के हाथ बुधवार को एक ऐसी डग्गामार बस लगी, जो हूबहू रोडवेज की लग रही थी। बस को रोडवेज बसों के रंग में रंगवाकर यात्रियों में सेंधमारी की जा रही थी। टीम ने टेढ़ी पुलिया से बस को पकड़ा। 1.36 लाख रुपये जुर्माना लगाया और बस सीज कर दी।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों की शिकायत पर बुधवार को आलमबाग टेढ़ी पुलिया पर संयुक्त चेकिंग अभियान चला रहे थे। टेढ़ी पुलिया पर जांच के दाैरान दोपहर करीब बारह बजे बस संख्या यूपी 31एटी 4703 मिली। यह बस रोडवेज बस के रंग में रंगी थी। लेकिन जब दस्तावेजों को खंगाली गया तो बस प्राइवेट पाई गई। जो कमरूल हसन के नाम से प्रयागराज में पंजीकृत है। माैके पर बस ड्राइवर मनोज मिला। प्रवर्तन टीम ने बस को सीज कर दिया और उसे वृंदावन स्थित पी-4 पार्किंग में पहुंचाया। बस संचालक पर 136250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई के दाैरान रोडवेज के आलमबाग व हैदरगढ़ उपनगरीय डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक भी उपस्थित रहे।
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आलमबाग में नहीं खड़ी करने की दी बस, टरकाया
खास बात यह है कि बस को सीज करने के बाद अधिकारी उसे आलमबाग बस टर्मिनल ले गए, जहां रोडवेज अधिकारियों ने बस खड़ी नहीं करने दी। प्रवर्तन टीम को टरका दिया। जगह नहीं होने की बात कहकर बस कहीं और ले जाने को कहा। इस पर बस को वृंदावन काॅलोनी स्थित पी-4 पार्किंग में ले जाकर खड़ा करना पड़ा।
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आरटीओ प्रवर्तन की टीम ने जब बस के दस्तावेजों को खंगाला तो उसमें बस की फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वगैरह सही पाए गए। लेकिन जब बस का रंग जांचा गया तो उसकी जगह पर कलरकोट अंडरस्कोर लिखा हुआ था। जोकि पूरी तरह से फर्जी था। बस के दस्तावेजों से भी छेड़छाड़ की गई।
...जब सीएनजी बस को रंगकर बना दिया था ई-बस
ऐसा नहीं है कि सिर्फ डग्गामार बस संचालक ही रोडवेज बस के कलर में अपनी बसें रंगवाकर चलवा रहे हैं। करीब तीन साल पहले चाैक से नैमिषारण्य के लिए मुख्यमंत्री ने दो ई सिटी बसों का संचालन शुरू किया था। लेकिन चार्जिंग स्टेशन नहीं होने के कारण एक बस बंद हो गई। सिटी ट्रांसपोर्ट अधिकारियों ने कारस्तानी दिखाते हुए सीएनजी बस को ई-बस के रंग में रंगवा दिया और रूट पर बस उतार दी। पोल खुलने पर अफसरों की घिग्गी बंध गई। सीएम कार्यालय से फटकार लगी, सो अलग।

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