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सीतापुर: मेथोडिस्ट मिशन स्कूल की 100 करोड़ की जमीन का अनुदान सरकार ने किया निरस्त, बनेगा वेंडिंग जोन

अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 25 Jun 2026 07:48 AM IST
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सार

Sitapur school controversy: जिलाधिकारी न्यायालय ने नजूल भूमि के दुरुपयोग और शर्तों के उल्लंघन से जुड़े मामले में यह निर्णय सुनाया। इस मामले में अल्पसंख्यक संस्थान का तर्क नहीं सुना गया। 

Sitapur: Government cancels Methodist Mission School's land grant worth Rs 100 crore, to be converted into a v
सीतापुर के स्कूल का मामला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

सिविल लाइंस स्थित मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल की 3.562 हेक्टेयर नजूल भूमि का अनुदान बुधवार को जिलाधिकारी न्यायालय ने निरस्त कर दिया। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर विद्यालय के मुख्य द्वार पर 34 पन्नों का नोटिस चस्पा किया। लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की इस भूमि पर नगर पालिका परिषद की ओर से वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी की जा रही है।



जिलाधिकारी न्यायालय ने नजूल भूमि के दुरुपयोग और शर्तों के उल्लंघन से जुड़े मामले में यह निर्णय सुनाया। आदेश में कहा गया है कि सिविल लाइंस स्थित मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल के कब्जे वाली 3.562 हेक्टेयर नजूल भूमि का अनुदान तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है और भूमि राज्य सरकार में निहित की जाती है। आदेश के बाद तहसील प्रशासन ने विद्यालय परिसर में नोटिस चस्पा कर विधिक कार्रवाई की जानकारी दी।
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1862 की सेल डीड को नहीं मिली मान्यता
विद्यालय प्रबंधन ने भूमि पर स्वामित्व साबित करने के लिए वर्ष 1862 की कथित क्रय-विलेख (सेल डीड) प्रस्तुत की थी। प्रबंधन का दावा था कि यह भूमि उनकी फ्री-होल्ड संपत्ति है। हालांकि न्यायालय ने इस दावे को अस्वीकार कर दिया। आदेश में उल्लेख किया गया कि प्रबंधन स्वयं वर्ष 1906 की लीज डीड और नजूल रजिस्टर में दर्ज अभिलेखों के आधार पर वर्षों से लगान जमा करता रहा है। ऐसे में निजी स्वामित्व का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नजूल भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिस पर अंतिम अधिकार सरकार का होता है।
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अल्पसंख्यक संस्थान का तर्क खारिज
मिशनरी प्रबंधन ने संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला देते हुए कार्रवाई का विरोध किया था। प्रबंधन का कहना था कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान होने के कारण उनकी संपत्ति पर ऐसी कार्रवाई नहीं हो सकती। जिलाधिकारी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 30 केवल शैक्षणिक संस्थान के संचालन की स्वतंत्रता देता है, सरकारी भूमि पर अनिश्चित कब्जे का अधिकार नहीं देता। आदेश में कहा गया कि सरकार शर्तों के उल्लंघन के आधार पर अपनी भूमि वापस ले रही है, इसे अधिग्रहण नहीं माना जा सकता।

विद्यालय भवन और चर्च को राहत, 468 छात्र अध्ययनरत
प्रशासन ने विद्यार्थियों के हित को देखते हुए राहत दी है। कुल भूमि में से 0.391 हेक्टेयर क्षेत्र, जिसमें विद्यालय भवन, कक्षाएं, असेंबली हॉल, शौचालय, रसोईघर और खेल मैदान शामिल हैं, को फिलहाल कार्रवाई से बाहर रखा गया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अध्ययनरत 468 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विद्यालय को पहले की तरह संचालित करने की अनुमति दी गई है। परिसर में स्थित चर्च को भी धार्मिक महत्व को देखते हुए तत्काल कार्रवाई से बाहर रखा गया है।

खाली भूमि पर बनेगा वेंडिंग जोन
राजस्व विभाग की जांच में पाया गया कि करीब 2.564 हेक्टेयर भूमि लंबे समय से खाली पड़ी थी और झाड़ियों से ढकी हुई थी। कुछ भवन भी जर्जर अवस्था में मिले। प्रशासन अब लगभग 2.998 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा लेकर उसे नगर पालिका परिषद को सौंपेगा। इस भूमि पर रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के लिए आधुनिक वेंडिंग जोन बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उप निबंधक को निर्देश दिए गए हैं कि भूमि से जुड़े किसी भी प्रकार के बैनामे या हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।

सरकारी भूमि पर कब्जा बर्दाश्त नहीं
जिलाधिकारी ने कहा कि यह निर्णय नजूल भूमि के संरक्षण और सरकारी संपत्तियों के सही उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अनियमित कब्जा या शर्तों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे संस्था कितनी भी पुरानी या प्रभावशाली क्यों न हो। यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।— डॉ. राजा गणपति आर, जिलाधिकारी, सीतापुर






 

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