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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: 'Return the money by August 20' — Regulatory Commission warns Power Corporation; reprimands Power Corporat

UP: '20 अगस्त तक पैसे लौटाओ', नियामक आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को चेतावनी दी; पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को फटकारा

Tue, 11 Aug 2026 07:45 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 11 Aug 2026 07:45 PM IST
सार

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर अतिरिक्त वसूली को लेकर विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने 20 अगस्त तक उपभोक्ताओं की बकाया राशि लौटाने, हलफनामा देने और सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

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UP: 'Return the money by August 20' — Regulatory Commission warns Power Corporation; reprimands Power Corporat
बिजली बिल बढ़ेगा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर की गई अतिरिक्त वसूली के मामले को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन और विद्युत वितरण निगमों के प्रबंधन को फटकार लगाई है। 20 अगस्त तक उपभोक्ताओं को रुपये लौटाने, हलफनामा देने और इसी दिन सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

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प्रदेश के उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए सिंगल फेस पर 6,016 रुपये तथा थ्री फेस पर 11,341 रुपये की दर से वसूली की गई थी। मामला नियामक आयोग पहुंचा। आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय कर दी। सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 2800 रुपये और थ्री फेस की कीमत 4100 रुपये लेने का निर्देश दिया। तय कीमत से अधिक वसूली गई रकम उपभोक्ताओं को लौटाने का निर्देश दिया। 11 अगस्त तक सभी बिजली कंपनियों के निदेशक (वाणिज्य) को खुद उपस्थिति होने का निर्देश दिया था। ऐसे में मंगलवार को पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा व मध्यांचल के अधिकारी आयोग पहुंचे। 
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बताया कि जुलाई और अगस्त माह में कुल 93,138 विद्युत उपभोक्ताओं को धनराशि वापस की जानी थी, जिसमें 85,458 सिंगल फेस तथा 7,680 थ्री फेस उपभोक्ता शामिल हैं। इन्हें 33.22करोड़ के सापेक्ष 30.86 करोड़ के बिलों में वापस किया जाना है। करीब 2.36 करोड़ की धनराशि वापस करना बाकी है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह व गिरीश कुमार वैश्य ने कार्पोरेशन प्रबंधन को फटकार लगाई। 
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अन्य विद्युत वितरण कंपनियों को भी जल्द से जल्द पूरा बकाया लौटाने और 20 अगस्त को हलफनामा देने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा कि जिस धनराशि को अप्रैल के पहले बिलिंग साइकिल में ही वापस किया जाना था, उसकी वापसी जुलाई-अगस्त तक न हो पाना गंभीर बात है। चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

 

अन्य कंपनियों के निदेशकों के न आने से नाराजगी

आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंगलवार की सुनवाई में सभी विद्युत वितरण कंपनियों के निदेशक (वाणिज्य) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी तमाम अधिकारी नहीं आए। अनुपस्थित रहने वालों से जवाब तलब किया। आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार ने निर्देश दिया कि 20 अगस्त को प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होंगे। सभी प्रबंध निदेशकों को पूरे मामले की सभी उपभोक्ता की सूचना सहित शपथ पत्र देंगे।


 

पावर कार्पोरेशन के डाटा में अंतर

आयोग में मंगलवार को सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं का पक्ष रखते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियां केवल 93,138 उपभोक्ताओं की धनवापसी की बात कर रही हैं, जबकि 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 3,73,509 विद्युत उपभोक्ताओं को नए बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा यदि गलत या अधूरा आंकड़ा प्रस्तुत कर केवल सीमित संख्या में उपभोक्ताओं को धनवापसी की बात कही जा रही है। 

यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी जब कॉस्ट बुक के प्रावधानों का उल्लंघन कर उपभोक्ताओं से अधिक वसूली का मामला सामने आया था, तब सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों ने माफी मांगते हुए शपथ पत्र दाखिल किया था और अतिरिक्त वसूली स्वीकार करने के बाद उपभोक्ताओं को धनराशि वापस की गई थी।

उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर निर्धारित लागत से अधिक वसूली गई एक-एक रुपये की धनराशि प्रत्येक पात्र विद्युत उपभोक्ता को वापस कराई जाए, बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कराया जाए।

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