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UP: विदेश में नौकरी के लिए तैयार नहीं हो रहे युवा; पांच हजार पदों पर भर्ती के लिए केवल दो हजार आवेदन ही मिले

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 19 May 2026 03:04 PM IST
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सार

युद्ध से हालात बिगड़ने के बाद विदेश में नौकरी के लिए युवा तैयार नहीं हो रहे हैं। विभिन्न देशों में पांच हजार पदों पर भर्ती के लिए केवल दो हजार आवेदन ही मिले हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...

UP Youth Reluctant to Work Abroad Only 2,000 Applications Received for 5,000 Vacancies
विदेश में नौकरी का मौका। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

बेहतर वेतन और सुविधाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश के युवा विदेश में नौकरी करने से हिचक रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जर्मनी, जापान और इस्राइल में स्वास्थ्य कर्मियों के 5000 पदों पर भर्ती के लिए अब तक केवल 2000 आवेदन ही मिले हैं। युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच युवाओं की सुरक्षा चिंताओं ने विदेश में रोजगार की राह मुश्किल कर दी है। यही वजह है कि सेवायोजन विभाग को आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 मई तक दोबारा आवेदन मांगने पड़े हैं।
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सेवायोजन विभाग ने रोजगार संगम पोर्टल के माध्यम से विदेशों में स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। पूर्व संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षु) नीरज कुमार के अनुसार, युद्ध से बिगड़े हालात की वजह से युवा विदेश में नौकरी करने से दूरी बना रहे हैं।
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पुन: आवेदन लिए जा रहे हैं

सेवायोजन विभाग की निदेशक नेहा प्रकाश ने बताया कि विदेश में स्वास्थ्य कर्मियों के कुल 5000 पदों पर भर्ती की जानी है। इसके लिए हाईस्कूल के साथ जीडीए, एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और पोस्ट बीएससी नर्सिंग योग्यता वाले अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए हैं। केयरगिवर और पेसेंट केयर का कौशल भी जरूरी रखा गया है। 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। सीटों के सापेक्ष आवेदन प्राप्त न होने पर पुन: आवेदन लिए जा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों को 1.31 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इसके अलावा जीवन बीमा, मेडिकल बीमा और एक महीने तक निशुल्क आवास की सुविधा भी दी जाएगी। पहले चरण में दो वर्ष का अनुबंध होगा, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वालों का कार्यकाल आगे बढ़ाया जाएगा।

आवेदन न मिलने के ये हैं मुख्य कारण

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, विदेश में नौकरी को लेकर युवाओं की झिझक के पीछे कई कारण हैं। इस्राइल में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है। वहीं जर्मनी और जापान की कठिन भाषाएं भी बड़ी बाधा साबित हो रही हैं। स्किल होने के बावजूद कई युवा विदेश जाने के बजाय प्रदेश में ही रोजगार तलाशना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं। 

अधिकारियों का कहना है कि सख्त स्किल टेस्ट, लंबी चयन प्रक्रिया और वीजा संबंधी औपचारिकताएं भी आवेदन कम होने की वजह बनी हैं। साथ ही लखनऊ और आसपास के जिलों में स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों ने भी युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही कॅरिअर बनाने के लिए प्रेरित किया है।
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