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अस्पतालों का हाल: ट्रेनिंग के बाद भी नहीं चला रहे वेंटिलेटर, निजी सेंटर एक दिन के लिए वसूल रहे 50-60 हजार रुपये

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 25 Sep 2021 01:37 PM IST
सार

लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षण के बावजूद डॉक्टर, स्टॉफ वेंटिलेटर चलाने में सक्षम नहीं हैं। कर्मचारियों के ट्रेंड न होने से 100 से ज्यादा वेंटिलेटर सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े हैं।

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Ventilator units are not working in hospitals of Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में 100 से भी ज्यादा वेंटिलेटर खाली पड़े हैं, फिर भी गंभीर मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे कई लोग जान भी गंवा रहे हैं। इसका कारण वेंटिलेटरों का इस्तेमाल न होना है, जबकि दावा किया जाता है कि इन्हें चलाने के लिए पूरे स्टाफ व डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है।



खास बात यह है कि निजी कंपनी तो इन्हें वेंटिलेटर चलाने में ट्रेंड करने का दावा कर रही है, लेकिन डॉक्टर व स्टाफ वेंटिलेटर चलाने के लिए खुद को प्रशिक्षित नहीं मान रहे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रभारी अतिरिक्त स्टाफ की मांग करते हुए वेंटिलेटर यूनिट बंद किए हैं।

बलरामपुर अस्पताल में 57 वेंटिलेटर हैं लेकिन इनमें से एक का भी संचालन नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि इन्हें चलाने के लिए स्टाफ नहीं है। वहीं, वेंटिलेटर इंस्टॉल करने वाली निजी कंपनी पूरे स्टाफ, डॉक्टरों को इसका प्रशिक्षण देने का दावा कर रही है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक, स्टाफ का प्रशिक्षण हुआ था, लेकिन वह 24 घंटे वेंटिलेटर यूनिट चलाने के लिए कुशल नहीं है। ऐसे में मैनपावर की मांग की गई है।

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Ventilator units are not working in hospitals of Lucknow.
- फोटो : iStock

लोकबंधु अस्पताल के 40 वेंटिलेटर में से एक पर भी मरीज भर्ती नहीं है। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यूनिट चल रही है, पर मरीज नहीं आ रहे हैं। हालांकि, सच यह है कि अति गंभीर मरीजों को भर्ती न करके बड़े संस्थान का हवाला देकर टरका दिया जाता है।

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Ventilator units are not working in hospitals of Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

सिविल अस्पताल के दस वेंटिलेटर में से सात पर बच्चों की भर्ती हो रही है। हालांकि, यहां भी तीन वेंटिलेटर बंद पड़े हैं। यही हाल राम मिश्र सागर अस्पताल का है। यहां चार वेंटिलेटर चलाने के लिए टेक्नीशियन न होने से पूरी यूनिट बंद है। यहां आने वाले अति गंभीर मरीजों को दूसरे संस्थान जाना पड़ता है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों व बड़े संस्थानों में वेटिलेंटर न मिलने से मरीज निजी अस्पताल जाने को मजबूर हैं।

Ventilator units are not working in hospitals of Lucknow.
- फोटो : amar ujala

बाहर के हर तीसरे मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत
बाहर से राजधानी आने वाले अति गंभीर मरीजों में से हर तीन में से एक को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। हालांकि, बड़े संस्थानों में जल्द इसकी सुविधा नहीं मिल पाती है। केजीएमयू, लोहिया संस्थान, पीजीआई जैसे संस्थान में वेंटिलेटर हमेशा फुल ही रहते हैं। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए मजबूरन निजी सेंटर जाना पड़ता है। यहां एक दिन के शुल्क के नाम पर 50 से 60 हजार तक वसूले जाते हैं।

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Ventilator units are not working in hospitals of Lucknow.
- फोटो : iStock

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वेदव्रत सिंह का कहना है कि अस्पतालों में बेड पर वेंटिलेटर लगे हुए हैं। साथ ही कोविड के लिए वेंटिलेटर रिजर्व रखे गए हैं। नॉन कोविड मरीजों के लिए इनकी अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

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