कमलेश तिवारी हत्याकांड में आरोपियों की मदद के आरोप में दरगाह से जुड़े नातख्वाह कैफी और दिल्ली हाईकोर्ट के वकील नावेद की पिछले दिनों गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नावेद के दोस्त कामरान को लखनऊ पुलिस की एसआईटी बरेली से ले गई। कामरान पर मदद के दौरान नावेद के साथ रहने का आरोप है। लखनऊ में उससे पूछताछ की जा रही है। आगे खबर में पढ़िए पूरे हत्याकांड में क्या थी कामरान की भूमिका...
कमलेश तिवारी हत्याकांडः नावेद की कार से हत्यारों को नेपाल बॉर्डर ले गया था कामरान, अब हिरासत में
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नावेद की कार से हत्यारों को नेपाल बॉर्डर ले गया था कामरान
कमलेश तिवारी के हत्या आरोपियों का बरेली में अहम मददगार हाईकोर्ट का वकील नावेद ही था। नावेद के ही जरिये कैफी और कामरान आरोपियों के संपर्क में आए। कामरान की धरपकड़ के बाद अब उससे पूछताछ की जा रही है। कामरान ने नावेद की कार से साथ जाकर हत्यारों को नेपाल बॉर्डर तक पहुंचाने में मदद की थी। बुधवार को हिरासत में लिया गया कामरान नावेद की जिंजो ट्रेवल एजेंसी का कर्मचारी है।
करीब डेढ़ साल पहले बरेली आने पर वह दिल्ली हाईकोर्ट के वकील नावेद के संपर्क में आया और उसने नावेद का भरोसा जीत लिया। नावेद ने दिल्ली निवासी पार्टनर मोहसिन के साथ मिलकर मलूकपुर चौकी के पास ट्रेवल एजेंसी का दफ्तर खोला। इसमें आठ हजार रुपये महीने पर कामरान को नौकरी दे दी। दोस्ती ऐसी थी जो जिंजो ट्रैवल्स के बोर्ड पर कामरान का ही नाम था। लोग उसे पार्टनर ही समझते थे। कामरान नावेद की कार भी चलाता था।
सूत्रों के मुताबिक 18 अगस्त की रात कामरान किसी शादी में गया हुआ था। नावेद ने उसे मोबाइल पर कई संदेश भेजे। इनमें लिखा था कि जल्दी कार लेकर आ जाओ। बहुत जरूरी काम है। इसे हल्के में मत लेना। कामरान रात करीब ढाई बजे लौटा तो उसने मेसेज देखे। नावेद से बात की और पत्नी फरीन को बताया कि जरूरी काम से नावेद भाई ने बुलाया है। बाद में करीब साढ़े तीन बजे निकल गया। नावेद की सफेद रंग की होंडा सिटी कार लेकर वह नावेद के बताए मुताबिक चौपुला से पहले पहुंच गया। वहां नावेद ऑटो से दोनों आरोपियों को लेकर आया। इन्हें कार में बैठाकर ये लोग जंक्शन पहुंचे।
जंक्शन पर नावेद ने एक आरोपी का मोबाइल सरयू यमुना एक्सप्रेस में रख दिया। ट्रेन दिल्ली की ओर जा रही थी। एजेंसियां लखनऊ से मिले इनपुट के आधार पर मोबाइल की लोकेशन खोजती हुई जंक्शन पहुंचीं और सर्विलांस से हत्यारों के दिल्ली दिशा में जाने का प्रमाण मिलते ही उधर जाल बिछा दिया। दूसरी ओर नावेद की कार से कामरान व नावेद हत्यारों को बीसलपुर, खुटार होते हुए पलिया तक ले गए। वहां से उन्हें नेपाल में एंट्री कराकर लौट आए।