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चिन्मयानंद-छात्रा केस: एसआईटी को मोबाइल फोन नहीं ये सामान मिला, कैसे सामने आएंगे असली सबूत
Sun, 29 Sep 2019 09:19 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 29 Sep 2019 09:19 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में रिमांड पर जेल से बाहर आए सचिन उर्फ सोनू और विक्रम सिंह की निशानदेही पर एसआईटी राजस्थान के दौसा से फिरौती मांगने के मुख्य आरोपी संजय की शर्ट और मोबाइल का कवर व कुछ पार्ट्स बरामद कर पाई। जबकि तलाश मोबाइल की है, जिसमें अहम साक्ष्य छिपे हैं। इसे प्राप्त करने को एसआईटी के कुछ लोग अभी दौसा में डेरा डाले हुए हैं।
फिरौती का आरोपी संजय सिंह
- फोटो : अमर उजाला
चिन्मयानंद और छात्रा प्रकरण में दर्ज दो एफआईआर पर जांच कर रही एसआईटी को छात्रा के दोस्त तिलहर निवासी संजय से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लगे थे। इसके बाद ही एसआईटी की जांच चिन्मयानंद से पांच करोड़ की फिरौती मांगे जाने के मामले में तेज हुई। संजय के साथी सचिन और विक्रम के जरिये पता लगा कि संजय के मोबाइल और शर्ट को दोनों ने राजस्थान में मेहंदीपुर से दौसा भरतपुर मार्ग पर महेबा बाईपास पर सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिया था।
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- फोटो : अमर उजाला
संजय के मोबाइल की बरामदगी के लिए एसआईटी को 24 सितंबर को सचिन और विक्रम को 95 घंटे की रिमांड पर लेना पड़ा। एसआईटी दोनों को लेकर दौसा में उस स्थान तक गई, जहां मोबाइल फेंका गया था लेकिन यहां झाड़ियों में उसे मोबाइल नहीं मिला। इधर, रिमांड अवधि पूरी होते देख दोनों को शुक्रवार देर शाम जेल भेज दिया गया।
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- फोटो : सोशल मीडिया
स्वामी चिन्मयानंद से फिरौती मांगे जाने के मामले में आरोपी दुष्कर्म पीड़ित छात्रा ने जेल से वकील के माध्यम से सीजेएम की कोर्ट को भेजे गए पत्र में एसआईटी की जांच पर सवाल उठाए हैं। उसने कहा है कि एसआईटी ने उसके दुष्कर्म मामले की जांच पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है।
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पीड़ित छात्रा
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों का कहना कि छात्रा ने कोर्ट को भेजे गए पत्र में कहा है कि उसने दिल्ली में पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि स्वामी चिन्मयानंद ने उसके साथ दुष्कर्म किया। दिल्ली पुलिस ने उसकी दी गई तहरीर को एसआईटी को सौंपा। एसआईटी ने उसकी दुष्कर्म वाली तहरीर के आधार पर विवेचना का एक अंश भी नहीं जोड़ा और कहानी को इधर-उधर मोड़ते हुए उसे फंसाने का काम किया है।