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Gita Press: 99 सालों में 90 करोड़ पुस्तकें गीता प्रेस से हो चुकी हैं प्रकाशित, 15 भाषाओं में होता है प्रकाशन

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 04 Jun 2022 05:23 AM IST
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90 crore books published by Gita Press in 99 years
गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस की स्थापना के 99 वर्ष पिछले महीनें 14 मई को पूरे हो गए हैं। गीता प्रेस इस साल अपना शताब्दी वर्ष (100वां वर्ष) समारोह मना रहा है। गीता प्रेस की इसी शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ करने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद चार जून को गीता प्रेस पहुंच रहे हैं। इन 99 वर्षों में लगभग 16 करोड़ श्रीमद्भागवत गीता सहित 90 करोड़ पुस्तकों का प्रकाशन गीता प्रेस से हो चुका है। इन पुस्तकों में सर्वाधिक संख्या क श्रीमद्भागवत गीता की है। इसके अलावा गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली विश्व प्रसिद्ध मासिक पत्रिका कल्याण, रामचरित मानस, पुराण, हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, सुंदरकांड के प्रतियों की भी संख्या करोड़ों में है।


 

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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने बताया कि वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट के तहत वहीं से वह गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 29 अप्रैल 1923 को उर्दू बाजार में दस रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। गीता धीरे-धीरे गीताप्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली। आज प्रेस के पास दो लाख वर्ग फीट जमीन है। इसमें 1.45 लाख वर्ग फीट में प्रेस, कार्यालय व मशीनें हैं। 55 हजार वर्ग फीट में दुकानें व आवास हैं।

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मासिक पत्रिका कल्याण के संपादक एवं ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका - फोटो : अमर उजाला।

ऐसे हुई कल्याण की शुरुआत
गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि दिल्ली में अप्रैल 1926 में आयोजित मारवाड़ी अग्रवाल सभा के आठवें अधिवेशन में घनश्यामदास बिड़ला ने भाईजी को अपने विचारों व सिद्धांतों पर आधारित एक पत्रिका निकालने की सलाह दी। गीताप्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयंदका की सहमति से 22 अप्रैल 1926 को पत्रिका का नाम कल्याण निश्चित हुआ। इसी वर्ष भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के संपादकत्व में कल्याण का प्रथम साधारण अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ। दूसरे वर्ष कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ। तभी से कल्याण का प्रकाशन गीताप्रेस से हो रहा है। अबतक गीताप्रेस से कल्याण की लगभग 17 करोड़ प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। जो पूरे विश्व में प्रत्येक माह पहुंचाई जाती है।

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रामचरितमानस व गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।

घर-घर गीता पहुंचाने के लिए हुई गीता प्रेस की स्थापना
गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने बताया कि  कम दामों में शुद्ध और सरल भाषा में गीता को घर-घर पहुंचाने के लिए गीता प्रेस की स्थापना हुई थी। इसी उद्देश्य के साथ आज भी गीता प्रेस से गीता के साथ ही अन्य धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन कर लागत से कम मूल्य पर लोगों को धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध करा रहा है।

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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
सेठजी के बाद भाईजी ने संभाली बागडोर
गीताप्रेस से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका कल्याण के प्रथम संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने 17 अप्रैल 1965 को सेठजी के शरीर त्याग के बाद गीताप्रेस की बागडोर संभाल ली। उन्होंने अनेक ग्रंथों का संपादन करते हुए उनकी टीका भी लिखी है, ताकि पाठकों को आसानी से पुस्तकें समझ में आ जाए। 22 मार्च 1971 को वह भी गोलोकवासी हो गए। इस समय पूरी व्यवस्था ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल देख रहे हैं।

 
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