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विशेष खबर: अवैध हैं गोरखपुर शहर में लगे सभी होर्डिंग-बैनर और यूनीपोल, देखें तस्वीरें

राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 14 Sep 2021 10:58 AM IST
सार

बिना नगर निगम को टैक्स दिए होर्डिंग एजेंसियां कर रही करोड़ों के वारे-न्यारे, नगर निगम की ओर से टेंडर की हो रही है केवल खानापूर्ति।

 

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All hoarding-banners and Unipol in Gorakhpur city are illegal
गोरखपुर में लगे होर्डिंग-बैनर। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर शहर में लगे सभी होर्डिंग, बैनर, यूनीपोल (दिशा सूचक), वाल पेंटिंग, लॉलीपॉप (ग्लो पोल), गैंट्री सभी अवैध हैं। बिना नगर निगम को कोई टैक्स चुकाए विज्ञापन एजेंसियां करोड़ों के वारे-न्यारे कर रही हैं, जबकि सभी का टेंडर खत्म हो चुका है। वहीं, नगर निगम की ओर से निकाला गया टेंडर केवल खानापूर्ति साबित हो रहा है।  



जानकारी के अनुसार, करीब तीन साल पहले विज्ञापन से नगर निगम को  2.43 करोड़ रुपये की आय हुई थी। प्रावधान के हिसाब से हर साल विज्ञापन शुल्क में कुछ प्रतिशत की बढ़ोतरी होती रहती है। लेकिन, मामला कोर्ट में जाने के बाद यह अधर में लटक गया। इस दौरान नगर निगम की विज्ञापन से काफी कम आय हुई। 

इस फरवरी-मार्च में जमा हुआ था विज्ञापन टैक्स
इस वर्ष फरवरी-मार्च में विज्ञापन एजेंसियों द्वारा टैक्स जमा किया गया था। इसके बाद कोरोना आ गया। फिर नगर निगम की ओर से टेंडर निकाला गया, लेकिन मात्र चार लोगों ने टेंडर भरा। इनमें से सिर्फ एक पात्र पाया गया। इस वजह से री-टेंडर किया गया। इस दौरान सभी एजेंसियां धड़ल्ले से अपने-अपने क्लाइंट से विज्ञापन के पैसे वसूल रही हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
 

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All hoarding-banners and Unipol in Gorakhpur city are illegal
गोरखपुर में लगे होर्डिंग-बैनर। - फोटो : अमर उजाला।

शहर में करीब 150 होर्डिंग और 150 यूनीपोल
नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन की 14 एजेंसियां हैं। सभी एजेंसियां विभिन्न कंपनियों के होर्डिंग स्ट्रक्चर और यूनीपोल पर विज्ञापन लगाकर कमाई कर रहीं हैं। सामान्य तौर एक होर्डिंग से साइट के अनुसार 3000-4000 रुपये महीने का और यूनिपोल पर एक साइड पर 20 से 25 हजार रुपये विज्ञापन शुल्क लिया जाता है। इन दिनों किसी भी एजेंसी द्वारा नगर निगम को कोई शुल्क नहीं दिया जा रहा है, जबकि शहर में हर ओर होर्डिंग स्ट्रक्चर तथा यूनीपोल पर विज्ञापन लगे हैं। यदि न्यूनतम कमाई भी देखी जाए तो विज्ञापन एजेंसियां एक करोड़ रुपये तक कमा रही हैं, जबकि नगर निगम को कुछ नहीं मिल रहा है।

उप नगर आयुक्त एवं विज्ञापन प्रभारी संजय शुक्ला ने कहा कि अभी यूनीपोल के लिए टेंडर जारी किया गया है। जल्द ही टेंडर खोला जाएगा। इसके बाद होर्डिंग आदि के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। जहां तक शहर में लगे अवैध होर्डिंग की बात है तो उन्हें लगातार हटाया जा रहा है।

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गोरखपुर में लगे होर्डिंग-बैनर। - फोटो : अमर उजाला।

जिसका जहां मन वहां टांग दे रहा होर्डिंग और बैनर
चौराहों से गुजरते वक्त होर्डिंग से ध्यान न भटके और चारों ओर बेहतर ढंग से दिखाई दे, इसके लिए इसे 15 मीटर दूर लगाने का प्रावधान है। लेकिन, शहर के अधिकतर चौराहों पर ही होर्डिंग लगे हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में लगे अवैध होर्डिंग न सिर्फ शहर की सूरत बिगाड़ रहे हैं, बल्कि निगम को लाखों रुपये की हानि भी पहुंचा रहे हैं। स्थिति यह है कि जिसको जहां मन कर रहा है वहीं होर्डिंग, बैनर और पोस्टर टांग दे रहा है।

शहर के तकरीबन सभी इलाकों में बिजली के खंभों तक पर होर्डिंग-बैनर टंगे हैं, जबकि यह गैर कानूनी है। नगर निगम की ओर से अवैैध होर्डिंग हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति ही होती है। एक तरफ नगर निगम होर्डिंग हटाता है, तो अगले दिन फिर होर्डिंग लगा दी जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष तक शहर के विभिन्न इलाकों में होर्डिंग के लिए नगर निगम ने 14 एजेंसियों को ठेका दिया था। मार्च में सबका टेंडर खत्म हो चुका है। इसके बाद विज्ञापन की एजेंसियों की मनमर्जी चल रही है। जहां मन कर रहा है वहां होर्डिंग लगा रही हैं और नगर निगम को धेला भी नहीं दे रही हैं।

 

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गोरखपुर में लगे होर्डिंग-बैनर। - फोटो : अमर उजाला।

 ये हैं अवैध विज्ञापन

  • सड़क को क्रॉस करते विज्ञापन
  • डिवाइडर पर लगे विज्ञापन
  • नेशनल हाईवे पर लगे बिजली के खंभों पर


यहां नहीं लगा सकते विज्ञापन
इन स्थानों पर विज्ञापन को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। गोरखनाथ मंदिर के आसपास, विश्वविद्यालय रोड, आरटीओ तिराहा से विश्वविद्यालय गेट तक और सर्किट हाउस रोड।

 

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गोरखपुर में लगे होर्डिंग-बैनर। - फोटो : अमर उजाला।
होर्डिंग एवं यूनिपोल के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र
  • शहर के समस्त मुख्य चौराहों और इन चौराहों के चारों ओर 20 मीटर तक होर्डिंग या यूनिपोल लगाना प्रतिबंधित है।
  • जिलाधिकारी आवास, आयुक्त आवास और कार्यालय आयुक्त एवं कार्यालय नगर निगम परिसर में भी नहीं लगा सकते।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के स्वामित्व वाले मार्ग पर होर्डिंग आदि लगाने पर प्रतिबंध है।

नगर आयुक्त को प्रतिबंधित क्षेत्र तैयार करने का विशेष अधिकार
नगर आयुक्त वीवीआईपी मूवमेंट, यातायात एवं सुरक्षा की दृष्टि से भविष्य में ओवरब्रिज के लिए निर्धारित रूट पर पिलर के निर्माण को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रचार के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने के लिए अधिकृत होंगे।

अवैध होर्डिंग पर 5000 रुपये तक हो सकता है जुर्माना
नई नियमावली में अवैध होर्डिंग लगाने पर पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। उल्लंघन की दशा में प्रथम उल्लंघन पर प्रत्येक दिन के हिसाब से 500 रुपये की वसूली होगी। साथ ही अवैध विज्ञापन पट्टों को साफ करने के लिए दो हजार रुपये और निजी भवन (छत पर) पर से विज्ञापन हटाने के लिए 10 हजार रुपये तक देना होगा।
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