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तस्वीरें: संघ के प्रभाव में आकर सन्यासी बने थे योगी, इस भेष में देखकर फूट-फूटकर रोए थे माता-पिता

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 11 Mar 2022 11:01 AM IST
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CM Yogi became sanyasi after coming under influence of Sangh
सीएम योगी और उनके पिता। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

संघ के प्रभाव में आकर योगी आदित्यनाथ संन्यासी बने थे। तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से मिलने गोरक्षनाथ मंदिर आए, तो यहीं के होकर रह गए। गुरु की राजनीतिक विरासत संभाली, तो हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाया। देखते ही देखते हिंदुत्व के रोल मॉडल बन गए।



योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड में हुआ। वह विद्यार्थी जीवन में संघ की विचारधारा से प्रभावित होकर विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। दिल्ली में परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल होने गए। मुख्य अतिथि अवेद्यनाथ महराज थे। योगी ने कार्यक्रम में अपनी बात रखी तो अवेद्यनाथ प्रभावित हुए।

 

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CM Yogi became sanyasi after coming under influence of Sangh
योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

कार्यक्रम के बाद उन्होंने योगी (तब अजय सिंह बिष्ट) को अपने पास बुलाया और परिचय पूछा। योगी ने खुद को उत्तराखंड का निवासी बताया। अवेद्यनाथ भी उत्तराखंड के रहने वाले थे। महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें गोरखपुर बुलाया। अवेद्यनाथ महराज एक बार बीमार पड़े तो योगी उनसे मिलने पहुंच गए। योगी ने उनकी सेवा की। महंत अवेद्यनाथ ने योगी से कहा कि सांसारिक जीवन में कुछ नहीं है। योगी को उनकी बात अच्छी लगी। वह अपने गांव गए और एक दिन घर से यह कहकर निकले कि कहीं जा रहे हैं। यहां आए तो उन्होंने अवेद्यनाथ से कहा कि वह अब वैराग्य लेना चाह रहे हैं। अवेद्यनाथ ने कहा कि सोच लो, फिर बताओ। योगी ने कहा कि उनका निर्णय अंतिम है। आदित्यनाथ मठ में रहने लगे। उन्हें योगी के रूप में दीक्षा दी गई।

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CM Yogi became sanyasi after coming under influence of Sangh
सीएम योगी का परिवार। - फोटो : अमर उजाला।

आदित्यनाथ को भगवा में देखकर रो पड़ीं मां
आदित्यनाथ जब अपना घर छोड़कर गोरखपुर आए और वापस नहीं गए तो परिवार परेशान हो गया। इसी बीच योगी की दीक्षा की खबर अखबारों में प्रकाशित हुई। दिल्ली के एक अखबार में भी छोटी सी खबर छपी कि अजय सिंह बिष्ट गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बन गए हैं। इसकी सूचना उनके किसी रिश्तेदार ने योगी के माता-पिता को दी। यह सुनकर उनके माता-पिता गोरखपुर आए। वे लोग मंदिर में ढूंढ रहे थे। योगी उस समय मंदिर में हो रहे किसी कार्य को देख रहे थे।

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योगी आदित्यनाथ। (file) - फोटो : अमर उजाला।

अचानक उनके माता-पिता की नजर बेटे पर पड़ी। माता-पिता ने उन्हें योगी के रूप में देखा तो फूट-फूट कर रोने लगे। उनसे उसी वक्त घर चलने के लिए कहने लगे। जानकारी पर अवेद्यनाथ ने उन लोगों को बुलवाया और कहा कि यदि यह जाना चाहें, तो ले जा सकते हैं। वैसे आप जब चाहें, तब आ सकते हैं। संन्यास की एक परंपरा है। जब तक संन्यासी अपने परिवार से भिक्षा नहीं ले लेता है, तब तक उसकी तपस्या अधूरी मानी जाती है। योगी कुछ दिनों बाद दिग्विजयनाथ महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य के साथ अपने गांव गए और माता-पिता से भिक्षा लेकर वापस आए।

 

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CM Yogi became sanyasi after coming under influence of Sangh
सीएम योगी की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

परिवार को त्यागा, आज 25 करोड़ का परिवार

परिवार को त्यागकर योगी ने उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता को अपना परिवार बना रखा है। पांच जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे योगी आदित्यनाथ के लिए धर्म और राजनीति दोनों ही, लोक कल्याण का जरिया है। उनके गुरु ने उनमें निहित नेतृत्व क्षमता को 1993 में ही पहचान लिया था। हालांकि, जब 1994 में वसंत पंचमी के दिन उन्हें गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि युवा संत एक दिन प्रदेश को नई दिशा दिखाएगा। 1998 के लोकसभा चुनाव में गुरु ने अपनी जगह योगी को राजनीति की कमान सौंप दी। योगी 26 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के लोकसभा सदस्य बने। इसके बाद गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से लगातार पांच बार चुने जाने का रिकॉर्ड बना।
 

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