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यूपी: डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला ने अपने इस साथी के दम पर बढ़ाई थी हनक, ऐसे करवा दी थी उसकी हत्या

Fri, 11 Jun 2021 06:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 11 Jun 2021 06:30 PM IST
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Gorakhpur famous gangster shri prakash shukla crime story with friends
श्रीप्रकाश शुक्ला। (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया।

पूर्वांचल में अपराध जगत में सबसे बड़ा नाम श्रीप्रकाश शुक्ला का है। इसके पीछे उसके एक परम मित्र का बहुत बड़ा हाथ था। उसका नाम आनंद पांडे था। कहा तो यह भी जाता है कि अगर आनंद पांडे का दिमाग और जिगरा श्रीप्रकाश शुक्ला का एक साथ ना होता तो श्रीप्रकाश अपराध जगत में इतनी तेजी से आगे नहीं जा पाता। पुराने लोग बताते हैं कि श्रीप्रकाश शुक्ला ने पैसे के बंटवारे के विवाद में आनंद पांडे की मुखबिरी कर दी थी और फिर वह एनकाउंटर में मार दिया गया था।



जानकारी के मुताबिक, कानपुर के गुटखा कारोबारी का अपहरण कर रंगदारी वसूलने का मामला हो या फिर अन्य उद्योगपतियों से वसूली का मामला। आनंद पांडे ही सारी गोटी सेट करता था। इसके बाद श्रीप्रकाश उस अपराध को अंजाम देता था। चंद महीनों में आठ उद्योगपतियों से वसूली के बाद रुपये के बंटवारे को लेकर दोनों में विवाद हो गया था। इसके बाद श्रीप्रकाश और आनंद पांडे में 36 का आंकड़ा हो गया। इसके बाद आनंद पांडे को रास्ते से हटाने के लिए श्रीप्रकाश ने उसका एनकाउंटर करवा दिया। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...

 

Gorakhpur famous gangster shri prakash shukla crime story with friends
श्रीप्रकाश शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : Social media

यह वह दौर था जब रेलवे के ठेके में 22 वर्ष के पेशेवर शूटर बन चुके श्रीप्रकाश शुक्ला ने एंट्री मारी थी और उसे शह मिली थी, मोकामा, बिहार के माफिया सूरजभान ‘दादा’ का। श्रीप्रकाश और ‘दादा’ की जोड़ी ने बाहुबली वीरेंद्र प्रताप शाही और बाहुबली हरिशंकर तिवारी के साम्राज्य को काफी चोट पहुंचाई।

 

Gorakhpur famous gangster shri prakash shukla crime story with friends
श्रीप्रकाश शुक्ला की फाइल फोटो (बंदूक की सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला।

श्रीप्रकाश के नाम से बड़े-बड़े सूरमा अंडरग्राउंड हो गए या खुद को रेलवे ठेके से दूर कर लिया। हत्या, अपहरण, फिरौती आम बात हो गई। यह समय रेलवे अफसरों के लिए कठिन था। श्रीप्रकाश का दौर करीब चार सालों तक चला। श्रीप्रकाश के एनकाउंटर के बाद भी खूनी खेल का सिलसिला थमा नहीं। बंदूक की नाल के दम पर ठेके हथियाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।

 

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श्रीप्रकाश शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

उस समय में श्रीप्रकाश शुक्ला के सामने कोई शख्स रेलवे का टेंडर भी नहीं डाल पाता था। रेलवे का टेंडर लेना मतलब मौत को गले लगाना था। श्रीप्रकाश ने बंदूक की नोक पर रेलवे का ठेका अपने नाम करवा लेता था।


 

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श्रीप्रकाश शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : सोशल मीडिया।
श्रीप्रकाश का खौफ इतना ज्यादा था कि वह ठेकेदारों से गुंडा टैक्स वसूलने लगा और लोग बिना किसी को बताए यह टैक्स देने भी लगे।

 
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