पूर्वांचल में अपराध जगत में सबसे बड़ा नाम श्रीप्रकाश शुक्ला का है। इसके पीछे उसके एक परम मित्र का बहुत बड़ा हाथ था। उसका नाम आनंद पांडे था। कहा तो यह भी जाता है कि अगर आनंद पांडे का दिमाग और जिगरा श्रीप्रकाश शुक्ला का एक साथ ना होता तो श्रीप्रकाश अपराध जगत में इतनी तेजी से आगे नहीं जा पाता। पुराने लोग बताते हैं कि श्रीप्रकाश शुक्ला ने पैसे के बंटवारे के विवाद में आनंद पांडे की मुखबिरी कर दी थी और फिर वह एनकाउंटर में मार दिया गया था।
यूपी: डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला ने अपने इस साथी के दम पर बढ़ाई थी हनक, ऐसे करवा दी थी उसकी हत्या
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यह वह दौर था जब रेलवे के ठेके में 22 वर्ष के पेशेवर शूटर बन चुके श्रीप्रकाश शुक्ला ने एंट्री मारी थी और उसे शह मिली थी, मोकामा, बिहार के माफिया सूरजभान ‘दादा’ का। श्रीप्रकाश और ‘दादा’ की जोड़ी ने बाहुबली वीरेंद्र प्रताप शाही और बाहुबली हरिशंकर तिवारी के साम्राज्य को काफी चोट पहुंचाई।
श्रीप्रकाश के नाम से बड़े-बड़े सूरमा अंडरग्राउंड हो गए या खुद को रेलवे ठेके से दूर कर लिया। हत्या, अपहरण, फिरौती आम बात हो गई। यह समय रेलवे अफसरों के लिए कठिन था। श्रीप्रकाश का दौर करीब चार सालों तक चला। श्रीप्रकाश के एनकाउंटर के बाद भी खूनी खेल का सिलसिला थमा नहीं। बंदूक की नाल के दम पर ठेके हथियाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
उस समय में श्रीप्रकाश शुक्ला के सामने कोई शख्स रेलवे का टेंडर भी नहीं डाल पाता था। रेलवे का टेंडर लेना मतलब मौत को गले लगाना था। श्रीप्रकाश ने बंदूक की नोक पर रेलवे का ठेका अपने नाम करवा लेता था।