बस्ती और गोरखपुर मंडल की 41 में से 34 सीटें भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने जीती हैं। एक सीट कांग्रेस और बाकी की छह सीटें सपा की झोली में गईं हैं। सपा ने बस्ती जिले की पांच में से चार सीटें जीती हैं। वहीं, योगी सरकार में बेसिक शिक्षामंत्री और सिद्धार्थनगर की इटवा सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ सतीश चंद्र द्विवेदी चुनाव हार गए हैं। इस सीट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व सपा प्रत्याशी माता प्रसाद पांडेय चुनाव जीते हैं।
Gorakhpur Election Result 2022: भाजपा ने गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 में से 34 सीटें जीतीं, यहां किया क्लीन स्वीप
बेसिक शिक्षामंत्री डॉ सतीश चंद्र द्विवेदी को मिली हार
कैंपियरगंज से भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाई है। वह सातवीं बार विधानसभा चुनाव जीते हैैं। इससे पहले चार बार महराजगंज की पनियरा सीट से विधायक रहे हैं। तीसरी बार कैंपियरगंज से चुनाव मैदान में उतरे थे। गोरखपुर ग्रामीण से भाजपा विधायक विपिन सिंह, पिपराइच से भाजपा विधायक महेंद्रपाल सिंह और बांसगांव से भाजपा विधायक डॉ विमलेश पासवान पर जनता ने फिर भरोसा जताया है। तीनों बड़े अंतर से चुनाव जीते हैं। खजनी से मंत्री श्रीराम चौहान बड़े अंतर से चुनाव जीत गए हैं। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे सहजनवां से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप शुक्ला भी जीत गए हैं। प्रदीप ने सपा प्रत्याशी यशपाल रावत को हराया है। चिल्लूपार से भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने हरिशंकर तिवारी के विधायक बेटे विनय शंकर तिवारी को चुनाव हराया है। चौरीचौरा से पहली बार चुनाव मैदान में उतरे सरवन निषाद जीत गए हैं। वह निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के बेटे हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्या और अजय कुमार लल्लू हारे
भाजपा से बगावत करके सपा का दामन थाने वाले पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर की फाजिलनगर सीट से चुनाव हार गए हैं। इस सीट से भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा को जीत मिली है। कुशीनगर की तमकुहीराज सीट से दो बार विधायक रहे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी चुनाव हार गए हैं। लल्लू को तीसरे स्थान पर जाना पड़ा है। बसपा छोड़कर सपा का दामन थामने वाले चिल्लूपार से विधायक विनय शंकर तिवारी भी हार गए हैं।
बच गई चार मंत्रियों की प्रतिष्ठा
योगी सरकार के चार मंत्रियों की प्रतिष्ठा बच गई है। देवरिया की पथरदेवा सीट से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही जीत गए हैं। उन्होंने सपा के ब्रह्माशंकर तिवारी को हराया है। देवरिया की रुद्रपुर सीट से मंत्री जय प्रकाश निषाद भी जीत गए हैं। सपा के रामभुआल निषाद दूसरे स्थान पर रहे हैं। इस सीट से कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह चुनाव लड़ रहे थे। अखिलेश को तीसरे स्थान पर खिसकना पड़ा है। सिद्धार्थनगर की बांसी सीट से स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह चुनाव जीत गए हैं। संतकबीरनगर की धनघटा (सुरक्षित) सीट छोड़कर गोरखपुर की खजनी (सुरक्षित) से चुनाव लड़ने वाले मंत्री श्रीराम चौहान भी विजयी रहे हैं।
तीन सीटें कम हुईं
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 में से भाजपा व उसके सहयोगी दलों ने 37 सीटें जीती थीं। इस चुनाव में 34 सीटें मिली हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार तीन सीटें कम हुई हैं। एक सीट कांग्रेस और छह सीटें सपा ने जीती हैं।
बस्ती मंडल में खराब प्रदर्शन
साल 2017 के चुनाव में बस्ती मंडल के तीन जिलों में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा का प्रदर्शन इस बार खराब रहा है। पार्टी बस्ती की चार और सिद्धार्थनगर की दो सीटें हार गई है। हालांकि, संतकबीरनगर में प्रदर्शन में खराबी नहीं आई है। तीन सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। यही प्रदर्शन 2017 में भी था।
गोरखपुर मंडल में तीन सीटों का फायदा
गोरखपुर मंडल में भाजपा को फायदा मिला है। 2017 के चुनाव में इस मंडल की 28 में से 24 सीटें भाजपा ने जीती थीं। इस बार 28 में से 27 सीटों पर जीत मिली है। महराजगंज की पांच में से एक फरेंदा सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इस सीट से भाजपा विधायक बजरंग बहादुर सिंह चुनाव हारे हैं। फरेंदा से कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी चुनाव जीते हैं।
दलबदलुओं को झटका
विधानसभा चुनाव से पहले दल बदलने वालों को झटका लगा है। भाजपा छोड़कर सपा में आए पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या को हार का सामना करना पड़ा है। स्वामी ने कुशीनगर की फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। कांग्रेस छोड़कर सपा में आईं और गोरखपुर की कैंपियरगंज सीट से सपा प्रत्याशी काजल निषाद को करारी हार मिली है। भाजपा छोड़कर सपा का दामन थामने वाले विधायक जय चौबे संतकबीरनगर की खलीलाबाद सीट से हार गए हैं। रुद्रपुर से भाजपा विधायक रहे सुरेश तिवारी भी चुनाव हार गए हैं। वह बरहज से भाजपा विधायक थे। सुरेश को भाजपा से टिकट नहीं मिला था। लिहाजा, बसपा के टिकट पर रुद्रपुर से चुनाव लड़े हैं।
