चुनाव आयोग ने जो नतीजे घोषित किए हैं, उसके मुताबिक गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहर विधानसभा क्षेत्र से 103390 मतों के अंतर से चुनाव जीता है। सपा की सुभावती शुक्ला दूसरे नंबर पर रही हैं। यह सीट 1989 से भाजपा के पास है।
Gorakhpur Election Result 2022: यहां पढ़ें गोरखपुर की नौ विधानसभा सीटों का लेखा जोखा, ऐसे जीती भाजपा
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा: सीएम योगी के गढ़ में लगातार दूसरी बार सपा का सूपड़ा साफ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में लगातार दूसरे विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी (सपा) का सूपड़ा साफ हो गया। ग्रामीण विधानसभा सीट को छोड़ दें, तो बाकी सभी आठ सीटों शहर, पिपराइच, कैंपियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवां, खजनी, बांसगांव, चिल्लूपार के मतों की गिनती में पार्टी के प्रत्याशी पहले राउंड से ही पीछे रहे।
जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ी, पिछड़ने का अंतर बढ़ता गया। ग्रामीण विधानसभा सीट पर ही पार्टी थोड़ी टक्कर दे सकी। वह भी प्रत्याशी विजय बहादुर यादव की रणनीति और मेहनत की बदौलत। विजय बहादुर 15 राउंड तक की गिनती में भाजपा के विपिन सिंह से बढ़त बनाए रखे। एक बार पिछड़े तो पिछड़ते ही चले गए। उन्होंने 2017 के चुनाव में भी विपिन सिंह को अच्छी टक्कर दी थी। तब उन्हें 4,410 वोटों से शिकस्त खानी पड़ी थी।
जानकार कहते हैं कि दरअसल, साल 2017 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद से ही पार्टी ने न तो कभी गहराई में जाकर हार की वजहें तलाशी और न ईमानदारी से उन्हें दूर करने की कोशिश की। सड़क से लेकर सदन तक जिस संघर्ष के लिए सपा जानी जाती थी, पूरे पांच साल में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में वह तेवर नहीं दिखा।
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र: जातीय समीकरण पर भारी पड़े मोदी-योगी
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण पर मोदी-योगी भारी पड़े। प्रधानमंत्री आवास, राशन से लेकर सुशासन तक के पक्ष में बयार बही। भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप शुक्ला ने त्रिकोणीय मुकाबले में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार यशपाल रावत को 43 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। प्रदीप शुक्ला को 1,05,320 वोट, सपा के यशपाल रावत को 62,177 वोट और बहुजन समाज पार्टी के सुुधीर सिंह को 43,798 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी को छोड़ कर कांग्रेस पार्टी से टिकट हासिल करने वाले मनोज यादव को मात्र 3,315 वोट ही मिले।
सहजनवां विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय लड़ाई रही। भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने पहले चरण से जो बढ़त बनानी शुरू की, वह अंतिम चरण की गिनती तक कायम रही। दरअसल, इस विधानसभा में कुल वोटर 3,55,901 हैं। यहां ब्राह्मण, यादव व सैंथवार, क्षत्रिय वोटरों की संख्या निर्णायक भूमिका में है। यहां सैंथवार क्षत्रिय वोटरों की संख्या लगभग 40 हजार से अधिक है। यह वर्ग किसी भी दल के भाग्य को बदलने में निर्णायक भूमिका अदा करता है। इसी वजह से इस सीट पर कभी भी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में पुराने चेहरों पर भरोसा न जताते हुए, संगठन के क्षेत्रीय मंत्री प्रदीप शुक्ला को टिकट देकर मैदान में उतारा था। जबकि, प्रदीप को चुनाव लड़ने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन संगठन में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन बखूबी किया है। यशपाल रावत यहां की यादव बिरादरी में गहरी पैठ रखते हैं। इनके पिता स्व. शारदा रावत भी यहां से विधायक रह चुके हैं, जो क्षेत्र में काफी लोकप्रिय रहे।
भाजपा ने लगातार दूसरी बार हासिल की जीत
भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। सहजनवां विधानसभा का परिणाम हर चुनाव में बड़ा ही रोचक रहा है। यहां से कोई दल यह दावा नहीं कर सकता है कि उसका इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। सहजनवां विधानसभा पर 2017 में भाजपा के शीतल पांडेय ने सपा के यशपाल रावत को 15,377 मतों से पराजित किया था। इस चुनाव में शीतल पांडेय 72,213 मत और यशपाल रावत को 56,836 मत मिले थे, जबकि बसपा उम्मीदवार देवनारायण उर्फ जीएम सिंह 54 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस विधानसभा सीट पर 2012 में बसपा के राजेंद्र उर्फ बृजेश सिंह का कब्जा रहा, जबकि 2007 में बसपा के जीएम सिंह विधायक चुने गए थे।
खजनी विधानसभा: लगातार तीसरी बार खिला कमल
खजनी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में तीसरी बार कमल खिला है। भाजपा के श्रीराम चौहान ने सपा की रुपावती बेलदार को 37,101 वोट से मात दी है। बेलदार को 53,109 वोट मिला है। वहीं, बसपा के विद्यासागर को 46,627 वोट मिले हैं।
पहले चक्र के साथ ही भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त बना ली थी, जो अंतिम चरण तक बनी रही। खजनी आरक्षित सीट है। इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 3,64,304 है, जिनमें अनुसूचित जाति के वोटर अधिक हैं। योगी आदित्यनाथ के असर की वजह से बसपा का कैडर वोट भी बीजेपी के पक्ष में मतदान करता है। खजनी विधानसभा का अस्तित्व 2012 में आया, जहां से पहली बार भाजपा के संत प्रसाद विधायक चुने गए थे।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने संत प्रसाद पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा था और उन्होंने जीत हासिल की। इस बार पार्टी ने प्रत्याशी बदला और श्रीराम चौहान को प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगा दी। वर्ष 1996 में श्रीराम चौहान को बस्ती लोकसभा सीट से सांसद चुना गया था।
वर्ष 1998 और 1999 में भी बस्ती से सांसद चुने गए थे। वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में श्रीराम चौहान को खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का राज्य मंत्री बनाया गया था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता रहे श्रीराम चौहान खलीलाबाद के निवासी हैं। वह धनघटा विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं।
चौरीचौरा विधानसभा: पहले चक्र की गणना से ही श्रवण का बढ़ता गया ग्राफ
चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सहयोगी दल निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने पहले राउंड से ही सपा से बढ़त बना ली। जैसे-जैसे मतों की गिनती होती गई, वोटों का अंतर भी बढ़ता गया।
निषाद पार्टी के मुखिया ने चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से अपने बेटे श्रवण निषाद को प्रत्याशी बनाया था। श्रवण, भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। यहां भाजपा से बगावत करके निर्दल चुनाव लड़े अजय सिंह टप्पू पर सबकी निगाहें थीं। अनुमान था कि टप्पू अगर ज्यादा वोट पाते हैं तो निषाद पार्टी के श्रवण निषाद को नुकसान हो सकता है।
टप्पू को 29,728 मत मिले, लेकिन इससे श्रवण निषाद को नुकसान नहीं हुआ। श्रवण 41,431 मत से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। पहले राउंड में श्रवण को 5,366 मत मिले, जबकि सपा के बृजेश चंद्र लाल को 2,029 मत हासिल हुए। बसपा का प्रदर्शन पहले राउंड से ही खराब रहा।
पार्टी प्रत्याशी वीरेंद्र पांडेय को पहले चरण में 510 मत ही मिले। आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 17वें व 18वें राउंड की गणना में ही सपा प्रत्याशी बृजेश चंद्र लाल, भाजपा व निषाद पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार श्रवण निषाद से ज्यादा मत पा सके। बाकी राउंड में श्रवण ने अपनी बढ़त बनाए रखा। मतगणना के अंतिम चरण में लड़ाई एकतरफा हो गई। सपा के समर्थकों ने भी 20 राउंड के बाद हार मान ली।
