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राहत: फिलहाल गोरखपुर में टल गया भयंकर बाढ़ का खतरा, तटबंधों पर दबाव बरकरार, लगातार हो रहा रिसाव
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 06 Sep 2021 04:28 PM IST
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गोरखपुर: गोरखपुर राप्ती नदी।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर में राप्ती, घाघरा और रोहिन नदी का जलस्तर सोमवार को और कम होने से जनपदवासियों ने राहत की सांस ली है। जानकारों का कहना है कि जिस तरह से तीनों नदियों का जलस्तर नीचे आ रहा है उससे भयंकर बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि अब भी तीनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस वजह से इनके तटबंधों पर दबाव बना हुआ है, जिसकी सतत निगरानी चल रही है। जानकारी के अनुसार, राप्ती नदी का जलस्तर दो दिनों में 24 सेंटीमीटर नीचे आया है। नदी फिलहाल खतरे के निशान से 2.10 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, रोहिन का पानी घटकर खतरे के निशान से केवल 96 सेंटीमीटर ऊपर रह गया है। जबकि रविवार शाम तक घाघरा नदी का पानी अयोध्या पुल पर खतरे के निशान से केवल चार सेंटीमीटर ऊपर बह रहा था। जनपद में बहने वाली गोर्रा नदी अब भी बढ़ रही है। इसका जलस्तर खतरे के निशान से 1.65 मीटर ऊपर बना हुआ है।
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गोरखपुर: गोरखपुर राप्ती नदी।
- फोटो : अमर उजाला।
पिछले बीस दिनों से उफनाई राप्ती शनिवार से कुछ शांत नजर आ रही है। हालांकि नदी का जलस्तर घटने की रफ्तार काफी धीमी है। जानकारों का कहना है कि घाघरा नदी जिस तरह से घट रही है, उससे लग रहा है कि आज वह खतरे के निशान से नीचे आ जाएगी। रोहिन नदी भले ही खतरे के निशान से 96 सेमी ऊपर है, लेकिन इससे लगे क्षेत्रों में खतरा काफी हद तक टल गया है। आमी नदी का भी पानी नीचे आने लगा है। नदी ने कटान कम कर दी है। गोर्रा नदी के बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग भयभीत हैं। पिछले दिनों गोर्रा नदी ने तटबंधों को तोड़ दिया था।
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गोरखपुर: गोरखपुर राप्ती नदी।
- फोटो : अमर उजाला।
तटबंधों पर दबाव बरकरार, लगातार हो रहा रिसाव
राप्ती नदी के तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। रोज रिसाव हो रहा है। एक जगह बंद किया जा रहा है तो दूसरी जगह खुल जा रहा है। इसी वजह से लोग चिंतित हैं। सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर से चीफ इंजीनियर तक लगातार बंधों की निगरानी में लगे हैं। जहां कहीं भी रिसाव की सूचना मिल रही है, वहां छोटे बड़े अधिकारी पहुंच रहे हैं।
राप्ती नदी के तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। रोज रिसाव हो रहा है। एक जगह बंद किया जा रहा है तो दूसरी जगह खुल जा रहा है। इसी वजह से लोग चिंतित हैं। सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर से चीफ इंजीनियर तक लगातार बंधों की निगरानी में लगे हैं। जहां कहीं भी रिसाव की सूचना मिल रही है, वहां छोटे बड़े अधिकारी पहुंच रहे हैं।
गोरखपुर: गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
रात में तटबंधों पर दे रहे पहरा
पानी घटने के बाद भी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। इस वजह से तटवर्ती गांवों के लोग रात में तटबंधों पर पहरा दे रहे हैं। जनपद के सभी प्रमुख बांध कोठा-सेमरा के अलावा बोक्टा-बरवार तथा मनौली बांध पर लगातार निगरानी की जा रही है। स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
पानी घटने के बाद भी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। इस वजह से तटवर्ती गांवों के लोग रात में तटबंधों पर पहरा दे रहे हैं। जनपद के सभी प्रमुख बांध कोठा-सेमरा के अलावा बोक्टा-बरवार तथा मनौली बांध पर लगातार निगरानी की जा रही है। स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
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गोरखपुर: गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : राजेश कुमार।
बाढ़ खंड-2 दो के अधिशासी अभियंता रूपेश कुमार खरे ने बताया कि दिनों से राप्ती का जलस्तर नीचे आने लगा है। लेकिन बंधों से रिसाव अब भी हो रहा है। रिसाव को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया भी जा रहा है। स्थिति नियंत्रण में है। सभी अधिकारी बंधों पर कैंप कर रहे हैं।