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बारिश बनी मुसीबत: बाढ़ पीड़ितों के लिए फिर से बरसात बनी आफत, प्लास्टिक की तिरपाल पकड़कर गुजारनी पड़ी रात
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 17 Sep 2021 02:12 PM IST
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गोरखपुर में बारिश से बढ़ी बाढ़ पीड़ितों की समस्या।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले में राप्ती की बाढ़ में डूबे शेरगढ़ और कोलिया के करीब 200 परिवारों के लिए बुधवार शाम से लेकर शुक्रवार तक की सुबह भारी पड़ी। तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश ने बाढ़ पीड़ितों का दर्द और बढ़ा दिया। नौसड़ के पास बांध पर प्लास्टिक की छाजन के नीचे सिर छुपाए इन लोगों को पूरी रात प्लास्टिक पकड़कर, तेज हवा और बरसात से जूझना पड़ा। पिछले महीने जब राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान को लांघकर ऊपर बढ़ा तो नदी की तलहटी में बसे शेरगढ़, बहरामपुर, कोलिया और डोमिनगढ़ के लोगों को घर छोड़कर माल-मवेशी के साथ बांध पर शरण लेनी पड़ी। नदी का जलस्तर अब काफी कम हो चुका है, लेकिन बांध पर शरण लिए शेरगढ़ व कोलिया के लोगों की तकलीफ अभी कम नहीं हुई। वजह यह कि इनके घरों में अभी भी पानी लगा है। रास्ते पर पानी भरा है। लिहाजा परिवार के बुजुर्ग व बच्चे बांध पर बने प्लास्टिक के अस्थाई घर में ही रह रहे हैं। बुधवार को पूरे दिन तो हल्की बरसात थी, जिससे किसी को कोई खास दिक्कत नहीं हुई लेकिन जैसे-जैसे रात गहरी हुई, बारिश के साथ हवा भी तेज होती गई।
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गोरखपुर में बारिश से बढ़ी बाढ़ पीड़ितों की समस्या।
- फोटो : अमर उजाला।
अपने मवेशियों के साथ बांध पर शरण लिए विश्वंभर, सनेही, रामजतन, सुरसतिया आदि का कहना था कि दिन में हुई हल्की बारिश देखकर अनुमान था कि रात में कुछ देर बाद बारिश बंद हो जाएगी, लेकिन हवा के साथ बारिश तेज होने पर मुश्किल बढ़ गई। प्लास्टिक किसी तरह से धूप रोक पाती है। हवा और बारिश रोकना कहां संभव था। जैसे-तैसे रात गुजारी गई। विरझन ने बताया कि अब पानी काफी कम हो गया है। कुछ लोग वापस गांव में जाकर रहने भी लगे हैं, लेकिन अभी मवेशियों को वहां ले जाना संभव नहीं है, इसलिए यहां रहना पड़ रहा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
बहरामपुर दक्षिणी में लौटी रौनक
राजघाट पुल के पास बसे बहरामपुर दक्षिणी गांव में मकान एक मंजिल तक बाढ़ में डूबा हुए थे। अब घरों में से पानी निकल गया है। इसके बाद बांध व अगल-बगल के ऊंची जगहों पर शरण लिए, इस गांव के लोग लौटने लगे हैं। इस गांव की लक्ष्मीना, वृजवंती, मालती ने बताया कि घर में तमाम सामान छूट गए थे। कुछ पानी में बह गए हैं, जबकि कुछ खराब हुए हैं। मौसम के साफ होने पर सामान निकालकर बाहर सुखाया जाएगा।
राजघाट पुल के पास बसे बहरामपुर दक्षिणी गांव में मकान एक मंजिल तक बाढ़ में डूबा हुए थे। अब घरों में से पानी निकल गया है। इसके बाद बांध व अगल-बगल के ऊंची जगहों पर शरण लिए, इस गांव के लोग लौटने लगे हैं। इस गांव की लक्ष्मीना, वृजवंती, मालती ने बताया कि घर में तमाम सामान छूट गए थे। कुछ पानी में बह गए हैं, जबकि कुछ खराब हुए हैं। मौसम के साफ होने पर सामान निकालकर बाहर सुखाया जाएगा।
गोरखपुर में घट रहा राप्ती नदी का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
जलस्तर घटने के बाद दिखने लगी हैं सीढ़ियां
राजघाट के पास राप्ती नदी की खूबसूरती निहारने वालों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। नदी का जलस्तर घटने के बाद घाट की सीढ़ियां तो दिखने लगी हैं लेकिन इस पर पड़ी सिल्ट व गंदगी साफ होने में कुछ वक्त लगेगा। तब तक दूर से ही नदी का नजारा देखने को मिलेगा।
राजघाट के पास राप्ती नदी की खूबसूरती निहारने वालों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। नदी का जलस्तर घटने के बाद घाट की सीढ़ियां तो दिखने लगी हैं लेकिन इस पर पड़ी सिल्ट व गंदगी साफ होने में कुछ वक्त लगेगा। तब तक दूर से ही नदी का नजारा देखने को मिलेगा।
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गोरखपुर राजघाट।
- फोटो : अमर उजाला।
राजघाट पुल पर नदी के पूरब और पश्चिम किनारे को बेहद खूबसूरती से संवारा गया है। यहां बनी सीढ़ियों व गुंबद के पास बैठकर नदी के बहाव को देखना बेहद खूबसूरत एहसास दिलाता है। परंतु नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते यहां पूरा निर्माण बाढ़ में डूब गया था। अब जबकि पानी नीचे उतर रहा है तो यहां का निर्माण भी दिखने लगा है। गुरुवार की दोपहर में यहां सीढ़ियों से पानी नीचे उतर चुका था। लेकिन पानी उतरते वक्त बड़ी मात्रा में सिल्ट इन सीढ़ियों पर ही रुकी रह गई है। पश्चिमी घाट पर बाढ़ के साथ बहकर आई गंदगी जगह-जगह जमा हो गई है। पूरब की तरफ भी सीढ़ियों के पास भारी मात्रा में सिल्ट दिख रहा है। इसके साफ होने के बाद ही यहां बैठकर नदी के विहंगम दृश्य का आनंद लिया जा सकेगा।
