मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बृहस्पतिवार शाम पांडेयहाता से निकलने वाले होलिकादहन जुलूस और 19 मार्च की सुबह घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह होलिकोत्सव शोभायात्रा में शामिल होंगे।
Holi 2022: आज गोरखपुर आएंगे सीएम योगी, होलिका दहन व भगवान नृसिंह की शोभायात्रा में होंगे शामिल
शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं योगी
गोरक्षपीठाधीश्वर होलिकोत्सव-भगवान नृसिंह शोभायात्रा में शामिल होते रहे हैं। इस बार इस शोभायात्रा में सीएम योगी को विधानसभा चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत का रंग भी खूब बरसता दिखेगा। वह 1996 से 2019 तक शोभायात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन कोरोना संकट की वजह से पिछले दो (2020, 2021) होलिकोत्सव में नहीं जा रहे थे। अब कोरोना काबू में है।
होलिकादहन की राख से होता है तिलकोत्सव
गोरखनाथ मंदिर के होलिकोत्सव की शुरुआत होलिकादहन की राख से तिलक लगाने के साथ होती है। इस परंपरा में एक विशेष संदेश निहित होता है। कहा जाता है कि होलिकादहन हमें भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु के अवतार भगवान नृसिंह के पौराणिक आख्यान से भक्ति की शक्ति का अहसास कराती है। होलिकादहन की राख से तिलक लगाने के पीछे का मकसद भक्ति की शक्ति को सामाजिकता से जोड़ना है।
नानाजी देशमुख ने की थी रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत
भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर फूहड़ता दूर करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से गहरा नाता जुड़ गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया। 1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी अगुवाई में न केवल गोरखपुर, बल्कि समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का विशिष्ट पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली सरीखी है।
पांच किलोमीटर की दूरी तय करती है शोभायात्रा
भगवान नृसिंह की शोभायात्रा पांच किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करती है। पथ नियोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता करते हैं। भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों में सराबोर हो बिना भेदभाव सबसे शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
