लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

डॉक्टर की सलाह: इंसेफेलाइटिस के बाद चूहों से फैल रही लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी, शोध में हुआ खुलासा

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 13 Aug 2022 01:33 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
1 of 5
विज्ञापन
पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के बाद लेप्टोस्पायरोसिस नाम की बीमारी लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर रही है। यह चूहे से फैल रही है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के शोध में यह खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों ने बताया है कि समय रहते जानकारी मिलने से इंसेफेलाइटिस की तरह की इस पर भी काबू पाया जा सकता है।

बुखार के नए स्वरूप पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने आरएमआरसी के साथ मिलकर शोध किया है। इसे लेकर शुक्रवार को विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों के मध्य कांफ्रेंस के जरिये शोध परिणाम पर मंथन भी किया गया है।

शोध की जानकारी देते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में इस वर्ष आरएमआरसी के सहयोग से बुखार का कारण जानने का प्रयास किया गया। बताया कि समय रहते जिस तरह इंसेफेलाइटिस पर सरकार ने काबू पाया है। उसी तरह इस पर भी काबू पाया जा सकता है।
 
प्रतीकात्मक तस्वीर
2 of 5
शोध में 50 फीसदी नमूनों में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि
अस्पताल में भर्ती मरीजों पर पांच तरह की बीमारियों स्क्रब टायफस, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, चिकनगुनिया और एंटारोटा वायरस पर जांच शुरू की गई। 20 जून से छह अगस्त के बीच 88 रक्त नमूनों की जांच की गई। इनमें से 50 फीसदी यानी 44 नमूनों में लेप्टोस्पायरोसिस पॉजिटिव मिला। जबकि, एक में स्क्रब टायफस, नौ में डेंगू आईजीएम, तीन में चिकनगुनिया और तीन में एंटारोटा वायरस के केस मिले हैं।

 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
3 of 5
चौथे और पांचवें दिन हल्के पीलिया, निमोनिया के लक्षण
मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी ने बताया कि शोध में पाया गया है कि लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी 20 से 60 वर्ष के उम्र के लोगों में हो रही है। इससे बिना ठंड के उच्च तापमान का बुखार हो रहा है। मरीज के पूरे शरीर में दर्द रहता है। चौथे-पांचवें दिन कुछ मरीजों में हल्के पीलिया और कुछ में निमोनिया के लक्षण मिलने लगते हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मोनोसेफ, मैरोपैनम व थर्ड-फोर्थ जनरेशन की एंटीबायोटिक दवाओं का उतना असर नहीं होता, जितना सामान्य निमोनिया के मामलों में दिखता है।
 
प्रतीकात्मक तस्वीर
4 of 5
चूहों के मूत्र से हो रही लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी
डॉ. वाजपेयी ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस अधिकतर चूहों के शरीर में रहता है और उसके मूत्र से यह वातावरण में आता है। त्वचा के जरिये यह मनुष्य के शरीर में पहुंचकर उन्हें बीमार करता है। लेप्टोस्पायरोसिस के इलाज में टेट्रासाइक्लिन, क्लोरोमाइसेटिन, डॉकसीसाईक्लिन आदि एंटीबायोटिक दवाएं कारगर हैं, लेकिन मौजूदा समय में डॉक्टर इसका उपयोग कम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
5 of 5
इन विशेषज्ञों ने किया शोध पर मंथन
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी ने बताया कि शोध को एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. तेजस्वी, केजीएमयू लखनऊ के कुलपति जनरल विपिन पुरी, मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु, गोरखपुर के सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, बीआरडी मेडिकल कॉलेज से डॉ. राजकिशोर, आरएमआरसी से डॉ. राजीव सिंह, डॉ. एसपी बेहरा आदि विशेषज्ञों ने माना कि लेप्टोस्पायरोसिस पर शोध प्राथमिक तौर पर बिल्कुल ठीक है। यह बीमारी महाराष्ट्र और गुजरात में पहले से है।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00