मां शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि सोमवार से शुरू हो गया है। महानगर में एक दिन पहले ही तैयारियां पूरी हो गई थीं। प्रमुख देवी मंदिरों को सजाया गया है। चुनरी, नारियल, पूजन सामग्री आदि की दुकानें सजकर तैयार हैं।
Navratri 2022: गोरखपुर में सजा मां का दरबार, भक्ति में लीन हुए भक्त
देवी मंदिरों को सजाया गया
गोलघर काली मंदिर, कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर, दाउदपुर काली मंदिर, कालीबाड़ी रेती चौक, विंध्यवासिनी मंदिर मेडिकल रोड, जाफरा बाजार शीतला माता मंदिर समेत महानगर के प्रमुख देवी मंदिरों को सजाया जा चुका है।
हाथी पर होगा माता का आगमन
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है जो अत्यंत ही शुभकारी है। इससे फसलों की अच्छी पैदावार होगी वहीं लोगों के धन-संपदा में भी वृद्धि होगी। लेकिन दशमी मंगलवार को होने से माता का प्रस्थान मुर्गा पर हो रहा है जो राजनीतिक उथल-पुथल का कारक बनेगा।
कलश स्थापना मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि के प्रथम दिन प्रतिपदा तिथि का अभाव नहीं है। प्रतिपदा तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि शेष तीन बजकर 22 मिनट तक है। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 7 बजकर तीन मिनट तक, पश्चात हस्त नक्षत्र है। इसी प्रकार शुक्ल योग भी दिन में 10 बजकर 12 मिनट तक, पश्चात ब्रह्म योग और श्रीवत्स नामक औदायिक योग भी है। नवरात्रि के आरंभ के दिन न तो चित्रा नक्षत्र है और न ही वैधृति योग है, इसलिए कलश स्थापन सुबह बजकर दो मिनट से शाम सूर्यास्त पांच बजकर 58 मिनट तक किया जा सकता है।
ऐसे करें पूजन-अर्चन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, नवरात्रि का पर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोएं। उस पर विधि पूर्वक कलश स्थापित करें। कलश पर देवी जी मूर्ति (धातु या मिट्टी) अथवा चित्रपट स्थापित करें। पूजा सामग्री एकत्रित कर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें तथा आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें। रक्षा दीपक जला लें। सर्वप्रथम क्रमश: गणेश-अंबिका, कलश (वरुण), मातृका पूजन, नवग्रहों का पूजन करें।
शारदीय नवरात्रि का कार्यक्रम
26 सितंबर : मां शैलपुत्री पूजा व घटस्थापना
27 सितंबर : मां ब्रह्मचारिणी पूजा
28 सितंबर: मां चंद्रघंटा पूजा
29 सितंबर : मां कुष्मांडा पूजा
30 सितंबर : मां स्कंदमाता पूजा
01 अक्तूबर : मां कात्यायनी पूजा
02 अक्तूबर : मां कालरात्रि पूजा
03 अक्तूबर : मां महागौरी पूजा
04 अक्तूबर : मां सिद्धिदात्री पूजा