Gorakhpur Flood: अब हर साल बरसात में बाढ़ जैसे हालात को रहें तैयार, आगे भी बनी रहेगी समस्या

उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 14 Sep 2021 05:18 PM IST
गोरखपुर बाढ़: गोरखपुर में जलभराव।
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गोरखपुर में नदी, नाले, ताल-पोखरे के किनारे बसी गोरखपुर शहर की घनी आबादी को अब हर साल बरसात में बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, दो दशक आगे का ख्याल करके जलभराव की समस्या के इलाज के लिए जो ‘दवा’ दी जा रही है, वही और बड़ी समस्या का सबब बनेगी। जानकार बताते हैं कि शहर की सड़कों व नालों की जो ऊंचाई बढ़ाई गई है, उसने निचले इलाकों के पानी का बहाव बाधित कर दिया है। यही वजह है कि समस्या के वैकल्पिक समाधान के लिए नगर निगम ने 300 से अधिक पंप पिछले एक पखवारे से चला रखे हैं, फिर भी राहत नहीं मिल पा रही है।

यह स्थिति तब है, जबकि इस बार शहर में सामान्य बारिश हुई है और कई जगह कच्चे नाले भी खोदे गये हैं। अगले साल तक जब सभी नालों का निर्माण पूरा हो जाएगा, यह बरसात शहरवासियों के बाढ़ जैसे जलभराव से जूझने को मजबूर करेगी।
 
 
गोरखपुर बाढ़: गोरखपुर में जलभराव।
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जिला प्रशासन और नगर निगम के तमाम कोशिशों के बावजूद शहर के कई मोहल्लों में जलभराव अब भी समस्या बना हुआ है। सीएम सिटी में जलभराव, चुनावी साल में विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा है। खुद मुख्यमंत्री हालात पर चिंता जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। नकहा मोहल्ले की गलियों में एक महीने से पानी भरा हुआ है। यहां के रहने वाले विमलेश, रामदयाल, आरपी सिंह, मोहम्मदीन आदि बताते हैं कि बारिश कम होने व पंपिंगसेट लगाने के बाद भी जलभराव कम नहीं हो रहा है। गोरखनाथ क्षेत्र की ग्रीन सिटी जैसी वीआईपी कॉलोनी में भी बारिश का पानी निकलने में कई दिन का वक्त लगा। पादरी बाजार क्षेत्र के जंगल हकीम नंबर एक में बारिश होते ही लोगों को जुगाड़ की नाव से सहारा लेना पड़ जाता है। एमएमयूटी के बगल की कृष्णा नगर, प्रेम नगर  विद्यानगर आदि कॉलोनियों में महीने भर बाद भी नाला व सड़क का अंतर खत्म नहीं हो पा रहा है। तेज बारिश होते ही सिंघड़िया मोहल्ले में पानी घर में घुसने लगता है। बड़े महानगर के तौर पर विकसित हो रहे, अपने गोरखपुर की यह तस्वीर परेशान करने वाली है। कृष्णानगर निवासी विद्यावती का कहना है कि जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर घर तो बना लिया, लेकिन अब उसमें रहने से अधिक कठिन आवागमन है। सड़क पर भरा गंदा पानी देखकर रिश्तेदार भी फोन से ही हालचाल पूछ रहे हैं।

 
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निचली जमीनों पर बसी है नई कॉलोनियां
इस समस्या की सबसे बड़ी वजह शहर का अनियोजित तरीके से हुआ विकास है। जिन निचली जमीनों में पांच साल पहले तक बारिश का पानी एकत्रित होता था, वहां अब कॉलोनियां बस चुकी हैं। होना तो यह चाहिए था कि इन निर्माण को देखते हुए जलनिकासी के नए प्रबंध किए जाते, लेकिन जिम्मेदारों ने भी केवल यह मानकर छोड़ दिया कि ‘गड्ढे में घर बनाया है तो डूबेंगे ही’। बात यहीं तक होती तो शायद कुछ विकल्प भी निकलता, लेकिन इससे भी दो कदम आगे बढ़कर यह हुआ कि सड़कों को चौड़ा करने और बगल में नाला निर्माण के वक्त भी निचले इलाके में बसे लोगों की पीड़ा का ख्याल नहीं रखा गया। नालों को 15 साल आगे के गोरखपुर का ख्याल रखते हुए बनाया गया। नतीजा यह है कि इन नालों में पानी ही नहीं पहुंच रहा है। अभी तो नाले अधूरे हैं, लिहाजा इनका पानी भी मोहल्लों में ही जा रहा है।

 
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मकानों का एक तल डूबेगा
असुरन चौराहे से मेडिकल कालेज रोड पर बढ़ते ही दाएं हाथ को राप्ती कॉम्प्लेक्स है। इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के सामने सड़क करीब आठ फीट ऊंची हो गई है। इसी के सापेक्ष नाला भी है। अभी वहां नाले का निर्माण कार्य चल रहा है। नाले के निचले तल और शापिंग कॉम्प्लेक्स के निचले तल के बीच करीब तीन फिट का अंतर है। मतलब साफ है कि इस कॉम्प्लेक्स के एक तल का पानी नाली में नहीं आएगा। अलबत्ता नाले में हुआ, एक पतला सुराख भी कॉम्प्लेक्स को तालाब बना देगा। यही हाल पादरी बाजार से कौवाबाग (जेल बाईपास रोड) की तरफ आने वाली सड़क के किनारे का है। जंगल हकीम नंबर एक मोहल्ले के सामने नाला पुराने मकानों से करीब पांच फुट ऊपर है। इस कॉलोनी का पानी नाले में गिराने के लिए पूरी कॉलोनी को ही कम  से कम छह फीट ऊपर उठाना होगी।

 
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विधायक की चिंता को कर दिया दरकिनार
नालों की बेतरतीब ऊंचाई को लेकर शहर के विधायक आरएमडी अग्रवाल ने विधानसभा में सवाल भी उठाया था, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। अफसर लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि मोहल्लों में सड़क व नाली का निर्माण कराने के बाद इस समस्या से निजात मिल जाएगा। उनकी बात को अगर पूरी तरह से सही ही मान लें तो भी ऐसा होने में कम से कम 10 साल तो जरूर लगेंगे। तब तक तो हर साल बरसात में यह त्रासदी झेलनी ही पड़ेगी।
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