रंगों के त्योहार में जरा सी चूक आपको बीमार बना सकती है। होली पर बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार होती है। ऐसे रंगों से सांस की बीमारी हो सकती है। अस्थमा अटैक आ सकता है। आंखों की रोशनी जाने और त्वचा में कैंसर का खतरा रहता है। किडनी भी फेल हो सकती है।
Holi 2022: रंगों के त्योहार में जरा सी चूक बना सकती है बीमार, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे हैं सलाह
बच्चे हो सकते हैं अस्थमा के मरीज
चेस्ट विशेषज्ञ डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि होली पर बच्चे सबसे ज्यादा मस्ती करते हैं। होली के रंग अस्थमा से पीड़ित बच्चों को जल्दी अपना शिकार बनाते हैं। अगर बच्चे को अस्थमा है, तो उसका ध्यान रखें। होली खेलने के दौरान माता-पिता बच्चे के आसपास रहें। ध्यान दें कि वह सूखे रंगों के संपर्क में न आने पाए।
किडनी के मरीज रहें सतर्क
नेफ्रोलाजिस्ट डॉ. विजय प्रताप सिंह ने बताया कि रासायनिक रंगों में प्रदूषित तत्व (इंडस्ट्रियल कंटेमिनेशन) काफी ज्यादा होते हैं। जैसे कि यदि काला रंग शरीर में प्रवेश कर जाए तो इससे किडनी फेल हो सकती है। काले रंग में लेड की मात्रा अधिक होती है। इसी तरह हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है, जो आंख में जाने पर एलर्जी, जलन, खुजली इत्यादि कर सकता है। कुछ देर के लिए आंखों की रोशनी धूमिल हो सकती है।
एल्युमिनियम ब्रोमाइड से कैंसर का खतरा
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सिल्वर कलर में पाया जाने वाले एल्युमिनियम ब्रोमाइड से त्वचा का कैंसर हो सकता है। लाल रंग में पाया जाने वाला मरकरी फास्फेट स्किन कैंसर का कारण हो सकता है। इससे नजर कम होने के साथ पैरालिसिस भी हो सकता है। पर्पल कलर में क्रोमियम आयोडाइड अस्थमा को बढ़ा सकता है। चमकीले सितारे माइका के होते हैं। कई बार इसमें ग्लास पार्टिकल्स भी होते हैं। यह बालों में लगने पर रगड़ने से उसे तोड़ देता है। खाल को लाल कर दाने उत्पन्न कर देता है। इससे इरीटेशन कांटैक्ट डर्माइटिस भी हो सकता है।
कंजक्टिवाइटिस का खतरा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि रासायनिक रंग खतरनाक होते हैं। उनके प्रयोग से आंख में कंजक्टीवाइटिस हो सकता है। रंग की आंख की कार्निया में रगड़ से रोशनी जा सकती है। रंगों से आंखों में जलन, खुजली इत्यादि हो सकती है। आंखों में रंग पड़ने पर उसे साफ ठंडे पानी से छींटा मारकर धोना चाहिए।
