मोदी कैबिनेट में जगह बनाने वाले महराजगंज से भाजपा सांसद पंकज चौधरी ने पहला चुनाव गोरखपुर की शिवपुर सीट से पार्षद पद का चुनाव लड़ा था। वह गोरखपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। पूरा परिवार गीता प्रेस के पास हरवंश गली शेखपुरा में रहता है। केंद्रीय मंत्री बनने वाले पंकज के परिवार में दोहरी खुशी आई है।
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सांसद को मंत्री बनाए जाने की जानकारी थी लेकिन शपथ लेने का बुलावा बुधवार की सुबह ही आया था। पंकज के मंत्री बनने पर पत्नी भाग्यश्री चौधरी, बेटी श्रुति चौधरी, बेटे रोहन चौधरी, भाभी राजश्री चौधरी, भतीजे राहुल चौधरी, भतीजी स्वाती चौधरी और शिल्पी चौधरी ने शुभकामनाएं दी हैं। कहा है कि मंत्री के रूप में वह देश, समाज की सेवा करते रहेंगे।
केंद्रीय मंत्री को मिली बधाई
केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद पंकज को बधाई मिल रही है। कैंपियरगंज से भाजपा विधायक फतेहबहादुर सिंह, नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल और गोरखपुर ग्रामीण से भाजपा विधायक विपिन सिंह ने भी पंकज को शुभकामना दी है। थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश नेभानी ने भी केंद्रीय मंत्री को बधाई दी है।
पूर्वांचल के ब्राह्मण नेताओं के हाथ निराशा
मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद लगाए बैठे पूर्वांचल के ब्राह्मण नेताओं को निराशा हाथ लगी है। उम्मीद जताई जा रही थी कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी गोरखपुर-बस्ती मंडल के किसी ब्राह्मण सांसद को प्रतिनिधित्व मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले के कार्यकाल में राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला को वित्त राज्यमंत्री बनाया गया था। लिहाजा, इस बार भी ब्राह्मण चेहरे को जगह देने की चर्चा थी। भाजपा सूत्रों से जो जानकारी मिली थी, उसके मुताबिक देवरिया से भाजपा सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, गोरखपुर शहर से भाजपा सांसद रवि किशन, बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी व राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला को रेस में बताया गया था।
संतकबीरनगर से भाजपा सांसद प्रवीण निषाद के भी मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। प्रवीण निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे हैं। बुधवार शाम को मंत्रिमंडल का गठन भी हो गया लेकिन प्रवीण को मौका नहीं मिला है। इसपर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रवीण निषाद का ख्याल रखने का भरोसा दिलाया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मछुआ समाज को प्रतिनिधित्व मिलता तो नतीजा और बेहतर मिल सकता था। पहले से ही निषाद समाज भाजपा से कटा नजर आ रहा है। अगर भाजपा ने गलती नहीं सुधारी तो आगामी विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
