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विश्व रोगी सुरक्षा दिवस: बीआरडी में कोरोना काल के दौरान 23 हजार मरीजों की सुरक्षा के साथ की गई रक्षा, डॉक्टरों ने रखा खास ख्याल

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 17 Sep 2021 02:12 PM IST
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world patient safety day Health workers of BRD Medical College treated 23 thousand corona infected patients better
बीआरडी मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला
चिकित्सा क्षेत्र में थोड़ी सी लापरवाही मरीज को मौत के मुहाने पर खड़ी कर देती है। प्रिस्क्रिप्शन में गलत दवाएं लिखना और इलाज में लापरवाही इसका बड़ा कारण है। यही वजह है कि स्वास्थ्य कर्मियों को लापरवाही से बचाने के लिए वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी-डे (विश्व रोगी सुरक्षा दिवस) के बारे में पढ़ाया जाता है। जिसकी बदौलत स्वास्थ्यकर्मी मरीजों का इलाज करते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य कर्मियों ने करीब 23 हजार कोरोना संक्रमित मरीजों का बेहतर इलाज करते हुए संक्रमण से मुक्ति दिलाई है। जानकारी के मुताबिक, प्रिस्क्रिप्शन में गलत दवाएं लिखना और इलाज में लापरवाही के कारण मरीजों को काफी नुकसान पहुंचता है।
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डॉ. गगन गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि दवाओं का गलत इस्तेमाल, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम या एक्स-रे लेने में गड़बड़ी, ब्रेन के गलत हिस्से में सर्जरी से मरीजों की जान तक चली जाती है। इन सबके बीच कोविड संक्रमण का दौर एक नया सीख दे गया। कोरोना ने लोगों की सफाई की आदतों में बदलाव कर दिया। यही वजह है कि कोविड संक्रमण के पहली और दूसरी लहर में साफ-सफाई के बदौलत ही 23 हजार से अधिक मरीजों को संक्रमण से मुक्ति दिला दी।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला
इस काम में हर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी का सहयोग रहा। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि आधी बीमारी साफ-सफाई से दूर हो जाती है। कोरोना वायरस का  असर भी मेडिकल कॉलेज के वार्ड में सफाई की वजह से कम रहा। मरीजों की सुरक्षा करते हुए उन्हें संक्रमण से मुक्त कर घर भेजा गया।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला।
3500 से ज्यादा मासूमों को भी संक्रमण से बचाया
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग भी कोरोना महामारी के बीच 3500 से महिलाओं का प्रसव कराया। प्रसव के दौरान महिला और नवजात का विशेष ख्याल रखते हुए उन्हें संक्रमण से बचाए रखा। इतना ही नहीं पहली और दूसरी लहर में करीब 300 से अधिक ऐसी प्रसूताएं महिलाएं शामिल रहीं, जो कोविड संक्रमण की चपेट में थी। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत के बदौलत बच्चे संक्रमण से बच गए। डॉक्टरों ने उनकी सुरक्षा का ख्याल रखते हुए उन्हें नई जिदंगी दी।
 
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नवजात के साथ चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला
अब तक बच्चे लिए जन्म  
अप्रैल 2021 से 31 अगस्त तक - 16,581
2020-21            53,124
2019-2020        63,483
2018 - 2019     1061,08
2017 -2018      57150
नोट : यह आंकड़े सरकारी अस्पतालों के हैं। औसतन देखा जाए तो निजी और सरकारी अस्पताल मिलाकर हर माह करीब 11 हजार बच्चे जिले में जन्म लेते हैं।
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