लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें दीपक कुमार की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने राजधानी का सामाजिक सौहार्द कायम रखने के लिए अभूतपूर्व काम किए। जनता से जुड़े रहे। डकैतों के बावरिया और बांग्लादेशी गिरोह का पर्दाफाश कर वारदातों पर लगाम कसी।
इन आईपीएस ने मोहर्रम का 200 साल पुराना रूट बदलवा दिया था, बांग्लादेशी बदमाशों से दिलाई निजात
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दीपक कुमार ने 28 अप्रैल 2017 को जब राजधानी के एसएसपी की कुर्सी संभाली तो शायद ही किसी ने सोचा था कि दो शताब्दी से चली आ रही वह परंपरा बदल जाएगी, जिसे लेकर अक्सर सांप्रदायिक तनाव होता है और नवाबों की नगरी दंगों की आग में जल जाती है। उन्होंने अपनी सूझबूझ और व्यवहार से मोहर्रम के जुलूस का रूट बदलवा दिया। दरअसल मोहर्रम का जुलूस केजीएमयू के सामने से होकर गुजरता था जिसके चलते सात घंटे तक रास्ता बंद रहता था। इस अवधि में मरीजों की आवाजाही भी रुक जाती थी।
अपराधों की रोकथाम में भी उनके प्रयास सराहनीय रहे। राजस्थान से बावरिया गिरोह पकड़कर डकैती की सिलसिलेवार वारदातों पर अंकुश लगाया तो बांग्लादेशी गिरोह का खुलासा कर राजधानी सहित उत्तर प्रदेश में उनके नेटवर्क की जड़ें खोद डालीं। यही नहीं, राजधानी में हुई इनवेस्टर्स समिट-2018 में उन्होंने शानदार काम किया। देश-विदेश से आए अतिथियों की सुरक्षा के बेहतरीन इंतजाम, चाक-चौबंद यातायात व्यवस्था और पुलिसकर्मियों के शालीन व्यवहार से उन्होंने सबका दिल जीत लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके काम की तारीफ की तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें सम्मानित किया था।
आधी रात को चौराहे पर करते थे पुलिसकर्मियों को संबोधित
आईपीएस दीपक कुमार मातहतों का हौसला बढ़ाने वाले अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। वह अक्सर आधी रात को बीच चौराहे पर आसपास के थानों के पुलिसकर्मियों को बुलाकर माइक से संबोधित करते थे। हाथों में माइक लेकर वह पुलिसकर्मियों को उनके कर्त्तव्य, वर्दी के प्रति निष्ठा, ईमानदारी, अधिकार और समाज के लिए जिम्मेदारियों की याद दिलाते थे।