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इस वजह से यात्रियों को नहीं मिल रहा 'जनता खाना', महंगा खरीदना मजबूरी

Thu, 21 Nov 2019 03:00 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 21 Nov 2019 03:00 PM IST
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passengers are not getting janta khana at charbagh railway station and lucknow junction
खाना - फोटो : अमर उजाला
चारबाग रेलवे स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर सस्ता ‘जनता खाना’ धीरे-धीरे स्टॉलों से गायब किया जा रहा है। यह सब इसलिए हो रहा है ताकि महंगे खाने को परोसा जा सके। पिछले वर्ष तक 600-700 पैकेट ‘जनता खाना’ स्टेशनों पर आते और बिक जाते अब बमुश्किल 150 पैकेट ही स्टेशनों पर लाए जा रहे हैं। वह भी सुबह के समय ही यात्रियों को मिल पाता है।


 
passengers are not getting janta khana at charbagh railway station and lucknow junction
प्रतीकात्मक तस्वीर

ट्रेन से सफर करने वाले सामान्य व गरीब यात्रियों के लिए रेलवे मंत्रालय की ओर से ‘जनता खाना’ की शुरुआत की गई। इसमें 15 रुपये में सात पूड़ियां, सब्जी व अचार यात्रियों को दिया जाता है। रेलवे बोर्ड ने रेलवे स्टेशनों व ट्रेनों में जनता खाना की आपूर्ति को अनिवार्य कर दिया। शुरुआत में स्टेशन के स्टॉलों पर इसे रखा जाने लगा। नए कैटरिंग रेट में इसकी कीमत बीस रुपये तो कर दी गई, पर इसके पैकेट धीरे-धीरे घटाए जा रहे हैं। अब तो स्टेशन के चुनिंदा स्टॉलों पर ही ‘जनता खाना’ के पैकेट देखने को मिलते हैं, वह भी गिने-चुने। हां, अधिकारियों के निरीक्षण या दौरों के दौरान ‘जनता खाना’ स्टॉलों पर यह भरपूर मिलता है।

passengers are not getting janta khana at charbagh railway station and lucknow junction
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

‘जनता खाना’ मांगो तो दे देते हैं ‘जनता मील’
यात्रियों के अनुसार स्टॉलों पर जब ‘जनता खाना’ मांगो तो वह ‘जनता मील’ सामने रख देते हैं। ‘जनता मील’ की कीमत 40 से 45 रुपये होती है। ऐसे में यात्रियों को सस्ता व किफायती भोजन नहीं मिल पाता है। वहीं स्टॉल मालिकों की ‘जनता खाना’ की कमी पर अपनी दलील है। वह कहते हैं  कि ‘जनता खाना’ बनाया तो जाता है, लेकिन कम पैकेट बनाए जाते हैं।

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खाना - फोटो : अमर उजाला

शिकायत तो की, पर कोई सुनता नहीं
यात्री पूजा सिंह ने बताया कि ट्रेन में यात्रा के दौरान पैंट्रीकार मालिक से ‘जनता खाना’ मांग भी लीजिए तो ठेकेदार सुनते तक नहीं। वह बताती हैं कि इस बाबत रेलवे के आला अधिकारियों से शिकायतें भी की गईं, पर उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

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खाना - फोटो : अमर उजाला
मुनाफे की गणित में फिट नहीं बैठता
‘जनता खाना’ अगर स्टॉलों से धीरे-धीरे गायब हो रहा है तो उसके पीछे मुनाफे का गणित है। ‘जनता खाना’ में दुकानदारों को कोई खास फायदा नहीं होता था। लिहाजा धीरे-धीरे इसे कम कर दिया गया। डीआरयूसीसी मेंबर एसएस उप्पल तो कहते हैं कि ‘जनता खाना’ साजिशन स्टॉलों से गायब किया जा रहा है ताकि महंगा खाना स्टेशन पर बिकवाया जा सके। साजिशन...? इस सवाल पर वह कहते हैं कि इसमें अफसरों की साठगांठ की जांच की जानी चाहिए।

जनता खाना रखना अनिवार्य, होगी कार्रवाई
‘जनता खाना स्टॉलों पर नियमित रूप से रखना अनिवार्य है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसकेलिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि यात्री सुविधाओं में ढिलाई न बरती जा सके।’ - दीपक कुमार, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे
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