आगरा के खंदौली में पुलिस ने शनिवार रात को अंतरराज्यीय वाहन चोर गैंग के सरगना सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सरगना लग्जरी कार की डुप्लीकेट चाबी तीन मिनट में तैयार करता था। इसके बाद ये चोर कार चोरी कर ले जाते थे। गैंग चोरी की 500 गाड़ियों की बिक्री दूसरे राज्य में कर चुका है। गिरफ्तारी के बाद सरगना ने पुलिस को कार चोरी का लाइव डेमो करके दिखाया।
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तीन मिनट के 'खेल' में कार चोरी: 500 कारें चुराने वाले गिरोह का भंड़ाफोड़, पुलिस के सामने दिखाया लाइव डेमो
Sun, 19 Jun 2022 07:36 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jun 2022 07:36 PM IST
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वाहन चोर गैंग गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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सरगना ने दिखाया चोरी का लाइव डेमो
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डिवाइस से करते थे ब्लैंक चाबी की प्रोग्रामिंग
एसएसपी ने बताया कि वाहन चोर गैंग ने सबसे ज्यादा चोरियां दिल्ली एनसीआर में की हैं। वो 500 से अधिक गाड़ियां चोरी की बेच चुके हैं। गैंग के निशाने पर मारुति की महंगी कार रहती थीं। वो रेकी करके कार को चिह्नित करते थे। रात में ऑल इन चाबी से गाड़ी का मुख्य दरवाजा खोलते थे। कभी दरवाजा नहीं खुलने पर शीशा तोड़कर खोल देते थे। सायरन नहीं बजे, इसके लिए बोनट खोलकर उसे तोड़ देते थे। इसके बाद स्टेयरिंग के नीचे लगा कवर खोलकर कपलर लगाकर गाड़ी के करंट को डायरेक्ट कर देते थे। गाड़ी में इग्निशन आ जाता है।
सरगना ने दिखाया चोरी का लाइव डेमो
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चाबी बनाने वाली डिवाइस को कपलर में लगा देते थे। इससे ब्लैंक चाबी की प्रोग्रामिंग बनाते थे। प्रोग्रामिंग होते ही गाड़ी स्टार्ट हो जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन मिनट लगते हैं। शातिर बदमाश ब्लैंक चाबी को ऑनलाइन मंगाते थे। कुछ दूरी पर गाड़ी ले जाने के बाद जीपीएस को निकाल देते थे, जिससे पकड़े नहीं जाएं। कुछ दिन सुरक्षित स्थान पर रखने के बाद गाड़ी को बेच देते थे।
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वाहन चोरी गैंग के सरगना सहित छह गिरफ्तार
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यू-ट्यूब से सीखकर बनाते थे नकली आरसी
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आरोपी संदीप गाड़ियों की बिक्री करने का काम करता है। अनिल चोरी के साथ फर्जी आरसी बनाने का काम करता था। इसके लिए वो यू-टयूब का सहारा लेता था। जिस गाड़ी को चोरी करते थे, उसी मॉडल की दूसरी गाड़ी का नंबर सड़क से गुजरती गाड़ियों से देखते थे। इसके बाद उसका इंजन और चेसिस नंबर गूगल पर सर्च करके निकालते थे। इसके बाद फर्जी आरसी कंप्यूटर की मदद से बना लेते थे। उनका सहयोग बुलंदशहर का रिजवान, ताज, रिंकू, दिल्ली का सरबजीत करते हैं। वह चोरी की गाड़ियां बिहार, असोम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलावा नेपाल तक में बेचते थे, जिससे एक ही नंबर की दो गाड़ियां पकड़ में नहीं आ सकें।
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चोरों की गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी देते एसएसपी
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