हेलीकॉप्टर हादसा: शहीद हुआ आगरा का लाल, बेटे पृथ्वी का दिया तोहफा देख बार-बार रो रहे पिता, कहा था-ये घड़ी आपके लिए, कभी नहीं रुकेगी
विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान की मां सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बेटियां और आस पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही थीं। बेटे के निधन के सदमे में मां के मुंह से बार बार यही शब्द निकल रहे थे, ओ बेटा, ओ मेरा बच्चा। रोते रोते जब सुशीला की हालत तक खराब होने लगी। परिवार के लोग उन्हें किसी तरह संभालने में लगे रहे। बार बार उन्होंने बेड पर लिटाते और कहते चुप हो जाओ, तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी, लेकिन मां तो मां होती है, कैसे भूले अपने बेटे की यादों को।
अफसोस: 11 घंटे बाद पहुंचा प्रशासन का पहला अधिकारी अफसोस जताने
पापा... ये घड़ी आपके लिए। कभी नहीं रुकेगी। काश! आज इस घड़ी का समय रुक जाए। बेटा... मुझे ऐसी घड़ी नहीं चाहिए। समय तू रुक जा। इतना कहकर विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान के पिता सुरेंद्र सिंह चौहान सिसकने लगते हैं। आसपास के लोग कहते है कि विंग कमांडर पृथ्वी के लिए प्रशासन की ओर से 11 घंटे बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी संवेदना प्रकट करने नहीं पहुंचा। रात 10:05 मिनट पर प्रशासन की ओर से सबसे पहले एसीएम-2 कृष्मानंद तिवारी पहुंचे। उस घर में आज सन्नाटा पसरा था, जिस घर से आसमान की ऊंची उड़ान के सपने देखने वाली युवा पीढ़ी को सीख दी जा रही थी।
दोपहर में पृथ्वी की बड़ी बहन शकुंतला ने टीवी पर हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन की खबर देखी तो भाई के नंबर पर कॉल किया तो स्विच ऑफ निकला। इस पर अनहोनी की आशंका पर पृथ्वी की पत्नी कामिनी से संपर्क किया, जिन्होंने पृथ्वी के हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हो जाने की जानकारी दी। यह सुनते ही शकुंतला के पैरों से मानो जमीन खिसक गई। उनके परिजनों ने उन्हें संभाला।
छत पर कल नही आईं चिड़िया: युवराज सिंह चौहान
विंग कमांडर पृथ्वी को चिड़ियों की उड़ान काफी रास आती थी। यही कारण था कि वो यहां रहते भले ही नहीं थे, फिर भी उस छत पर चिड़ियों के दाना डालने की परंपरा को नहीं भूलते थे, जिनसे उन्होंने उड़ान भरने के सपने देखे थे। यही कारण था कि उनकी शहादत के बाद भी उनके पुश्तैनी मकान में चिड़ियों के दानों से भरा थैला घर के आंगन में रखा था। पृथ्वी के भाई युवराज सिंह चौहान का कहना है कि हर रोज घर की छत पर पंछियों के लिए दाने डाले जाते थे। आज शाम चिड़िया दाने खाने भी नहीं आईं।
