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डिजिटल अरेस्ट: 'जिंदगी भर जेल में सड़ोगी', रिटायर्ड शिक्षिका को दिखाया ऐसा डर, ठग लिए 32 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:42 PM IST
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सार
साइबर अपराधी थोड़ी-थोड़ी देर में वीडियो कॉल कर जानकारी लेते थे। नजर रखी जाने की बोलकर धमकाते थे। आरोपी उनके खाने तक की जानकारी लेते थे। किसी को फोन करने पर आतंकियों से पूरे परिवार की हत्या करने का डर दिखाने लगते थे।
digital arrest
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
हेलो, मैं प्रवर्तन निदेशालय से बोल रहा हूं। तुम्हारा नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। तुम्हें गिरफ्तार किया जाएगा। जिंदगी भर जेल में सड़ोगी...। यह धमकी साइबर अपराधियों ने दयालबाग निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका को दी। उन्हें 9 दिन तक 4 से 5 घंटे के लिए डिजिटल अरेस्ट कर जेल भेजने का डर दिखाया। अपने खाते में 32 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी आरोपी कॉल कर धमकाते हुए और रुपयों की मांग करते रहे। धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़िता ने थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
एमरल्ड रेजिडेंसी, दयालबाग निवासी 65 वर्षीय लता शर्मा रिटायर्ड शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ईडी का अधिकारी बताया और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनका मोबाइल और खाते का इस्तेमाल होने की बात कही। वह डर गईं तो आरोपी और डराने लगे। वीडियो कॉल कर बात करने लगे। गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने और लंबी जेल काटने की बात कहकर ब्लैकमेल करने लगे।
आरोपी 9 दिन तक रोजाना 4 से 5 घंटे तक घर से बाहर नहीं निकलने के लिए मजबूर करते थे। थोड़ी-थोड़ी देर में वीडियो कॉल कर जानकारी लेते थे। नजर रखी जाने की बोलकर धमकाते थे। आरोपी उनके खाने तक की जानकारी लेते थे। किसी को फोन करने पर आतंकियों से पूरे परिवार की हत्या करने का डर दिखाने लगते थे। उन्होंने उनके बैंक खाते समेत पूरे परिवार और आसपास रहने वालों तक की जानकारी ले ली थी।
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एमरल्ड रेजिडेंसी, दयालबाग निवासी 65 वर्षीय लता शर्मा रिटायर्ड शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ईडी का अधिकारी बताया और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनका मोबाइल और खाते का इस्तेमाल होने की बात कही। वह डर गईं तो आरोपी और डराने लगे। वीडियो कॉल कर बात करने लगे। गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने और लंबी जेल काटने की बात कहकर ब्लैकमेल करने लगे।
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आरोपी 9 दिन तक रोजाना 4 से 5 घंटे तक घर से बाहर नहीं निकलने के लिए मजबूर करते थे। थोड़ी-थोड़ी देर में वीडियो कॉल कर जानकारी लेते थे। नजर रखी जाने की बोलकर धमकाते थे। आरोपी उनके खाने तक की जानकारी लेते थे। किसी को फोन करने पर आतंकियों से पूरे परिवार की हत्या करने का डर दिखाने लगते थे। उन्होंने उनके बैंक खाते समेत पूरे परिवार और आसपास रहने वालों तक की जानकारी ले ली थी।
उनसे पूछे बिना कोई काम करने पर गिरफ्तारी की धमकी देते थे। 27 मार्च को आरोपियों ने एक बैंक खाते का नंबर दिया। जांच के नाम पर खाते से रकम भेजने को कहा। दो बार में 32 लाख रुपये खाते में ट्रांसफर करा लिए। इस पर भी नहीं माने। आरोपी बाद में भी लगातार वॉट्सऐप पर वीडियो और ऑडियो कॉल कर परेशान करते रहे। लगातार रकम की मांग किए जाने से वह परेशान हो गईं। थाना साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने वापस कराए 10.52 लाख
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि महिला ने पुलिस को शिकायत की थी। जांच कर आरोपियों के खाते में जमा 10.52 लाख रुपये खाते में वापस करा दिए गए हैं। 4 लाख रुपये अभी भी फ्रीज़ हैं। शेष रकम आगे कई अन्य खातों में ट्रांसफर हुई है। मोबाइल नंबरों और आईपी एड्रेस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अवसाद में आई पीड़िता
डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई शिक्षिका लता ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उन्हें इतना डराया कि उन्हें लगने लगा कि किसी ने उनके मोबाइल और खाते का गलत इस्तेमाल कर लिया है। इससे वो इतना डर गई कि उनसे भोजन तक नहीं किया जाता था। रात में नींद नहीं आती थी। कोई कॉल आने पर धड़कनें बढ़ जाती थीं। रास्ते पर चलते समय या घर की छत पर खड़े होने पर लगता था कि हर ओर से उनके ऊपर नजर रखी जा रही है। वह मानसिक तनाव में आ गई थीं। लगता था कि अब इस मामले से वह बाहर नहीं निकल पाएंगी।
कोई सरकारी सुरक्षा एजेंसी नहीं कर सकती डिजिटल अरेस्ट
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। कभी जांच के नाम पर अपने खातों में रुपये भी नहीं ट्रांसफर करवाए जा सकते हैं। किसी भी अनजान कॉल खासकर खुद को पुलिस, सीबीआई या आरबीआई जैसी सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताने वालों पर तुरंत भरोसा न करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी बात कानून में नहीं होती है। ऐसे दावे सीधे ठगी का संकेत हैं। ओटीपी, पिन, सीवीवी और कोई पासवर्ड या बैंक खाते की जानकारी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए। वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगने वालों की तुरंत कॉल काट दें। किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या स्क्रीन-शेयरिंग रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। अपने मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें। लेन-देन के संदेश/ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें। साइबर ठगी की आशंका होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत करें। ऐसे मामले में घबराएं नहीं, सोच-समझकर निर्णय लें और परिवार और पुलिस से सलाह लें।
पुलिस ने वापस कराए 10.52 लाख
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि महिला ने पुलिस को शिकायत की थी। जांच कर आरोपियों के खाते में जमा 10.52 लाख रुपये खाते में वापस करा दिए गए हैं। 4 लाख रुपये अभी भी फ्रीज़ हैं। शेष रकम आगे कई अन्य खातों में ट्रांसफर हुई है। मोबाइल नंबरों और आईपी एड्रेस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अवसाद में आई पीड़िता
डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई शिक्षिका लता ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उन्हें इतना डराया कि उन्हें लगने लगा कि किसी ने उनके मोबाइल और खाते का गलत इस्तेमाल कर लिया है। इससे वो इतना डर गई कि उनसे भोजन तक नहीं किया जाता था। रात में नींद नहीं आती थी। कोई कॉल आने पर धड़कनें बढ़ जाती थीं। रास्ते पर चलते समय या घर की छत पर खड़े होने पर लगता था कि हर ओर से उनके ऊपर नजर रखी जा रही है। वह मानसिक तनाव में आ गई थीं। लगता था कि अब इस मामले से वह बाहर नहीं निकल पाएंगी।
कोई सरकारी सुरक्षा एजेंसी नहीं कर सकती डिजिटल अरेस्ट
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। कभी जांच के नाम पर अपने खातों में रुपये भी नहीं ट्रांसफर करवाए जा सकते हैं। किसी भी अनजान कॉल खासकर खुद को पुलिस, सीबीआई या आरबीआई जैसी सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताने वालों पर तुरंत भरोसा न करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी बात कानून में नहीं होती है। ऐसे दावे सीधे ठगी का संकेत हैं। ओटीपी, पिन, सीवीवी और कोई पासवर्ड या बैंक खाते की जानकारी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए। वीडियो कॉल पर डराकर पैसे मांगने वालों की तुरंत कॉल काट दें। किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या स्क्रीन-शेयरिंग रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। अपने मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें। लेन-देन के संदेश/ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें। साइबर ठगी की आशंका होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत करें। ऐसे मामले में घबराएं नहीं, सोच-समझकर निर्णय लें और परिवार और पुलिस से सलाह लें।
