कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जलेसर के घुंघरू-घंटी उद्योग पर बुरा असर पड़ा है। यहां संचालित होने वाले छोटे-बड़े करीब एक हजार कारखाने बंद चल रहे हैं। इससे करीब 10 हजार श्रमिकों और कारीगरों का रोजगार छिन गया है। हर महीने करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित है। एटा जिले के जलेसर का घुंघरू-घंटा उद्योग देश-विदेश तक पहचान रखता है। दूर-दूर तक यहां बने घुंघरू, घंटी, घंटे और पीतल के अन्य उत्पादों की सप्लाई भेजी जाती है और लगातार ऑर्डर मिलते रहते हैं। जलेसर में करीब 1000 छोटे-बड़े कारखाने हैं। यहां कच्चे माल की गलाई के बाद ढलाई, घिसाई, पॉलिश, पैकिंग आदि काम किए जाते हैं। इन कारखानों से करीब दस हजार श्रमिकों और कारीगरों को रोजगार मिलता है, लेकिन कोरोना संकट काल में सब ठप पड़ा है।
कोरोना ने छीनी घुंघरू-घंटी की खनक: जलेसर में 1000 कारखाने बंद, 10 हजार श्रमिकों का छिना रोजगार
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कोरोना की पहली लहर हल्की पड़ने के बाद कारोबार पटरी पर आया और ऑर्डर मिलने लगे। माल तैयार कर भिजवा दिया गया। भुगतान होता, इससे पहले दूसरी लहर आई और कोरोना कर्फ्यू लागू हो गया। इस स्थिति में तमाम व्यापारियों का भुगतान अटका हुआ है।
व्यापारी नितिन गोयल ने कहा कि अधिकांश ऑर्डर मंदिरों और मेलों के लिए आते हैं, लेकिन इस समय मंदिर लगभग बंद ही हैं और मेले भी नहीं लग रहे। जिसके चलते ऑर्डर नहीं मिल रहे। इस स्थिति में कारोबार ठप पड़ा है।
भट्ठी संचालक राजवीर सिंह ने कहा कि पिछले महीने से भट्ठियां पूरी तरह से बंद हैं। कोई भी नया माल तैयार नहीं किया जा रहा है। प्रत्येक भट्ठी पर औसतन रूप से छह लोग काम करते हैं। जिनकी कमाई का जरिया खत्म हो गया है।
भट्ठी संचालक रूप किशोर ने कहा कि हम लोगों के पास घंटी तैयार करने के अलावा कोई दूसरा कार्य नहीं है। यह कार्य भी करीब डेढ़ माह से बंद है। ऐसी स्थिति में हम लोगों के समक्ष भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।