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आगरा: संरक्षण के प्रयास से बढ़ रहा मगरमच्छ का कुनबा, चंबल नदी में दोगुनी हुई संख्या, तस्वीरें

Sat, 19 Jun 2021 12:26 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 19 Jun 2021 12:26 AM IST
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Crocodile Increased In Chambal Century
चंबल नदी में मगरमच्छ - फोटो : अमर उजाला

हर साल 17 जून को मगरमच्छ के संरक्षण के प्रयास और इनके प्रति लोगों को जागरूक करने उद्देश्य से विश्व मगरमच्छ दिवस मनाया जाता है। दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे मगरमच्छ चंबल नदी में बढ़ रहे है। छह साल में यहां इनकी संख्या 454 से बढ़कर 882 करीब दोगुनी हो गई है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में होकर बहने वाली चंबल नदी को 1979 में मगरमच्छ और घड़ियाल के संरक्षण के लिए चुना गया था। जो इन जलीय जीवों को रास भी आ रही है। वार्षिक गणना रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में 454, 2017 में 562, 2018 में 613, 2019 में 706, 2020 में 710, 2021 में 882 मगरमच्छ चंबल नदी में मिले। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि चंबल नदी में मगरमच्छ बढ़ने के साथ ही मानव मगरमच्छ संघर्ष की घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है। बाह रेंज में नदी किनारे के ग्रामीणों को इसके लिए जागरूक कर संरक्षण को प्रेरित करने अभियान चलता है।                                                      

Crocodile Increased In Chambal Century
चंबल के टापू पर बैठा मगरमच्छ - फोटो : अमर उजाला
हैचिंग पीरियड में हो जाते हैं हमलावर
रेंजर ने बताया कि अप्रैल में मगरमच्छ बालू में अंडे देते है। वन विभाग इसकी सुरक्षा करता है। जून में हैचिंग पीरियड में अंडों को नुकसान पहुंचाने के अंदेशे में मगरमच्छ हमलावर हो जाते है। इसके लिए हैचिंग पीरियड के समय ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने के लिए अलर्ट किया जाता है।     
Crocodile Increased In Chambal Century
चंबल में मगरमच्छ - फोटो : अमर उजाला
खनन पर रोक से बढ़ी संख्या 
वन रेंजर के मुताबिक नदी में बालू के खनन पर रोक से मगरमच्छ के साथ ही घड़ियाल की संख्या बढ़ी है। खनन से अंडे नष्ट हो जाते थे। जिससे वंश वृद्धि प्रभावित हो रही थी।  
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Crocodile Increased In Chambal Century
चंबल नदी के किनारे रेत पर चलता मगरमच्छ का बच्चा - फोटो : अमर उजाला
सौ से अधिक घड़ियालों की हो चुकी है मौत     
चंबल सेंक्चुरी में वर्ष 2008 में 100 से ज्यादा घड़ियालों की मौत हो गई थी। मौत का रहस्य जानने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी थी। तब से हर साल सर्दी के मौसम में इनकी गिनती होने लगी। 
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चंबल नदी में घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
हर साल आते हैं सैलानी
चंबल नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ का संरक्षण किया जा रहा है। हर साल इन्हें देखने बड़ी संख्या सैलानी चंबल पहुंचते हैं। सर्दियों में ठंड से बचने के लिए धूप सेंकने के लिए घड़ियाल और मगरमच्छ सुबह होते ही नदी से निकल आते हैं।
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