फिरोजाबाद: डेंगू और बुखार से मौत का ऑडिट करेगी टीम, दो दिन में देगी रिपोर्ट, घर-घर पहुंचे अफसर
झलकारी नगर निवासी पूनम (15) पुत्री उदयवीर को रविवार को परिजन लोडिंग वाहन में गंभीर हालत में सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां से स्टाफ ने मरीज को सरकारी ट्रामा सेंटर भेज दिया और फिर सरकारी ट्रामा सेंटर से फिर सौ शैय्या अस्पताल में मरीज को भेजा गया। लोडिंग वाहन में मरीज को लेटाकर परिजन इधर से उधर भटकते रहे। सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती फाइल बना दी गई। इसके बाद भी डेढ़ घंटे तक परिजन मरीज को लेकर ऊपर से नीचे दौड़ते रहे। मरीज की मां शीला देवी ने बताया कि बेटी पूनम को तेज बुखार था। 108 एंबुलेंस को फोन किया तो वह नहीं पहुंची। ऐसे में लोडिंग वाहन से ही बेटी को सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे। बिना चेक किए कह दिया कि सरकारी ट्रामा सेंटर ले जाओ। सरकारी ट्रामा सेंटर से कह दिया कि सौ शैय्या अस्पताल ही ले जाओ। इधर से उधर स्टाफ चक्कर लगवाता रहा। बाद में सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती करने के लिए फाइल दे दी गई लेकिन तीसरी मंजिल तक स्टाफ मरीज को लेकर दौड़ाता रहा। करीब डेढ़ घंटे बाद मरीज को भर्ती किया गया। इधर, ककरऊ कोठी निवासी दीपक ने बताया कि डेढ़ माह की रोशनी को डेंगू है। वार्ड में भर्ती तो कर दिया गया है लेकिन दो घंटे गुजरने के बाद भी इलाज के लिए कोई नहीं आया है।
मैडम! बच्चों की हालत बिगड़ती जा रही है। आप ही कुछ करो। अस्पताल के गेट पर दो घंटे बैठने के बाद कह दिया गया बेड खाली नहीं है। आप बच्चों को घर ले जाओ। अब आप ही बताओ मैडम कहां जाए। कहां पर बच्चों का इलाज कराएं? इतना पैसा नहीं है कि निजी अस्पताल में भर्ती कर दें। यह दर्द एक पिता ने मेयर नूतन राठौर के सामने व्यक्त किया। सत्यनगर टापाकलां निवासी चंद्र कुमार की तीन बेटियां रागनी (3), दीक्षा (7) और रुबी (11) को शनिवार रात बुखार आ गया। देर रात परिजन उपचार के लिए बच्चियों को लेकर सौ शैय्या अस्पताल पहुंचे। यहां बच्चियों के परिजनों से कह दिया गया कि गेट पर बैठो। बेड खाली हो जाएगा तो भर्ती कर लिया जाएगा। परिजन करीब दो घंटे तक अस्पताल के गेट पर बैठे रहे लेकिन बेड खाली नहीं हुआ। इसके बाद कह दिया गया कि आप बच्चों को घर ले जाओ। यहां बेड खाली नहीं है। बुखार से तप रही बेटियों को लेकर पिता घर आ गया। सूचना पर मेयर नूतन राठौर पहुंची। मेयर को देख पीड़ित बोला कि मैडम आप भी मदद करो। बच्चे बुखार से तप रहे है और पैसा हमारे पास नहीं है कि उनको निजी अस्पताल में ले जाया जाए। यही हाल रहा तो बच्चे बुखार से मर जाएंगे। पीड़ित की वेदना सुनकी मेयर ने डीएम को फोन कर मामले से अवगत कराया। इसके बाद एंबुलेंस बच्चों को लेने मोहल्ले में पहुंची। इसके बाद बच्चों का इलाज शुरू हो सका।