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गैस के लिए हाहाकार: एजेंसियों पर दिनभर भीड़, बंद होने की कगार पर कारखाने; समोसा-कचाैड़ी के बढ़ गए दाम

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Thu, 12 Mar 2026 09:14 PM IST
सार

यूपी में गैस संकट गहराता जा रहा है। गैस एजेंसियों पर दिनभर कतारें लगी रहती हैं तो औघोगिक उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। फिरोजाबाद में कांच कारखानों पर ताले लटकने की नाैबत आ गई है। 50 हजार कामगारों से रोजगार छिन गया है। 

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Gas crisis: Glass factories on verge of closure in Firozabad, prices of samosas and kachoris increased
गैस एजेंसी पर भीड़ और ठप पड़ा चूड़ी का काम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण जिले में पिछले चार दिनों से जारी रसोई गैस का संकट गहराता जा रहा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि गैस एजेंसियों पर सुबह से ही हाहाकार मचा हुआ है। इधर, गेल गैस कंपनी की ओर से औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली गैस के कोटे में 20 फीसदी की कटौती लागू कर दी है। इससे शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले कांच और चूड़ी उद्योग पर ताले लटकने की नौबत आ गई है। यदि अगले चार दिनों में औद्योगिक इकाइयों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो शहर के सैकड़ों कारखाने बंद हो सकते हैं।


 
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Gas crisis: Glass factories on verge of closure in Firozabad, prices of samosas and kachoris increased
गैस एजेंसी पर भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शहर से लेकर देहात तक की तमाम गैस एजेंसियों पर सुबह 5 बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। सिलिंडर की भारी किल्लत के चलते लोगों में बेचैनी बढ़ गई है, इसके कारण लोग डर के मारे घरों में सिलेंडरों का अवैध स्टॉक करने लगे हैं। सिलिंडर न मिलने से गुस्साए ग्राहक एजेंसी कर्मचारियों से उलझ रहे हैं और कई जगहों पर मारपीट की नौबत रही। बढ़ते तनाव को देखते हुए पूर्ति विभाग के अधिकारी भी भागदौड़ कर रहे हैं, लेकिन मांग और आपूर्ति का अंतर कम नहीं हो पा रहा है। एआरओ मनोज गहराना ने बृहस्पतिवार को शहर की कई एजेंसियों का दौरा किया।

 
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गैस संकट
होटल-रेस्तरां में घरेलू सिलिंडरों की सेंधमारी, खाद्य पदार्थों के दाम बढ़े
इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह व्यावसायिक क्षेत्र में घरेलू सिलिंडरों का अवैध उपयोग भी बताया जा रहा है। शहर के रेस्तरां, होटलों और फास्ट फूड कॉर्नरों में धड़ल्ले से घरेलू सिलिंडरों की खपत हो रही है। इस अवैध सेंधमारी ने आम घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी को दोगुना कर दिया है। इधर, खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ गए हैं। खासतौर पर समौसा, कचौड़ी, गोलगप्पे, भल्ले, चाऊमीन, स्ट्रीट पिज्जा, बर्गर, डोसा आदि के विक्रेताओं ने 5 से 10 रुपये बढ़ा दिए हैं।

 
Gas crisis: Glass factories on verge of closure in Firozabad, prices of samosas and kachoris increased
फिरोजाबाद में ठप पड़ा चूड़ी का काम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
50 हजार चूड़ी कामगारों के चूल्हे ठंडे होने की कगार पर
शहर के करीब 24 मोहल्लों में चूड़ी जुड़ाई के अड्डों पर सन्नाटा पसर गया है, जिससे 50 हजार से अधिक कामगारों की आजीविका पर सीधा प्रहार हुआ है। शहर के सम्राट नगर, सैलई, आजाद नगर, करबला, मथुरा नगर, दखल, भगवान नगर, सत्य नगर, ऐलान नगर, भरत नगर, इंद्रपुरी और नगला करन सिंह सहित दो दर्जन से अधिक मोहल्लों में चूड़ी जुडाई और सदाई का काम प्रमुखता से होता है। इन इलाकों में संचालित 200 से अधिक अड्डों पर घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत के चलते काम बंद हो गया है। कारखानों से सादा चूड़ी तो आ रही है, लेकिन बिना गैस के उसकी सदाई और जुड़ाई संभव नहीं हो पा रही है। चूड़ी सदाई कामगार पिंकी ने बताया, हमें न तो घरेलू सिलेंडर मिल पा रहे हैं और न ही वाणिज्यिक। जब ईंधन ही नहीं होगा, तो चूड़ी कैसे जुड़ेगी? काम बंद होने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।

 
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गैस संकट।
गेल के फरमान ने बढ़ाई मुश्किल
एक ओर जहां सिलिंडरों की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर गेल द्वारा गैस खपत में 20 प्रतिशत की कटौती के आदेश ने बड़े कारखानों में उत्पादन की रफ्तार को पहले ही धीमा कर दिया है। अब सिलेंडरों की सप्लाई चेन टूटने से छोटे पैमाने पर होने वाला जुडाई-सदाई का काम भी पूरी तरह बेपटरी हो गया है। चूड़ी जुडाई श्रमिक संगठन के पदाधिकारी रामदास मानव ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा शहर में घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति की तत्काल आवश्यकता है। यदि व्यवस्था जल्द सुचारू नहीं हुई, तो प्रभावित कामगारों की संख्या एक लाख के पार पहुंच जाएगी। प्रशासन को गैस की कालाबाजारी रोकने और आपूर्ति बहाल करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।

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