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UP: नैना की मौत से रो पड़ा नगला लाले, बेसुध हुई मां; पिता बोले- हर महीने चेताया, फिर भी नहीं सुधरी बस

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 13 Mar 2026 12:41 PM IST
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सार

स्कूल बस हादसे में नौ साल की नैना की मौत के बाद नगला लाले गांव शोक में डूब गया। बेटी को खोने के बाद मां बेसुध है, जबकि पिता ने आरोप लगाया कि बस की खराब हालत की शिकायत बार-बार करने के बावजूद प्रबंधक ने अनदेखी की।
 

Agra Bus Tragedy: Naina’s Village in Mourning, Family Demands Strict Action
गांव नगला लाले - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आगरा के गांव नगला लाले बृहस्पतिवार को आंसुओं में डूबा हुआ था। दूध विक्रेता ब्रह्मजीत बेटी नैना की मौत के गम में रोए जा रहे थे। पत्नी सोनम देवी बेसुध पड़ी थीं। जब भी होश में आती तब नैना-नैना चिल्लाने लगतीं। वहीं भाई कान्हा और बहन परी के भी आंसू नहीं रुक रहे। वो बहन के बैग और कॉपियों को पकड़कर उसे याद कर रहे थे। ग्रामीण और रिश्तेदार किसी तरह परिवार को संभाल रहे हैं।
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पुलिस ने देर रात स्कूल बस को बरामद किया था लेकिन संचालक पकड़ा नहीं जा सका। पिता ब्रह्मजीत ने बताया कि हर महीने फीस जमा करने पर प्रबंधक से कहते थे कि बस को ठीक करा ले। इसमें जगह-जगह फर्श टूटा हुआ है। किसी बच्चे की जान नहीं चली जाए। मुझे यह नहीं पता था कि यह लापरवाही बेटी की ही जान ले लेगी। उन्होंने बताया कि बस में परिवार के 9 बच्चों सहित 35 सवार थे। यह हादसा किसी के साथ भी हो सकता था। इस तरह की घटना फिर किसी के साथ न हो, इसलिए सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। इस पूरे मामले में जितने भी लोग दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होनी चाहिए।



 
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मां की हालत खराब
नैना की मौत से मां नैना बेसुध हैं। वो न कुछ खा रही हैं, न ही परिवार वालों से कुछ बोल रही हैं। जब परिवार की महिलाएं उनसे बात करने की कोशिश करती हैं, वो रोने लगती हैं। परिजन ने बताया कि सोनम की हालत बिगड़ रही है।

 

स्कूल का प्रबंधक ही निकला बस का चालक
 एत्मादपुर के गांव भागूपुर स्थित आरबीएस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लापरवाही का आलम था। जिस बस से गिरकर नौ साल की नैना की जान गई, उसका चालक कोई और नहीं बल्कि स्कूल का प्रबंधक नरेंद्र सिंह ही था। हादसे के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच में यह बात सामने आई है। इस तरफ पहले कभी शिक्षा विभाग के अधिकारियों का ध्यान नहीं किया।

इस वजह से एक बच्ची की जान चली गई। भागूपुर के रहने वाले लोगों ने बताया कि स्कूल में 400 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। भूतल पर 10 कमरे बने हुए हैं। 10 साल से स्कूल संचालित हो रहा है। गेट पर छोटा सा बोर्ड लगा रखा है। इस पर कक्षा एक से लेकर ग्यारहवीं तक लिखा हुआ है। संचालक का नंबर भी है। स्कूल की छुट्टी होने पर बस से नरेंद्र ही लेकर जाता था। उसने स्कूल के पीछे ही घर बना रखा है।
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