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भोले बाबा के पड़ोसियों का खुलासा: 'हमने कोई चमत्कार नहीं देखा...' 25 साल पहले सूरजपाल ने शुरू किया था ये काम

Thu, 04 Jul 2024 02:42 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 04 Jul 2024 02:42 PM IST
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Hathras Stampede Bhole Baba neighbor reveals People helping with donations and his followers kept increase
Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
पुलिसकर्मी सत्यपाल सिंह से ‘चमत्कारी’ बाबा बनने तक में सामाजिक सरोकार की भी बड़ी भूमिका रही। नौकरी छूटने के बाद ये सत्संग करने लगा। सत्संग में आने वाली महिलाओं की परेशानी सुनता। धन की जरूरत बताने पर सत्संग में आए श्रद्धालुओं से चंदा करवाते हुए मदद करता। इससे लोगों की श्रद्धा और अनुयायी उसके प्रति बढ़ते चली गई। उसके अनुयायियों में मुस्लिम भी हैं।
Hathras Stampede Bhole Baba neighbor reveals People helping with donations and his followers kept increase
साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
पड़ोसी जगदीश चंद्र ने बताया कि 25 साल पहले केदार नगर आवास पर सत्यपाल सिंह सत्संग करने लगा। शुरू में आसपास की महिलाएं आती थीं। चंदा एकत्रित कर मदद करने से घर-घर में पैठ बनती गई। अनुयायी दूरदराज से भी आने लगे। 

 
Hathras Stampede Bhole Baba neighbor reveals People helping with donations and his followers kept increase
नारायण साकार हरि भोले बाबा - फोटो : संवाद
पड़ोसी साबिर चौधरी ने बताया कि 30 साल पहले तक ये सामान्य आदमी की तरह रहता था। वर्ष 2000 के बाद से भोले बाबा यहां नहीं आया है। अनुयायी दूरदराज से यहां मत्था टेकने आते हैं। भोर 4 बजे से ही भीड़ जुटने लगती है। 

 
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Hathras Stampede Bhole Baba neighbor reveals People helping with donations and his followers kept increase
साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
कुटिया बंद रहती है और कभी-कभार साफ-सफाई के लिए अनुयायी खोलते हैं। शाम तक यही हाल रहता है। क्षेत्रीय नागरिक गगन और विक्की ने बताया कि हमने कोई चमत्कार नहीं देखा, लेकिन यहां हर मंगलवार को भीड़ अधिक होती है।

 
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Hathras Stampede Bhole Baba neighbor reveals People helping with donations and his followers kept increase
साकार हरि बाबा - फोटो : Facebook/Narayan sakar Hari
गोद ली बेटी को जिंदा करने के लिए चला था जाप
पड़ोसी साबिर चौधरी का कहना है कि बाबा ने अपने रिश्ते में साले की बेटी स्नेहलता को गोद लिया था। 24 साल पहले उसकी मौत होने पर शव को दो दिन यहां रखा गया।
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