ये बुजुर्ग सुनाते हैं शांत-गहरे समंदर की कहानी, इन्हें सुनो बहुत ध्यान से...। किसी लेखक की यह पंक्तियां आगरा के इन बुजुर्गों पर सटीक बैठती हैं। ये उम्र में भले ही बुजुर्ग हो गए हैं, लेकिन मन से जवान हैं और जिंदादिली से जी रहे हैं। दशकों से शांत, अपने काम में लीन और गहरे विचारों वाले बुजुर्गों से हमें सीख लेनी चाहिए। आज भी वे उसी तरह ऊर्जावान हैं, जिस तरह वर्षों पहले थे। उसी दिनचर्या को आज भी जीते हैं, जो पहले अपनाई थी। इनमें से कोई वयोवद्ध चिकित्सक हैं तो कोई होटल संचालक। आर्किटेक्ट, पूर्व विधायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी। इनकी सादगी लोगों को बहुत भाती है। अकसर ही वे अपने अनुभव साझा करते हैं। ये लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: उम्र में बुजुर्ग... मन से अभी भी जवान, जिंदादिली का हैं दूसरा नाम
Fri, 01 Oct 2021 11:19 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 01 Oct 2021 11:19 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस
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तबला वादक डॉ. केके भट्टाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. केके भट्टाचार्य: 60 साल से तबला वादन
पेशे से चिकित्सक डॉ. केके भट्टाचार्य बेहतरीन तबला वादक हैं। 81 वर्ष के डॉ. भट्टाचार्य साठ दशकों से तबला वादन कर रहे हैं। अपने पिता दिवंगत काली प्रसाद भट्टाचार्य से तबला वादन की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पंडित कामता प्रसाद व गुरु लल्लू सिंह से भी फन के गुण प्राप्त किए। उनके पुत्र डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य बताते हैं कि आज भी वे हर दिन दो घंटे रियाज करते हैं। ताज महोत्सव सहित तमाम मंचों व शहरों में अपना हुनर दिखा चुके हैं।
पेशे से चिकित्सक डॉ. केके भट्टाचार्य बेहतरीन तबला वादक हैं। 81 वर्ष के डॉ. भट्टाचार्य साठ दशकों से तबला वादन कर रहे हैं। अपने पिता दिवंगत काली प्रसाद भट्टाचार्य से तबला वादन की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पंडित कामता प्रसाद व गुरु लल्लू सिंह से भी फन के गुण प्राप्त किए। उनके पुत्र डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य बताते हैं कि आज भी वे हर दिन दो घंटे रियाज करते हैं। ताज महोत्सव सहित तमाम मंचों व शहरों में अपना हुनर दिखा चुके हैं।
94 वर्षीय सतीश चंद्र गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
सतीश चंद्र गुप्ता: फिट रहने के सिखाते हैं गुण
पूर्व विधायक सतीश चंद्र गुप्ता (विभव) 94 वर्ष की आयु में भी खासे सक्रिय हैं। योग उनकी दिनचर्या में शुमार है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी योग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनके पुत्र डॉ. सुशील गुप्ता बताते हैं कि सुबह पांच बजे से उनका दिन शुरू हो जाता है। योग के बाद नाश्ता, फिर दफ्तर में जाकर बैठते हैं। शाम को वापस आते हैं। संतुलित आहार और व्यायाम उनकी दिनचर्या में शामिल है। दूसरों को भी फिट रहने के गुण सिखाते हैं।
पूर्व विधायक सतीश चंद्र गुप्ता (विभव) 94 वर्ष की आयु में भी खासे सक्रिय हैं। योग उनकी दिनचर्या में शुमार है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी योग करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनके पुत्र डॉ. सुशील गुप्ता बताते हैं कि सुबह पांच बजे से उनका दिन शुरू हो जाता है। योग के बाद नाश्ता, फिर दफ्तर में जाकर बैठते हैं। शाम को वापस आते हैं। संतुलित आहार और व्यायाम उनकी दिनचर्या में शामिल है। दूसरों को भी फिट रहने के गुण सिखाते हैं।
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ताजमहल में फोटो खिंचाते बुजुर्ग दंपती
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र शर्मा: हर दिन जाते हैं काम पर
आगरा की प्रतिष्ठित संस्था होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा किसी पहचान के मोहताज नहीं। 80 वर्ष के सुरेंद्र शर्मा आज भी उतने ही सक्रिय हैं, जितने वर्ष 1955 में थे, जब उन्होंने दिल्ली गेट पर अपने होटल की नींव रखी थी। आज भी हर दिन होटल जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल बताते हैं कि इस होटल में रांगेय राघव सहित तमाम दिग्गत रहते थे। तमाम सामाजिक-साहित्यिक गतिविधियों का यह केंद्र आज भी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की पूर्व संध्या पर ताजमहल में कई बुजुर्ग जिंदादिल अंदाज में दिखे।
आगरा की प्रतिष्ठित संस्था होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा किसी पहचान के मोहताज नहीं। 80 वर्ष के सुरेंद्र शर्मा आज भी उतने ही सक्रिय हैं, जितने वर्ष 1955 में थे, जब उन्होंने दिल्ली गेट पर अपने होटल की नींव रखी थी। आज भी हर दिन होटल जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल बताते हैं कि इस होटल में रांगेय राघव सहित तमाम दिग्गत रहते थे। तमाम सामाजिक-साहित्यिक गतिविधियों का यह केंद्र आज भी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की पूर्व संध्या पर ताजमहल में कई बुजुर्ग जिंदादिल अंदाज में दिखे।
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शशि शिरोमणी
- फोटो : अमर उजाला
शशि शिरोमणी: एक ही दिनचर्या सेहत का राज
आगरा के महान क्रांतिकारी प्रकाश नारायण शिरोमणी के पुत्र शशि शिरोमणी आज भी उसी जोश के साथ काम करते हैं। 85 वर्षीय शशि शिरोमणी पेशे से आर्किटेक्ट हैं। शहर और तमाम अन्य जिलों की कई इमारतें, धर्मस्थल व स्कूल की डिजाइन इन्होंने ही तैयार की है। उनके पुत्र अश्विनी शिरोमणी बताते हैं कि उनकी दिनचर्या वर्षों से एक ही चल रही है। यही उनकी सेहत का राज है। आज भी दफ्तर जाते हैं। नक्शे बनाते हैं और मार्गदर्शन करते रहते हैं।
आगरा के महान क्रांतिकारी प्रकाश नारायण शिरोमणी के पुत्र शशि शिरोमणी आज भी उसी जोश के साथ काम करते हैं। 85 वर्षीय शशि शिरोमणी पेशे से आर्किटेक्ट हैं। शहर और तमाम अन्य जिलों की कई इमारतें, धर्मस्थल व स्कूल की डिजाइन इन्होंने ही तैयार की है। उनके पुत्र अश्विनी शिरोमणी बताते हैं कि उनकी दिनचर्या वर्षों से एक ही चल रही है। यही उनकी सेहत का राज है। आज भी दफ्तर जाते हैं। नक्शे बनाते हैं और मार्गदर्शन करते रहते हैं।