Agra: सिकंदरा में हिरनों के लिए खतरा बने सियार, काले हिरन रहते हैं निशाने पर, देखें तस्वीरें
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1905 में आए थे काले हिरन के दो बच्चे
एएसआई के रिटायर्ड वरिष्ठ संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित बताते हैं कि ब्रिटिश काल में अकबर के मकबरे में 1905 में अंग्रेज अफसर काले हिरन के दो बच्चे लेकर आए थे, जिनमें एक नर और एक मादा था। प्रजनन के बाद उनका कुनबा साल दर साल बढ़ता गया। वर्ष 2007 में बीमारी से पहले सिकंदरा में इनकी संख्या 140 से ज्यादा थी।
सात वर्ष पहले हुई थी तीन दर्जन से अधिक की मौत
वर्ष 2007 में अज्ञात बीमारी के कारण सिकंदरा में तीन दर्जन से ज्यादा काले हिरनों की मौत हो गई थी। इस मामले में दायर याचिका में वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने काले हिरनों को सुरक्षित जगह शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। शिफ्टिंग के लिए एएसआई ने वन विभाग को 52.90 लाख रुपये दिए हैं, लेकिन वन विभाग सात वर्षों में हिरनों को शिफ्ट नहीं कर पाया है। इसके लिए जगह की तलाश में ही पांच साल गुजर गए।
इटावा लॉयन सफारी भेजा जाना है काले हिरनों को
दुर्लभ प्रजाति के काले हिरनों को इटावा के लॉयन सफारी भेजने का फैसला दो साल पहले ही किया जा चुका है। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ने अनुमति भी जारी कर दी है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेश के बाद विशेष गाड़ी बनवाई जाएगी, जिसके जरिए काले हिरनों को लॉयन सफारी के एंटीलोप पार्क में छोड़ा जाएगा। सफारी में पहले से ही 100 से ज्यादा काले हिरन हैं।