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अमर उजाला पड़ताल: आगरा में सरकारी आवासों का हाल देखिए, जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर लोग

न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 08 Aug 2021 10:24 AM IST
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People living in dilapidated government houses in agra
जर्जर सरकारी आवासों में रह रहे लोग - फोटो : अमर उजाला

कब्जों पर लटके दरवाजे और खिड़कियां। छतों से टपकता पानी। गिरासू छज्जे। रंगाई-पुताई न मरम्मत। हर वक्त हथेली पर जान। ये हाल है आगरा के नॉर्मल कपाउंड स्थित सरकारी आवासों का। जहां हर वक्त हादसों का खतरा मंडराता रहता है। आवासों की मरम्मत की गुहार लगा-लगा कर कर्मचारी थक गए, लेकिन बदहाली दूर नहीं हो सकी।



जिले में पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, न्यायिक व अन्य विभागीय कर्मचारियों के लिए 750 से अधिक आवास हैं। जिनमें 330 आवास ऐसे हैं जो जर्जर हो चुके हैं। इनमें कर्मचारियों के परिवार जान हथेली पर रख कर रहते हैं। इन आवासों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 70 करोड़ रुपये की दरकार है। पिछले 20 साल से जर्जर आवासों के पुनर्निर्माण के लिए फंड नहीं मिला। 

पंचकुइयां जूता मंडी के बराबर से बने नॉर्मल कपाउंड में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां 50 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले एसएन कर्मचारी गोपाल वर्मा ने बताया कि एक साल में पांच बार प्रशासन को पत्र लिख कर मरम्मत के लिए गुहार लगाई। पीडब्ल्यूडी टीम ने सर्वे किया, लेकिन मरम्मत अब तक नहीं हो सकी। 

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जर्जर हालत में सरकारी आवास - फोटो : अमर उजाला

नेहरू नगर स्थित जज कपाउंड में 75 से अधिक आवास कंडम घोषित हैं। फिर भी इनमें लोग रह रहे हैं। इस संबंध में एडीएम सिटी एवं आवास प्रभारी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी का कहना है कि कंडम आवासों में रहने वाले लोगों को नोटिस जारी किए हैं। उनसे आवास खाली कराएं जाएंगे। उन्होंने कहा, 330 आवास जर्जर हैं, जिनके पुनर्निर्माण के लिए फंड नहीं मिला। आवासों की मियाद खत्म होने के कारण मरम्मत भी कारगर साबित नहीं होती।

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जर्जर हालत में सरकारी आवास - फोटो : अमर उजाला
175 कर्मियों के आवेदन लंबित
एडीएम सिटी कार्यालय में अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक 175 से सरकारी कर्मचारियों ने आवास आवंटन के लिए आवेदन किए हैं। परंतु आवास उपलब्ध नहीं होने के कारण इन्हें आवंटित नहीं किए जा सके। इस संबंध में एडीएम सिटी का कहना है कि आवासों की कमी है। प्राथमिकता पर सिर्फ 24 घंटे ड्यूटी या आकस्मिक ड्यूटी वाले कर्मियों को ही आवंटन किया जा रहा है। 
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रकाबगंज स्थित पुलिस आवासों की जर्जर स्थिति - फोटो : अमर उजाला
जज साहब के लिए नहीं घर
शहर में एक न्यायिक अधिकारी को आठ महीने से आवास आवंटित नहीं हो सका। उनके न्यायिक कार्यालय की हालत भी बेहद खराब है। चार बार डीएम व प्रशासन को कार्यालय की मरम्मत व आवास आवंटन के लिए पत्र लिखा, परंतु उन्हें आवास आवंटित नहीं हो सका।
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जर्जर हालत में पुलिस आवास - फोटो : अमर उजाला
नायब तहसीलदार भी भटक रहे
हाल ही में बाह तहसील में स्थानांतरित होकर आए नायब तहसीलदार आवास के लिए भटक रहे हैं। 15 दिन से उनके प्रार्थनापत्र एडीएम सिटी कार्यालय पर पड़ा है। होमगार्ड के एक अधिकारी को भी आवास की जरूरत है। इनके अलावा शहर में 20 से अधिक पुलिस उप निरीक्षक, पांच प्रभारी निरीक्षक भी आवास आवंटन के लिए सिफारिशें करा रहे हैं, परंतु उन्हें आवास नहीं मिल पाए।
 
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