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आगरा दरोगा हत्याकांड: सिपाही के साथ निहत्थे ही गांव गए थे शहीद प्रशांत, आरोपी ने उठाया इसी बात का फायदा

Fri, 26 Mar 2021 10:49 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 26 Mar 2021 10:49 AM IST
सार

  • नहर्रा में दबंगई दिखाता था विश्वनाथ
  • ग्रामीण बोले-तमंचा रखता था
  • झगड़े में कर चुका था फायरिंग
  • पुलिस तक नहीं पहुंचा मामला 

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Police Inspector Murder Case Prashant Goes In Village Without Arm
शहीद दरोगा प्रशांत - फोटो : अमर उजाला
आगरा में खंदौली के गांव नहर्रा में विश्वनाथ को पकड़ने के दौरान शहीद हुए दरोगा प्रशांत कुमार निहत्थे ही गए थे। उनके साथ उनकी सरकारी पिस्टल नहीं थी। उनकी तरह सिपाही चंद्रसेन भी अपने साथ असलाह नहीं ले गया था। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के निहत्थे होने के कारण विश्वनाथ की हिम्मत बढ़ गई। अगर हथियार होता तो शायद दरोगा पर गोली नहीं चला पाता। इस मामले में एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि दरोगा प्रशांत कुमार और सिपाही चंद्रसेन पंचायत चुनाव के कार्य में गये हुए थे। वहीं पर नहर्रा में झगड़े की सूचना मिली तो वह सीधे चले गए। उनके साथ सरकारी असलाह नहीं था। 

 
Police Inspector Murder Case Prashant Goes In Village Without Arm
दरोगा प्रशांत का हत्यारोपी विश्वनाथ - फोटो : अमर उजाला
गांव नहर्रा में दरोगा प्रशांत कुमार यादव की हत्या का आरोपी विश्वनाथ चौहान गांव में अपनी दबंगई दिखाता था। पुलिस के मुताबिक, वह गांव में तमंचा लेकर घूमा करता था। कई बार फायरिंग भी की। मगर, लिखित शिकायत नहीं होने की वजह से पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में बिजली चोरी का एक मुकदमा है। गांव नहर्रा में दरोगा प्रशांत कुमार यादव की हत्या के बाद पुलिस ने आरोपी विश्वनाथ चौहान का आपराधिक इतिहास निकाला। विश्वनाथ के खिलाफ वर्ष 2009 में बिजली चोरी का एक मुकदमा दर्ज हुआ था। यह भी विभाग के कर्मचारी ने ही दर्ज कराया था। अन्य कोई मुकदमा नहीं है। गांव के लोगों ने पुलिस को बताया कि विश्वनाथ मां राजेश्वरी के साथ गांव में रहता है, जबकि उसके भाई शिवनाथ न्यू आगरा के इंद्रपुरी में रहता है। उसकी गांव में डेयरी है। विश्वनाथ खेतीबाड़ी के साथ ही ब्याज का काम करता है।  

Police Inspector Murder Case Prashant Goes In Village Without Arm
दरोगा हत्याकांड: हत्यारोपी विश्वनाथ (बायें), दरोगा प्रशांत कुमार यादव का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
तकरीबन दो महीने पहले विश्वनाथ के घर में हथियार बंद बदमाशों के ठहरने की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस उसके घर पहुंची। दो युवकों को मौके से पकड़ लिया। उनके पास हथियार नहीं मिले। इस पर थाने से पूछताछ के बाद छोड़ दिए गए। बड़े भाई शिवनाथ से विश्वनाथ का कई बार झगड़ा हो चुका था। फायरिंग भी हुई। मगर, दोनों भाई आपस में बैठकर समझौता कर लेते थे। ग्रामीण भी भाइयों के बीच का झगड़ा होने की वजह से कुछ नहीं बोलते थे। थाना प्रभारी खंदौली अरविंद कुमार निर्वाल के मुताबिक, ग्रामीणों से पूछताछ में पता चला है कि विश्वनाथ अपने पास तमंचा रखता था। कई बार फायरिंग कर चुका था। मगर, किसी ने पुलिस से शिकायत नहीं की। इस वजह से मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। 
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दरोगा प्रशांत की हत्या का आरोपी विश्वनाथ का घर - फोटो : अमर उजाला
दोहरे हत्याकांड में पिता गए थे जेल 
थाना खंदौली पुलिस ने बताया कि वर्ष 2007 में नहर्रा गांव में युवक और युवती की हत्या हुई थी। उनके टुकड़े करके बोरे में बंद करके शवों को ठिकाने लगाया गया था। इस हत्याकांड में विश्वनाथ के पिता विजय सिंह पहलवान का भी नाम सामने आया था। पुलिस ने उनको जेल भेजा था। हालांकि साक्ष्य के अभाव में अन्य आरोपियों के साथ विजय सिंह भी बरी हो गए थे।

आगरा दरोगा हत्याकांड: पीछा करने पर आरोपी ने खेत की मेड़ से चलाई थी गोली, तमंचा लहराते हुए भागा
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प्रशांत का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
शिवनाथ की आर्थिक स्थिति ठीक है। उसका डेयरी का भी व्यवसाय है। उसने पिता से बंटाई पर खेत लिया था। इसके बाद आलू की फसल की। आलू की फसल में आधा हिस्सा विश्वनाथ मांग रहा था। बुधवार को सुबह 10 बजे शिवनाथ खेत से आलू निकलवा रहे थे। तभी उनकी मां राजेश्वरी आ गईं। मां के विरोध पर भी शिवनाथ ने आलू खोदाई बंद नहीं की। बाद में विश्वनाथ भी आ गया। सूचना पर दरोगा प्रशांत कुमार यादव दो सिपाही चंद्रसेन और गुलशन के साथ गांव में पहुंचे थे। दोनों भाइयों से बात की। कहा कि जिसने खेत बंटाई पर लिया है, फसल भी उसी को मिलेगी। दोपहर तीन बजे तक दरोगा पुलिसकर्मियों के साथ ही रहे थे। इस पर विश्वनाथ मां को लेकर चला गया था। इस पर फिर से आलू खोदाई होने लगी थी। शाम को साढ़े छह बजे फिर से विश्वनाथ ने विवाद किया। शिवनाथ की डेयरी पर आने वाले दूधियों और मजदूरों को तमंचा दिखाकर धमका रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यही सूचना पुलिस को मिली थी। दरोगा प्रशांत कुमार पास ही गांव में मौजूद थे। वह एक कार्रवाई के सिलसिले में गए थे। उनके साथ सिपाही चंद्रसेन भी मौजूद था। सूचना पर दोनों के गांव में पहुंचते ही विश्वनाथ खेत की मेड़ पर तमंचा लेकर खड़ा हो गया। यह देखकर प्रशांत कुमार ने उसे पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी। उन्होंने विश्वनाथ को पकड़ने की कोशिश की। विश्वनाथ ने तमंचे से गोली चला दी जो दरोगा को लगी और वह गिर गए और उनकी मौत हो गई।
 
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