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उम्मीदों के घोंसले: चंबल में जन्मे रिवर टर्न, इंडियन स्कीमर के बच्चे, लुप्ताप्राय: हैं पक्षी, देखिए तस्वीरें

Sat, 22 May 2021 12:03 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 22 May 2021 12:03 AM IST
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Rare Birds In Chamabal Sanctuary Wild Life News In Hindi
चंबल में लुप्तप्राय: पक्षियों के बच्चे - फोटो : अमर उजाला

कोरोना काल में एक अच्छी खबर है कि दुनिया में लुप्तप्राय: पक्षियों रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न और इंडियन स्कीमर के बच्चों ने चंबल में जन्म लिया है। अंडों से निकले ये बच्चे उड़ान भरने को तैयार हैं। मई के पहले सप्ताह में इन पक्षियों ने चंबल के टापू की बालू में पांच सौ से ज्यादा घोंसले बनाकर अंडे दिए थे। प्रत्येक घोंसले में दो-तीन अंडे थे। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि सर्दी के मौसम में चंबल का रुख करने वाले इन पक्षियों को चंबल का प्राकृतिक वास रास आया है। वन विभाग ने नेस्टिंग सीजन से इनकी निगरानी की थी। अंडों को वन्यजीवों से बचाने के लिए पहरेदारी की गई। अब अंडों से बच्चे निकल आए हैं। उन्होंने बताया कि इन पक्षियों की कुछ आबादी ईरान, म्यांमार, थाईलैंड और नेपाल में ही बची है। अगली स्लाइड में जानिए मेहमान पक्षियों की खास बातें...

Rare Birds In Chamabal Sanctuary Wild Life News In Hindi
दुर्लभ प्रजाति के परिंदे - फोटो : अमर उजाला
मेहमान पक्षियों की खास बातें
- तीनों मेहमान पक्षी दिसंबर-जनवरी के महीने में चंबल का रुख करते हैं।
- मौसम में गर्माहट आने पर अप्रैल माह में वापसी की उड़ान भरते हैं।
- इंडियन स्कीमर चंबल में पिछले पांच साल से रुकने के साथ प्रजनन करते हैं। 
- रिवर्र टर्न और ब्लैक बेलीड टर्न दो साल से यहां रुकने लगे हैं। 
- चंबल में इंडियन स्कीमर की आबादी करीब एक हजार होने का अनुमान है। 
- लॉकडाउन के कारण पर्यटकों की आवाजाही कम होने के कारण इस साल इनके अंडे और बच्चे ज्यादा सुरक्षित रहे हैं। 
 
Rare Birds In Chamabal Sanctuary Wild Life News In Hindi
चंबल सेंक्चुरी में पक्षी - फोटो : अमर उजाला
मार्च से मई के बीच होता है प्रजनन काल
दोनों ही प्रजाति की चिड़ियों का प्रजनन काल मार्च से मई के बीच रहता है। नर और मादा एक से दिखते हैं। ये पक्षी नदियों में बने टापुओं पर बालू में घोंसले बनाते हैं। मादा एक बार में दो से तीन अंडे देती है। इनका रंग हरापन लिए सिलेटी या बादामी होता है। 
 
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Rare Birds In Chamabal Sanctuary Wild Life News In Hindi
चंबल का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
छोटी मछलियां या कीड़े-मकोड़े हैं भोजन
रिवर टर्न और ब्लैक बेलीड टर्न का भोजन नदी के कीडे़-मकोडे़, छोटी मछलियां, मेंढक आदि होते हैं। ये मध्यम (38-43 सेमी) आकार के पक्षी हैं। जिनके सिर पर काली टोपी सी होती है। चोंच पीली और पैर लाल होते हैं। दोनों में अंतर शरीर के रंग (ग्रे और काला) का होता है। 
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Rare Birds In Chamabal Sanctuary Wild Life News In Hindi
चंबल नदी में विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों से खतरा

इन पक्षियों की घटती संख्या का सबसे बड़ा कारण इनके घोंसलों को नुकसान पहुंचना है। प्रदूषण तो एक बड़ा कारण है ही, नदियों के किनारे और टापू पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों से इनके हैबिटेट उजड़ रहे हैं। यही नहीं, बाढ़ से भी इनके घोंसलों को खतरा रहता है।

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