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गणतंत्र दिवस: आजादी के परवानों के पत्रों को संजोए हैं ताजनगरी, हर पन्ना बयां कर रहा देशप्रेम
Sun, 26 Jan 2020 12:50 AM IST
मुकेश कुमार
नेहा सिंह, अमर उजाला, आगरा
नेहा सिंह, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 26 Jan 2020 12:50 AM IST
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संग्रहालय में शहीद भगत सिंह के लिखे पत्र
- फोटो : अमर उजाला
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आज भारत गणतांत्रिक देश है। आजादी के परवानों का इसमें महत्वूपर्ण योगदान रहा है। इनके बलिदान को कभी कोई भुला नहीं सकता। ताजनगरी भी ऐसे परवानों से जुड़ी यादों को संजोए हुए हैं। आगरा के पालीवाल पार्क स्थित जोंस लाइब्रेरी के ताज म्युनिसिपल संग्रहालय में कुछ ऐसे विशेष पत्र हैं, जो स्वतंत्रता सेनानियों की शौर्यगाथा सुना रहे हैं। इसमें शहीद भगत सिंह को वो खत भी शामिल है, जो उन्होंने फांसी से पहले देश के नाम लिखा था। जिसमें लिखा एक-एक शब्द देशभक्ति से ओतप्रोत है।
संग्रहालय में रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा पत्र
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने जिस चरखे से अपने लिए सूत काता था, वो भी ताज म्यूनिसिपल संग्रहालय की शान बढ़ा रहा है। भगत सिंह के मृत्यु प्रमाण से लेकर झांसी की रानी की मृत्यु का तार इस संग्रहालय में है। जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई वर्ष 1858 में वीरगति को प्राप्त हुईं तो इसकी सूचना ग्वालियर के जनरल आर हैमिल्टन ने गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग को तार के माध्यम से दी थी। पत्र मिलते ही देशवासियों का खून खौल उठा थी।
शहीद भगत सिंह
शहादत से पहले लिखा था भगत सिंह ने पत्र
शहीद भगत सिंह को सजा-ए-मौत देने के बाद 23 मार्च 1931 को जेल अधीक्षक लाहौर द्वारा जारी उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी यहां है। उन्होंने अपनी चाची को गुरुमुखी भाषा में 24 अक्टूबर 1921 को पत्र भेजा था। केंद्रीय कारागार लाहौर में साथी जयदेव को 16 मई 1930 को भेजे पत्र की छायाप्रति भी उपलब्ध है। इसमें उन्होंने जयदेव से कुछ वस्तुएं और पढ़ने के लिए उपन्यास भेजने का अनुरोध किया था।
शहीद भगत सिंह को सजा-ए-मौत देने के बाद 23 मार्च 1931 को जेल अधीक्षक लाहौर द्वारा जारी उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी यहां है। उन्होंने अपनी चाची को गुरुमुखी भाषा में 24 अक्टूबर 1921 को पत्र भेजा था। केंद्रीय कारागार लाहौर में साथी जयदेव को 16 मई 1930 को भेजे पत्र की छायाप्रति भी उपलब्ध है। इसमें उन्होंने जयदेव से कुछ वस्तुएं और पढ़ने के लिए उपन्यास भेजने का अनुरोध किया था।
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संग्रहालय में शहीद भगत सिंह के लिखे पत्र
- फोटो : अमर उजाला
भगत सिंह द्वारा 27 जुलाई को अपने दादा अर्जुन सिंह को लिखे गए पत्र की छायाप्रति भी उन दिनों की याद दिलाती है। पत्र में भगत सिंह ने अपने दादा अर्जुन सिंह को कक्षा में अपने उत्तीर्ण होने की सूचना दी। साथ ही भाई कुलतार सिंह की बीमारी के बारे में पूछा। शहीद भगत सिंह ने क्रांतिकारी साथी जयदेव को लिखे पत्र की छायाप्रति में संतरे मिलने की बात कही।
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संग्रहालय में शहीद भगत सिंह के लिखे पत्र
- फोटो : अमर उजाला
'आखिरी खत' में लिखा था यह
लाहौर में फांसी दिए जाने से ठीक एक दिन पहले भगत सिंह ने देश के नाम लिखे पत्र में लिखा कि साथियों, स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर नहीं जी सकता। मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांतिकारी में शामिल हो चुका है। इसने मुझे इतना ऊपर उठा दिया है कि अब मैं जीकर इससे ऊपर हरगिज नहीं उठ सकता।
लाहौर में फांसी दिए जाने से ठीक एक दिन पहले भगत सिंह ने देश के नाम लिखे पत्र में लिखा कि साथियों, स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता। लेकिन एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर नहीं जी सकता। मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांतिकारी में शामिल हो चुका है। इसने मुझे इतना ऊपर उठा दिया है कि अब मैं जीकर इससे ऊपर हरगिज नहीं उठ सकता।